जानवरों के हमले से बचने के लिए किसानों को मिलेंगे चेस्टगार्ड और हेलमेट
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जंगलों के आस पास के क्षेत्र में गांववाले किसानी के लिए अपने खेत जाते हैं या फिर अपने पालतू जानवरों के साथ चरवाही करने, वहां मौजूद खतरनाक जानवर उन पर कब हमला कर दें ये कोई नहीं जानता।
कई बार शेरों ने गांव वालों पर हमला कर या तो उन्हें अधमरा छोड़ा है या फिर वो अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे हैं। लेकिन अब ऐसा कोई हादसा न हो इसके लिए मध्यप्रदेश के बांधवागढ़ टाइगर रिजर्व ने गांववालों से कहा है कि वे जब भी इस तरह अपना कोई काम करने जाएं तो हेलमेट और चेस्टगार्ड पहन कर जाएं ताकि वे शेरों के हमले से खुद को बचा सकें।
पार्क प्रबंधन का मानना है कि मवेशी चराने वाले समूह प्रायः कमजोर होते हैं और यदि उन्हें इस तरह की सुरक्षा दी जाएगी तो वे शेरों के हमले से बचे रहेंगे।
हो चुकी हैं कई घटनाएं
बताते चलें कि बीते कुछ दिनों में कई बार जंगल से शेर निकल कर चरवाहों और गांववालों पर उनके काम करने के दौरान उन पर हमला कर देता है।
हाल ही में 22 अगस्त को दामोखार रेंज के अंतर्गत सोनेलाल राय पर एक शेर ने हमला कर के उन्हें मार डाला था। किथौली और दामोखार क्षेत्र में 4 लोग शेर के हमले में मार दिए गए थे।
बंधवागढ़ पार्क के फील्ड डायरेक्टर सीएच मुरलीकृष्ण ने कहा कि हमने इस मुद्दे पर दामोखार क्षेत्र के किसानों से बात की है जहां 3 शेर घूम रहे है। (फाइल फोटो)
मिलेगा हेलमेट
वो हमारे द्वारा दिए गए हेल्मेट और चेस्टगार्ड को उपयोग करने के लिए मान गए हैं। हमने कटनी से 50 हेलमेट के करीब ऑर्डर किए हैं। ये हेलमेट और चेस्टगार्ड 12 गावों में वितरित किए जाएंगे।
बताते चलें कि चेस्ट गार्ड और हेलमेट प्रायः दंगा नियंत्रक पुलिस द्वारा प्रयोग में लाई जाती है।मुरलीकृष्ण ने कहा कि हर गांव से लगभग 2 या 3 चरवाहे हैं जो अपने साथ हेलमेट रखकर चलेंगे।
उन्होंने कहा कि पार्क प्रबंधन इस संबंध में भी सोच रहा है कि इन चरवाहों को बांस की खाल भी उपलब्ध कराई जाए ताकि वे इसकी मदद से किसी हमले के दौरान शेर से बचकर कूद सकें।
