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MP News: मैहर में मजदूरी के दलदल में फंसा बचपन, कई गांव के सैकड़ों बच्चे पढ़ाई छोड़ बन गए मजदूर
Tue, 21 Jan 2025 05:12 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 21 Jan 2025 05:12 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा का भी स्तर गिरता जा रहा है। इसकी ताजा तस्वीर मैहर जिले से सामने आई है। जहां छोटे-छोटे बच्चे पढाई छोड़ अब ईंट भट्ठे में मजदूरी कर रहे हैं, जिसका वीडियो भी सामने आया है।
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बाल मजदूरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिस उम्र में बच्चों को कलम पकड़नी चाहिए, उस उम्र में वे कड़ी मेहनत करने को मजबूर हैं। बच्चों की निरक्षरता का यह कड़वा आंकड़ा कई वर्षों की जनगणना की समीक्षा करने के बाद सामने आया है। जनगणना से पता चलता है कि भारत में बाल मजदूरी में फंसे सात से 14 साल की आयु वर्ग के करीब 14 लाख बच्चों को अपना नाम तक लिखना नहीं आता। जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर तीन में से एक बच्चा बाल मजदूरी की गिरफ्त में है और अक्षर ज्ञान से बिल्कुल वंचित है, जबकि भारत के संविधान में तीन दशक पहले बाल मजदूरी को खत्म करने की व्यवस्था की गई थी। अगर मध्यप्रदेश की बात की जाए तो प्रदेश में 38 फीसदी बाल मजदूर हैं।
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बालश्रम दंडनीय अपराध होने के बाद भी इस पर अभी प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ है। आज भी 30 हजार से अधिक श्रमिक परिवार के बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं। शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद भी स्कूल जाने से वंचित बच्चों का यह आंकड़ा कई सवाल खड़ा करता है।
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फेल हुए सरकारी सिस्टम
सरकार बच्चों के उत्थान के लिए कितने ही जतन कर लें, लेकिन श्रम विभाग की लापरवाही से आज भी बच्चे पढ़ाई-लिखाई छोड़कर बाल मजदूरी की भट्ठी में सुलग रहे हैं। बच्चों की शिक्षा को लेकर सरकार बड़ा बजट प्रति वर्ष खर्च करती है। लेकिन, अधिकारियों की उदासीनता से हजारों बच्चे शिक्षा से वंचित हो बाल मजदूरी करने को विवश हैं।
मैहर जिले के सैकड़ों बच्चे ऐसे हैं, जो स्कूल की जगह मजदूरी करने जाते हैं। इसका एक ताजा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मासूम विद्यालय की जगह ईंट-भट्ठे में मजदूरी करता नजर आ रहा है। इस वीडियो ने मध्यप्रदेश के तमाम योजनओ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, बाल आयोग और शिक्षा विभाग के द्वारा इन बच्चों को शिक्षा के लिए जागरूक किया जाता है। मगर मैहर में इसका कोई व्यापक असर नहीं दिख रहा है। मैहर जिले के तमाम होटलों और अन्य जगहों पर नाबालिग ही काम करते नजर आ रहे हैं।
ऐसे प्रकरण निंदनीय हैं
इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ अध्यापक जेएस गौतम ने कहा कि छह से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा की ओर ले जाना चाहिए। अगर ऐसे बच्चे से काम लेने के प्रकरण सामने आते हैं तो ये निंदनीय है। ऐसे बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का काम समाज को भी करना चाहिए।
इनका कहना है
इस मामले पर जब हमारी टीम ने मैहर कलेक्टर रानी बाटड से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान अंतर्गत समय-समय पर बच्चों को एनरोल किया जाता है। साथ ही श्रम विभाग द्वारा भी नाबालिग बच्चों के मजदूरी लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रतिष्ठानों का सर्वे भी कराया जाता है। शिक्षा विभाग भी इसकी मॉनिटरिंग करता है। अगर इसके बावजूद भी कहीं ऐसी बात आती है तो निश्चित रूप से हम कार्रवाई करेंगे।
