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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP News: Congress removed Yadav for rebel Shera, who is Arun Yadav's enemy?

MP Politics: राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की कमान कांग्रेस के बागी शेरा को, कौन है अरुण यादव का दुश्मन?

Fri, 11 Nov 2022 06:41 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Fri, 11 Nov 2022 06:41 PM IST
सार

प्रदेश में यात्रा के प्रवेश करने से नौ दिन पहले ही कांग्रेस में लड़ाई शुरू हो गई है। यात्रा की व्यवस्था अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की जगह बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को सौंप दी गई है। 

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MP News: Congress removed Yadav for rebel Shera, who is Arun Yadav's enemy?
कांग्रेस नेता अरुण यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राहुल की यात्रा की जिम्मेदारी बुरहानपुर और खंडवा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव से लेकर निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को सौंप दी गई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यादव का कांग्रेस में दुश्मन कौन है। यादव लगातार कांग्रेस पार्टी में हासिए पर जा रहे है। खंडवा लोकसभा उपचुनाव में टिकट नहीं दिया गया। 2018 के पहले यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया लेकिन उनको कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। अब उनको यात्रा की जिम्मेदारों से हटा दिया गया है। 
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मध्यप्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 20 नवंबर को प्रवेश करने वाली है। यात्रा को गैर हिंदी भाषा वाले राज्यों में जबरदस्त समर्थन मिला है। प्रदेश में यात्रा के प्रवेश करने से नौ दिन पहले ही कांग्रेस में लड़ाई शुरू हो गई है। यात्रा की व्यवस्था अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की जगह बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को सौंप दी गई है। 
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2018 में टिकट नहीं मिलने पर लड़े निर्दलीय 
सुरेंद्र सिंह शेरा बुराहनपुर से निर्दलीय विधायक हैं। शेरा ने 2018 का चुनाव बीजेपी की पूर्व मंत्री अर्चना चिटिनस को हराया था। सुरेंद्र शेरा कांग्रेस में ही थे लेकिन 2018 में टिकट नहीं मिलने पर बागी हो गए और निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 2018 में कमलनाथ सरकार बनी तो उसको समर्थन किया लेकिन जैसे ही शिवराज सरकार आई तो बीजेपी को समर्थन दे दिया। ऐसे में चर्चा यह शुरू हो गई कि जिसका अपना कोई ठिकाना ही नहीं है, उसे राहुल गांधी की यात्रा की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किसका भला करना चाहते हैं। 
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यादव को लोकसभा का भी टिकट नहीं मिला
इससे पहले अरुण याव को खंडवा के उपचुनाव में लोकसभा का भी टिकट नहीं मिला था। इसका दर्द एक कार्यक्रम में छलक भी गया था। तब अरुण यादव ने कहा था कि मैं हर बार फसल उगाता हूं, किसी को दे देता हूं। 2018 में भी ऐसा ही हुआ था। उन्होंने कहा था कि तुम्हारी फसल ले लूं मैंने कहा कि हां, साहब ले लो, फिर उगा लेंगे। उपचुनाव में कांग्रेस ने राजनारायण सिंह पुरनी को टिकट दिया था, जिन्हें बीजेपी के ज्ञानेश्वर पाटिल ने हरा दिया था। वहीं, 2018 के पहले अरुण यादव को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटाकर कमलनाथ बने थे। इसके बाद से यादव को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई। 


जिसकी निष्ठा ही संदिग्ध, उसे यात्रा की जिम्मेदारी
वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित ने कहा कि भले ही कांग्रेस एकजुट बताने की कोशिश करें लेकिन वह अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। अरुण यादव ने पीसीसी से यात्रा की तैयारी का खर्चा उठाने को कहा तो उसको ऐसा टर्न किया गया कि वह पैसे मांग रहे हैं। उनको हटा दिया और मॉनिटरिंग सेल में रखा, जिसका कोई मतलब नहीं है। प्रदेश में मौजूदा समय में राजनीति ओबीसी वर्ग के आसपास घुम रही है। यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं। कांग्रेस के शीर्ष पदों पर बैठे नेता अपने स्वार्थ के लिए सेंकड लाइन तैयार ही नहीं करना चाहते हैं। इसलिए अरुण यादव, जीतू पटवारी जैसे नेताओं को साइड लाइन किया जा रहा है। इससे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस नेतृत्व क्या सोच रहा है। कांग्रेस में हर निष्ठावान को टिकट नहीं मिलती लेकिन जिसकी निष्ठा की संदिग्ध है उसे राहुल की यात्रा की जिम्मेदारी देना अपने आप में बड़ा सवाल है।
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