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MP High Court: EOW के एएसआई को राहत, 23 लाख से अधिक की वसूली पर रोक, कोर्ट ने अनावेदकों से मांगा जवाब

Thu, 26 May 2022 07:44 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 26 May 2022 07:44 PM IST
सार

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता से ब्याज सहित 23 लाख 20 हजार 409 रुपये की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया, जो कि अवैधानिक है। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने वसूली पर रोक लगाते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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MP High Court: Relief to EOW's ASI, ban on recovery of more than 23 lakhs, court seeks reply from non-applicants
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मप्र हाईकोर्ट से आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जबलपुर में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक बीके शाह को बड़ी राहत मिली है। जस्टिस विशाल मिश्रा की अवकाशकालीन बेंच ने तदर्थ वृद्धि जोड़े जाने के आधार पर भुगतान की गई राशि मय ब्याज के वसूलने संबंधी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। एकलपीठ ने मामले में अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 जून निर्धारित की है।
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बीके शाह की ओर से दायर मामले में कहा गया था कि याचिकाकर्ता को तदर्थ वेतन वृद्धि जोड़कर उसके वेतन का निर्धारण किया गया था, उसी आधार पर उसे राशि प्राप्त हुई थी। बाद में सरकार ने तदर्थ वृद्धि जोड़ने के नियम को संशोधित कर दिया और कर्मचारियों को तदर्थ वेतन वृद्धि के इंक्रीमेंट की पात्रता समाप्त कर दी। आवेदक को उसके पूर्व ही तदर्थ वेतन वृद्धि जोड़कर वेतन का भुगतान किया गया है और जो भुगतान किया गया, वह नियमानुसार है। अतिरिक्त वेतन निर्धारण की त्रुटि से दिया गया है तो उसके आवेदक जिम्मेदार नहीं है और न ही उसने कोई तथ्य छिपाया है।
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मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यदि कर्मचारी द्वारा सेवाकाल में तथ्य छिपाकर अतिरिक्त वेतन प्राप्त नहीं किया है तथा विभागीय त्रुटि से अतिरिक्त वेतन का भुगतान कर दिया गया है तो उक्त भुगतान की राशि की वसूली कर्मचारी से नहीं की जा सकती है। लेकिन याचिकाकर्ता से ब्याज सहित 23 लाख 20 हजार 409 रुपये की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया, जो कि अवैधानिक है। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने वसूली पर रोक लगाते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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