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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP News: Rare archival document 'Tarikh and Sanchi' displayed at the National Archives' exhibition in Bhopal

MP News: भोपाल में राष्ट्रीय अभिलेखागार की प्रदर्शिनी में दुर्लभ अभिलेखीय दस्तावेज ‘तारीख ए सांची’ प्रदर्शित

Tue, 18 Oct 2022 11:32 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Tue, 18 Oct 2022 11:32 PM IST
सार

1873 में प्रकाशित 'तारिख-ए-सांची' नामक पुस्तक मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित एक पुस्तक का उर्दू अनुवाद है। अधिकारियों ने बताया कि अनुवाद रियासत की तत्कालीन शासक भोपाल की नवाब शाहजहां बेगम के कहने पर किया गया था।

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MP News: Rare archival document 'Tarikh and Sanchi' displayed at the National Archives' exhibition in Bhopal
सांची के स्तूप - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय अभिलेखागार की प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश में सांची के स्मारकों पर लगभग 150 साल पुरानी किताब और तत्कालीन नवाबों से संबंधित अन्य दुर्लभ मूल अभिलेखीय दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया। किताब सुलेश का उपयोग कर उर्दू में लिखी गई है।
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1873 में प्रकाशित 'तारिख-ए-सांची' नामक पुस्तक मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित एक पुस्तक का उर्दू अनुवाद है। अधिकारियों ने बताया कि अनुवाद रियासत की तत्कालीन शासक भोपाल की नवाब शाहजहां बेगम के कहने पर किया गया था। 630 पृष्ठों वाली यह दुर्लभ पुस्तक सुलेख का उपयोग करके निर्मित एक पांडुलिपि है, जो एक मात्र हमारे कार्यालय में उपलब्ध है। जिसे एक दिन के लिए सेमिनार के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया है।
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यूनेस्को की विश्व धरोहर सांची की साइट में बौद्ध स्मारकों का एक समूह शामिल है। राष्ट्रीय अभिलेखागार ( एनएआई )  के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भोपाल सर्कल द्वारा संयुक्त रूप से मंगलवार को 'अभिलेखागार और पुरातत्व' शीर्षक से संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
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राष्ट्रीय अभिलेखागार के उप निदेशक संजय गर्ग ने कहा कि "राष्ट्रीय अभिलेखागार और एएसआई, जो दोनों संस्कृति मंत्रालय के दायरे में काम करते हैं, एक साथ आए हैं, जो दोनों एजेंसियों के बीच अधिक तालमेल बिठाएंगे, जो दोनों सामग्री और अन्य विरासत के संरक्षण और प्रलेखन से संबंधित हैं।"  
 
उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के तहत इस अवसर पर कुछ पुरातात्विक कलाकृतियों का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। एनएआई भोपाल में अभिलेखागार के सहायक निदेशक एन राजू सिंह ने कहा, 'तारीख-ए-सांची' का मूल से 1873 में एक शिक्षक फैयाजुद्दीन अहमद द्वारा अनुवाद किया गया था, "लेकिन हम अभी तक अंग्रेजी की पुस्तक नहीं ढूंढ नहीं पाए है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा प्रदर्शनी में जॉन मार्शल के  'सांची के स्मारक' के तीन खंडों और भोपाल राज्य के तत्कालीन नवाबों से जुड़े कुछ दुर्लभ पत्राचार और अधिसूचनाओं का भी प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय में 1840 से 1950 के दशक के अभिलेखीय दस्तावेज हैं और कुछ पुरानी पुस्तकों सहित लगभग 50 दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया है।
 
भोपाल के सार्वजनिक भवनों और स्थानों की कुछ दुर्लभ मोनोक्रोम छवियां, जिन्हें एनएआई भोपाल में प्रदर्शित किया गया था। हाल ही में 13 अक्टूबर को शुरू हुई प्रदर्शनी के हिस्से के रूप में - 'महात्मा गांधी और भोपाल' भी प्रदर्शन का हिस्सा हैं। आयोजन दल के एक सदस्य ने कहा कि भोपाल के तत्कालीन नवाब द्वारा 20वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाई गई 'राहत मंजिल' की दुर्लभ छवियां, जहां गांधी तत्कालीन रियासत की अपनी यात्रा के दौरान रुके थे, को प्रदर्शित किया गया है। .

उन्होंने बताया कि प्रतिष्ठित 'बेनजीर पैलेस', भोपाल स्टेशन और इकबाल मैदान के सामने 'शोकत महल' की पुरानी छवियों को भी प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने कहा कि 'राहत मंजिल' कई दशक पहले गलती से जल गई थी।  प्रदर्शनी में अन्य अभिलेखीय दस्तावेजों में स्वतंत्रता के तुरंत बाद के वर्षों में भोपाल राज्य द्वारा उर्दू में जारी कई आधिकारिक अधिसूचनाएं शामिल हैं।

जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली, तब भोपाल के शासक नवाब हमीदुल्लाह खान थे। मध्य प्रदेश राजभवन की वेबसाइट के अनुसार, मई 1948 में, नवाब द्वारा प्रजा मंडल नामक एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया था, जिसे 29 जनवरी, 1949 को भंग कर दिया गया था।

भोपाल के नवाब द्वारा प्रजा मंडल सरकार बनाने से संबंधित एक दस्तावेज, भोपाल राज्य द्वारा उर्दू में एक गजट अधिसूचना 15 अगस्त, 1948 को स्कूलों और कार्यालयों के लिए छुट्टी की घोषणा; महात्मा गांधी की हत्या के बाद की स्थिति पर भोपाल के तत्कालीन प्रधान मंत्री राजा अवध नारायण बिसारिया द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई 31 जनवरी, 1948 की एक रिपोर्ट भी दुर्लभ प्रदर्शनों में से एक है।


भोपाल राज्य 18वीं सदी के भारत का एक स्वतंत्र राज्य था, 1818 से 1947 तक भारत की एक रियासत थी, और 1949 से 1956 तक एक भारतीय राज्य था। इसकी राजधानी भोपाल शहर थी। 1956 में, मध्य भारत और विंध्य प्रदेश के साथ, इसे मध्य प्रदेश में मिला दिया गया और भोपाल शहर इसकी राजधानी बन गया।
 
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