MP Local Body Election: BJP की बागियों को नाम वापस न लेने पर निष्कासन की धमकी, कांग्रेस में भी संकट
मध्य प्रदेश नगरीय निकाय चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। बुधवार दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी हो सकती है। दोनों ही पार्टियों में बागियों से बातचीत जारी है।
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मध्य प्रदेश नगरीय निकाय चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। बुधवार दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी हो सकती है। दोनों ही पार्टियों ने बागियों से बातचीत तेज कर दी है। मान-मनव्वल का दौर चल रहा है। भाजपा ने तो नाम वापस न लेने पर पार्टी से बाहर करने का अल्टीमेटम भी दे दिया है।
बीजेपी और कांग्रेस में टिकट को लेकर बड़ी संख्या में बागियों ने नामांकन भरा है। यह लोग दोनों ही पार्टियों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। बीजेपी ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के अलावा नामांकन भरने वाले कार्यकर्ताओं से नाम वापस लेने को कहा है। इसके लिए जिला स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों को लगाया गया है। साथ ही कहा है कि नाम वापस नहीं लेने पर 6 साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। पार्टी का कहना है कि नाम वापस नहीं लेने वाले कार्यकर्ता अनुशासनहीनता के दायरे में आएंगे। वहीं, टिकट बांटने को लेकर जिला पदाधिकारियों और विधायकों के खिलाफ नाराजगी है।
कांग्रेस में भी पार्षदों के टिकट बंटने के बाद से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बागी हो गए है। उन्होंने भी नामांकन भर दिया है। अब पार्टी उन्हें मनाने में जुटी है। बागियों को मनाने के लिए भोपाल समेत कई शहरों में प्रत्याशी बदलने से भी नाराजगी बढ़ रही है। ग्वालियर में कांग्रेस के शहर अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र शर्मा ने वरिष्ठ नेताओं को घर बैठने की बात कहकर ई-मेल किया। उनका कहना है कि विधायकों के दबाव में प्रत्याशी बदले जा रहे हैं।
मुरैना से विधायक और जिला अध्यक्ष राकेश मावई ने भी ग्वालियर-चंबल में गुर्जर समाज के लोगों को दिए टिकट बदलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने जिला अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश कर दी है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा महापौर प्रत्याशियों को हो सकता है। इसके चलते मंगलवार को भोपाल महापौर प्रत्याशी विभा पटेल ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मुलाकात की।
