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MP High Court: रोजगार कार्यालय का पंजीयन न होने से भर्ती से वंचित करने को चुनौती, हाईकोर्ट में 13 जून को सुनवाई

Sat, 11 Jun 2022 07:53 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 11 Jun 2022 07:53 PM IST
सार

छठवीं वाहिनी रांझी जबलपुर में चल रही द्वितीय चरण की परीक्षा में जिला की चयन समिति ने कई अभ्यर्थियों को रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन के अभाव में बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई है।

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MP High Court: Challenge to deprive recruitment due to non-registration of employment office, hearing in High Court on June 13
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन न होने के आधार पर अभ्यर्थियों को भर्ती से वंचित किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले में 13 जून को सुनवाई होगी।
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यह मामला अभिषेक पटेल की ओर से हाईकोर्ट में दायर किया गया है। इसमें कहा गया है कि मप्र पुलिस आरक्षक 2020 की भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण अर्थात शारीरिक परीक्षण (फिजिकल परीक्षा) का आयोजन दिनांक 2 जून से 29 जून 2022 निर्धारित किया गया है। जो अभ्यर्थी लिखित परीक्षा मे उत्तीर्ण हो चुके हैं, उनके दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान जिनका रोजगार पंजीयन एक्सपायर हो चुका है या जो नवीनीकरण नहीं करा पाए हैं, उनको बिना किसी लिखित आदेश के बाहर किया जा रहा है। जबकि अन्य जिलो में उक्त अभ्यर्थियों से अंडरटेकिंग लेकर फिजिकल परीक्षा में शामिल कर लिया गया है।
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छठवीं वाहिनी रांझी जबलपुर में चल रही द्वितीय चरण की परीक्षा में जिला की चयन समिति ने कई अभ्यर्थियों को रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन के अभाव में बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई है। याचिका में आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी अभ्यर्थी को रोजगार पंजीयन के अभाव में चयन से वंचित नहीं किया जा सकता, फिर भी चयन समिति मनमाने रूप से जबलपुर परीक्षा केंद्र में सैकड़ों अभ्यर्थियों को बिना किसी लिखित आदेश के बाहर किया जा रहा है। मध्य प्रदेश से बाहर के राज्यों के अभ्यर्थियों से रोजगार पंजीयन नहीं मांगा जा रहा है एवं अन्य जिलो में भी कई अभ्यर्थियों से लिखित में अंडर टेकिंग लेकर परीक्षा में शामिल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा।
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