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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP High Court order for divorce terming allegations of illicit relationship with sister as mental cruelty

MP High Court: बहन व अन्य महिलाओं से अवैध संबंध का आरोप मानसिक क्रूरता, अदालत ने तलाक के आदेश जारी किए

Sun, 22 Jan 2023 05:32 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sun, 22 Jan 2023 05:32 PM IST
सार

हाईकोर्ट की युगलपीठ ने अपने आदेश में पाया कि पति-पत्नी के बीच पुनर्मिलन की संभावना नहीं है। कोर्ट ने बहन तथा अन्य महिला के साथ अवैध संबंध के आरोप को मानसिक क्रूरता माना और पारिवारिक अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए तलाक की डिक्री पारित करने के आदेश जारी कर दिए।

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MP High Court order for divorce terming allegations of illicit relationship with sister as mental cruelty
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पति पर बहन व अन्य महिलाओं से अवैध संबंध का झूठ आरोप लगाना मानिसक क्रूरता की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट के जज सुजय पॉल तथा जज अमरनाथ केसरवानी की युगलपीठ ने पारिवारिक अदालत द्वारा पारित न्यायिक अलगाव (आंशिक विवाह-विच्छेद) के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही तलाक की डिक्री पारित करने के आदेश जारी किए हैं। युगलपीठ ने पत्नी द्वारा दायर वैवाहिक संबंध पुनर्स्थापित करने के आवेदन को भी खारिज कर दिया।

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पति-पत्नी के बीच आठ साल से कोई संबंध नहीं
भोपाल निवासी अभिषेक पराशर की तरफ से दायर अपील में पारिवारिक अदालत द्वारा पारित न्यायिक पृथक्करण के आदेश को चुनौती दी गई थी। पत्नी नेहा पराशर द्वारा भी पारिवारिक अदालत द्वारा वैवाहिक संबंध पुनर्स्थापित करने के आवेदन को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। दोनों आवेदन की सुनवाई युगलपीठ द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों साल 2014 से अलग रह रहे हैं। दोनों के बीच पिछले आठ सालों से कोई संबंध नहीं है। 
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पत्नी ने पति और उसके परिवार पर लगाए गंभीर आरोप
पारिवारिक अदालत ने अपने आदेश में पाया है कि पति के खिलाफ पत्नी ने बेंगलुरु में मामला दर्ज करवाया था। इसके अलावा पत्नी ने किसी एक अन्य महिला व सगी बहन के साथ अवैध संबंध के आरोप भी लगाए हैं। इसके अलावा पति के नपुंसक होने तथा पति और उनके परिवार द्वारा दहेज की मांग और क्रूरता करने के आरोप भी लगाए हैं। 
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पति ने पारिवारिक अदालत में तलाक के लिए आवेदन दायर किया था, वहीं पत्नी ने वैवाहिक संबंध पुनर्स्थापित करने के लिए। पारिवारिक अदालत ने पत्नी के आवेदन को खारिज कर दिया था और न्यायिक अलगाव के आदेश जारी किए थे।


भरण-पोषण के लिए महिला को अलग से आवेदन करने की स्वतंत्रता दी
हाईकोर्ट की युगलपीठ ने अपने आदेश में पाया कि दोनों के बीच पुनर्मिलन की संभावना नहीं है। बहन तथा अन्य महिला के साथ अवैध संबंध के आरोप को मानसिक क्रूरता मानते हुए युगलपीठ ने पारिवारिक अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए तलाक की डिक्री पारित करने के आदेश जारी किए हैं। युगलपीठ ने भारण-भोषण के संबंध में आदेश पारित नहीं किए, बल्कि इसके लिए महिला को अलग से आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।

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