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MP News: डैम में पानी भरने से टापू पर फंसे कुछ वानर; रेस्क्यू की कोशिशें हो रही नाकाम, तादाद को लेकर भी संशय

Tue, 21 Nov 2023 04:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Tue, 21 Nov 2023 04:20 PM IST
सार

Burhanpur News: बुरहानपुर जिला प्रशासन के अनुसार भावसा डैम के पास टापू बन चुके जंगल में कुल चार से पांच बंदर फंसे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस क्षेत्र में पिछले छह महीने से करीब 50 से अधिक बंदर फंसे थे, जिनका समय पर रेस्क्यू न किए जाने के चलते अब करीब चार से पांच वानर ही बचे हैं। बाकी सभी ने भूख से तड़प कर जान दे दी है।
 

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MP News: Some monkeys stranded on island due to waterlogging in Bhavsa Dam; Rescue efforts are failing
पानी भरने की वजह से इन्हीं पेड़ों पर वानर फंस गए हैं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में पिछले साल ही वन क्षेत्र में बने भावसा डैम में अचनाक हुई बारिश का पानी भरने के चलते कुछ बंदरों की जान पर बन आई है। हालांकि वन अमले सहित जिला प्रशासन इन बंदरों का रेस्क्यू करने की कोशिश तो जरूर कर रहा है। लेकिन अब तक कोई कारगर उपाय न होने के चलते अभी तक ये बंदर जंगल में पानी भरने से टापू बने एक क्षेत्र के कुछ पेड़ों पर फंसे रह गए हैं। बंदरों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग बातें कही जा रही हैं।

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जिला प्रशासन का मानना है कि टापू बन चुके जंगल में कुल चार से पांच बंदर फंसे हैं। वहीं, ग्रामीणों का मानना है कि इस क्षेत्र में पिछले छह महीने से करीब 50 से अधिक बंदर फंसे थे, जिनका समय पर रेस्क्यू न किए जाने के चलते अब करीब चार से पांच वानर ही बचे हैं। बाकी सभी ने भूख से तड़प कर जान दे दी है।
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बुरहानपुर जिले में बना भावसा डैम इन दिनों चर्चा में है। करीब 104 करोड़ रुपये की लागत से अमरावती नदी पर जिले की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना बनी है। इससे उम्मीद तो थी कि आसपास के करीब सात गांवों के 3,750 हेक्टेयर के क्षेत्र में सिंचाई होगी और इन गांवों के किसानों की फसलें लहलहाएंगी। लेकिन लगभग छह महीने पूर्व बने इस बांध में अचानक हुई जोरदार बारिश के चलते पानी भर गया। इससे आसपास के क्षेत्र में भी टापू जैसी स्थिति बन गई। इन्हीं टापू बने क्षेत्रों में से डैम के करीब के एक टापू पर लगे कुछ पेड़ों पर बारिश के समय वन क्षेत्र में घूम रहे बंदर फंस गए, जो कि जलभराव को पार नहीं कर सके। उसके बाद वे पेड़ों की छाल खाकर जीवन के लिए संघर्ष करने लगे। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब समय गुजरने के साथ-साथ पेड़ों की छाल भी खत्म हो चली है। इसलिए वहां फंसे वानरों की अब जान के लाले पड़ने लगे हैं।
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वानरों की संख्या को लेकर हैं अलग-अलग दावे
यहां फंसे वानरों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग बातें कही जा रही हैं। जिला प्रशासन की मानें तो यहां केवल तीन से चार वानर ही फंसे हुए हैं। वहीं, आसपास के ग्रामीणों के अनुसार यहां फंसे हुए करीब 50 से अधिक वानरों में से अधिकतर वानर भूख से तड़प-तड़प कर वन क्षेत्र में ही मर गए और अब मात्र तीन से चार ही बचे हुए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने पेड़ों पर फंसे इन वानरों का रेस्क्यू करने के लिए महाराष्ट्र से तैराक भी बुलाए। साथ ही वन अमले ने भी कोशिश की। लेकिन पेड़ों पर चढ़कर वानर को नीचे उतारना घातक साबित हो सकता है। ऐसे में वानर हिंसक होकर वन अमले को ही नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए यह तरीका भी कारगर साबित नहीं हुआ। इसके बाद वन अमले ने वहां नाव छोड़कर उस पर वानरों के बैठने का इंतजार भी किया। लेकिन वानर नीचे उतरकर नाव पर भी नहीं बैठे। इस वजह से यहां मौजूद तीन से चार बंदरों का अभी तक रेस्क्यू का काम नहीं हो पाया है।


सात-आठ दिन पहले हुई बारिश से फंसे वानर
वहीं, क्षेत्र के वन अधिकारी एसडीओ फॉरेस्ट अजय सागर का कहना है कि यहां 50 बंदर होने की बात गलत है। केवल तीन से चार बंदर हैं जो की भावसा डैम बनने के समय वहां बैठे हुए थे और अचानक पानी भरने के चलते वहीं फंस गए हैं। वन अधिकारी के अनुसार इन पेड़ों की भी कटाई होना थी, लेकिन ग्रामीणों ने अपनी धार्मिक आस्था के चलते इन पेड़ों को काटने नहीं दिया था। जिन पर अब यह वानर फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें बचाने के लिए तैराक भी बुलाए थे और नावें भी रखवाई थीं। लेकिन यह वन्य प्राणी हैं इसलिए उछल कूद करते रहते हैं। हालांकि उनके अनुसार ग्रामीणों ने उन्हें भी वानरों की मौत का बताया है, पर अभी मौके का मुआयना नहीं हो पाया है। हालांकि इनके रेस्क्यू के प्रयास वन अमले द्वारा किए जा रहे हैं। ये वानर करीब सात-आठ दिन पहले हुई बारिश के बाद से यहां फंसे हुए हैं।

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