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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP News Thieves turned to repay debts of those who helped in lockdown, stole 37 vehicles in a year from Bhopal

MP News: लॉकडाउन में मदद करने वाले का कर्ज चुकाने बन गए चोर, भोपाल-इंदौर से एक साल में 37 वाहन चुराए

Sun, 02 Oct 2022 01:56 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 02 Oct 2022 01:56 PM IST
सार

अशोका गार्डन थाना पुलिस ने दो वाहन चोरों से 37 चोरी के वाहन बरामद किए है। इनकी कीमत 30 लाख के करीब है। आरोपी लॉकडाउन में मदद करने वाले का कर्ज चुकाने वाहन चोरी करने लगे थे। पुलिस ने 3 वाहन खरीदारों समेत पांच को गिरफ्तार किया है। 

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MP News Thieves turned to repay debts of those who helped in lockdown, stole 37 vehicles in a year from Bhopal
अशोका गार्डन ने दो चोर से 37 चोरी के वाहन जब्त किए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में अशोक गार्डन पुलिस ने दो वाहन चोर को गिरफ्तार कर उनके पास से 37 चोरी के वाहन बरामद किए है। इनकी कीमत करीब 30 लाख रुपए है। इसके साथ ही तीन खरीदारों को भी आरोपी बनाया है। पकड़े गए आरोपी में एक ने लॉकडाउन में मदद करने वाले का कर्ज चुकाने के लिए अपने एक साथी के साथ चोरी शुरू की थी। आरोपियों की पहचान हरदा निवासी अमित राठौर और चांदबड़ निवासी धर्मेंद्र सिंह के रूप में हुई है।
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डीसीपी साईं कृष्णा के अनुसार वाहन चैकिंग के दौरान अशोका गार्डन पुलिस को दो संदिग्ध पकड़ में आए। व्हीकल डिटेक्शन पोर्टल से पता चला कि उनके पास चोरी की बाइक है। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसमें पता चला कि उन्होंने अशोका गार्ड थाना क्षेत्र से ही 10 वाहन चुराए है। उन्होंने पिछले एक साल में 37 वाहन भोपाल और इंदौर से चुराने की बात कबूल की। आरोपी ने चोरी के वाहन अपने परिचित दीपक रघुवंशी, किशन सेन, और दिनेश चौरिया को बेचने की बात कबूल की। पुलिस ने तीनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है।
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पुलिस के अनुसार एक आरोपी धर्मेंद्र इंदौर में ढाबा चलाता था। उसके ढाबे पर पर अमित और किशन दोनों कर्मचारी थे। लॉकडान के दौरा जब ढाबा बंद था तो धर्मेंद ने दोनों की आर्थिक रूप से मदद की थी, जिससे वह कर्ज में डूब गया और ढाबा भी बंद हो गया। उसकी मदद करने के लिए अमित और किशन ने वाहन चोरियां शुरू कर दी। वह वाहन चोरी के बाद उसे बेच कर कुछ हिस्सा अपने पास रखकर बाकी धर्मेंद्र को भेज देते थे।  
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