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इस रमजान को भी मिलेगा कोई बजरंगी भाईजान?

Wed, 09 Sep 2015 01:37 PM IST
Updated Wed, 09 Sep 2015 01:37 PM IST
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No hope to ramzan to go his home in pakistan

हाल ही में आई फिल्म बजरंगी भाईजान में एक पाकिस्तानी बच्ची को उसकी मां से मिलाने के लिए सरहद पार करने वाले सलमान खान ने बेशक इस रोल से खूब तालियां बटोरी हों लेकिन दो साल से एमपी के भोपाल में रह रहे रमजान को ऐसा कोई सलमान नहीं मिल रहा जो उसे उसकी मां से पाकिस्तान में मिलवा सके।

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आलम ये है कि सरकारी मशीनरी बच्चे को मां बाप से मिलवाने में हाथ खड़ी कर चुकी है तो उसकी सुध लेने वाला यहां कोई नहीं।

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार मध्यप्रदेश के महिला और बाल विकास विभाग ने भी मोहम्मद रमजान को पाकिस्तान भेजे जाने की किसी भी संभावना से यह कहकर इंकार कर दिया है कि यह हमारा काम नहीं है। अब वो मामले को बाल कल्याण समिति को भेजने की तैयारी कर रही हैं।
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बता दें कि 15 साल का मोहम्मद रमजान पाकिस्तान में अपनी मां से मिलने के लिए बांग्लादेश से बॉर्डर पार कर हिंदुस्तान आ गया था। यहां आने के बाद से वह अक्टूबर 2013 से भोपाल के शेल्टर होम में रह रहा है।
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अपनी जिम्मेदारियों को दूसरों पर डाल रहे सरकारी महकमे

No hope to ramzan to go his home in pakistan

पिछले दो साल में न ही राज्य सरकार और न ही महिला एवं बाल विकास विभाग ने उसे उसके परिवार तक पहुंचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया। महिला एवं बाल विकास विभाग के मुख्य सचिव जेएन कनसोतिया ने कहा कि, 'यह हमारा काम नहीं है कि रमजान को उसके घर तक पहुंचाया जाए।

यह बाल कल्याण समिति की जिम्मेदारी है और वो इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।' जब उनसे पूछा गया कि पिछले दो साल से उन्होंने इस दिशा में क्या किया तो कनसोतिया का कहना था कि, 'हम इस संबंध में कुछ क्यों करें यह हमारा काम नहीं है।'

वहीं बाल अधिकार कार्यकर्ता प्रशांत दूबे निराश व्यक्त करते हुए कहते हैं कि WCDD अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है। यह आश्चर्यजनक है कि वह अपनी जिम्मेदारी उठाने को तैयार ही नहीं है।

वहीं CWC ने भी प्रक्रिया के तौर पर सिर्फ इतना किया है कि उसके संबंध में बांग्लादेश दूतावास को जानकारी भेज दी है। जो उसे इन परिस्थितियों में पाकिस्तान भेजने के लिए प्रर्याप्त नहीं है।

दिख रही है उम्मीद की छोटी सी किरण

No hope to ramzan to go his home in pakistan

वहीं रमजान जो अपनी मां के पास पाकिस्तान में भेजने के लिए जोर देता है, के अनुसार, उनका कहना है कि मुझे पाकिस्तान भेजने में समस्या है, लेकिन मैं अपने पिता के पास वापस बांग्लादेश नहीं जाना चाहता। मेरी फूफी बांग्लादेश में रहती हैं अगर मुझे उन तक पहुंचाया जाता है तो भी वे मुझे पाकिस्तान में मेरी मां से मिलाने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि बच्चों के ‌लिए काम करने वाली एक एनजीओ ने दिल्‍ली ‌‌स्थित एनजीओ TOP जिसकी एक शाखा बांग्लादेश में भी है उससे संपर्क किया है। एनजीओ डायरेक्टर अर्चना सहाय के अनुसार रमजान बांग्लादेश जाने के लिए तैयार है इसलिए हम ऐसे किसी एनजीओ की तलाश कर रहे हैं जो बांग्लादेशी बच्चों के उत्‍थान की दिशा में काम करता हो।

लेकिन उन्हें भी इसके लिए प्रदेश सरकार से एक परमिशन लेटर की जरूरत पड़ेगी। जिसके लिए हमने CWC से TOP को लिखने के लिए कहा है। लेकिन वो इस दिशा में कुछ भी करने को तैयार नहीं हैं।

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