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MP High Court: जनवरी 2013 के बाद मध्य प्रदेश के चौराहों पर लगी प्रतिमाओं को हटाने का आदेश

Thu, 03 Mar 2022 01:44 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Thu, 03 Mar 2022 01:44 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए 18 जनवरी 2013 के बाद प्रदेश के चौराहों पर लगी प्रतिमाओं को हटाने का आदेश दिया है। साथ ही भोपाल नगर निगम और राज्य सरकार पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।  

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MP High Court: After January 2013, order to remove the statues at the intersections of Madhya Pradesh
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाते हुए 18 जनवरी 2013 के बाद प्रदेश के चौराहों पर लगी प्रतिमाओं को हटाने के निर्देश जारी किए हैं। टीटी नगर चौराहे पर नानके पेट्रोल पंप के पास लगी पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की प्रतिमा भी हटाई जाएगी। इस मामले में राज्य सरकार और भोपाल नगर निगम पर 30 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इसमें से 20 हजार रुपये विधिक सेवा समिति में जमा होंगे। वहीं, 10 हजार रुपये जनहित याचिका लगाने वाले को दिए जाएंगे। राज्य सरकार को यह राशि 30 दिन के भीतर जमा करनी होगी। 
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जस्टिस शील नागू की बेंच ने गुरुवार को कहा कि 18 जनवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि चौराहों पर मनमाने तरीके से लगाई प्रतिमाओं को हटाना होगा। नई प्रतिमाएं भी नहीं लगानी है। इसी को आधार बनाते हुए प्रदेश में 18 जनवरी 2013 के बाद चौराहों पर लगी प्रतिमाओं को हटाया जाए। भोपाल में अर्जुन सिंह की प्रतिमा भी इस आदेश का उल्लंघन है। सड़क का दुरुपयोग करने के आदेश को राज्य सरकार और भोपाल नगर निगम ने गंभीरता से नहीं लिया। इस वजह से उन पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 
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जबलपुर निवासी ग्रीष्म जैन की जनहित याचिका पर सतीश वर्मा और लावण्य वर्मा ने अपना पक्ष रखा। दलील दी गई कि भोपाल नगर निगम ने दो अलग-अलग जवाब दिए हैं। दिसंबर 2019 में जनहित याचिका को बदनाम करने की मंशा बताया। यह भी कहा कि प्रतिमा यातायात में बाधक नहीं होगी। जुलाई 2021 में सरकार बदले ही मूर्ति यातायात में बाधक बन गई। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि सरकारी अधिकारियों को कानून का पालन करना चाहिए। सरकार बदलते ही नगर निगम की कानूनी स्थिति नहीं बदल सकती। जनहित याचिकाकर्ता को दुर्भावनापूर्वक परेशान किया गया। कोर्ट को भी गुमराह किया गया। 
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