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MP election: कांग्रेस के इस अभेद्य किले में यह योजना लगा सकती है सेंध, आदिवासी महिला वोटर के हाथ जीत की चाबी

Thu, 16 Nov 2023 01:30 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 16 Nov 2023 01:30 PM IST
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सार
आदिवासी बहुल कुक्षी विधानसभा में मतदाताओं का मूड हमेशा एकतरफा रहता है। वे जिसे भी चुनते हैं, उसे भरपूर वोट देते हैं। यही कारण है कि विधानसभा के अब तक 14 चुनाव और एक उपचुनाव में महज दो में ही जीत का अंतर पांच फीसदी से कम रहा है...
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MP election: Ladli scheme could be game changer in impenetrable fort of Congress
MP Election: Congress candidate Honey Baghel and BJP candidate Jaideep Patel - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मध्यप्रदेश की आदिवासी बेल्ट की सीटों में इन दिनों 'आदिवासी वोटर जिसके साथ, सत्ता की चाबी उसके हाथ' का नारा जोर-शोर के साथ सुनाई दे रहा है। इसी वोट बैंक को साधने के लिए पीएम मोदी से लेकर प्रियंका गांधी इस अंचल में रैली करते हुए नजर आए। कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाली धार जिले की कुक्षी सीट पर लाड़ली बहन योजना के आने के बाद समीकरण बदल गए हैं। दो लाख 46 हजार मतदाताओं वाली इस सीट पर करीब 1.24 लाख महिला वोटर हैं। इनमें से करीब 52 हजार आदिवासी महिलाएं लाड़ली बहन योजना का लाभ ले रही हैं। ऐसे में पहली बार इस सीट पर आदिवासी महिला वोटर निर्णायक भूमिका अदा करेंगी। जिले में इन्हीं आदिवासी महिला को साधने के लिए प्रियंका गांधी और सीएम शिवराज सिंह चौहान एक रैली कर चुके हैं।

आदिवासी बहुल कुक्षी विधानसभा में मतदाताओं का मूड हमेशा एकतरफा रहता है। वे जिसे भी चुनते हैं, उसे भरपूर वोट देते हैं। यही कारण है कि विधानसभा के अब तक 14 चुनाव और एक उपचुनाव में महज दो में ही जीत का अंतर पांच फीसदी से कम रहा है। बाकी में जीत का अंतर 10 से 40 फीसदी मतों का रहा है। करीब 15 चुनावों में से अब तक 12 बार इस सीट पर कांग्रेस जीती है। सबसे ज्यादा इस सीट से पांच बार जमुनादेवी विधायक चुनी गई हैं। जबकि साल 1962 में जनसंघ, 1990 में भाजपा और 2011 में हुए उपचुनाव में भी भाजपा जीती थी। इस सीट से तीन बार कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। कुक्षी से कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह बघेल हनी विधायक हैं। 15 महीने की कमलनाथ सरकार में हनी को नर्मदा घाटी विकास का मंत्री बनाया गया था। कांग्रेस ने इस चुनाव में फिर हनी बघेल पर ही विश्वास जताया है। जबकि भाजपा से जयदीप पटेल मैदान में है।

कुक्षी सीट हमेशा से भाजपा के लिए कमजोर रही है। यहां लगातार दो बार से कांग्रेस पार्टी के हनी सिंह बघेल विधायक हैं और उन्होंने राजनीतिक तौर पर उन्होने अपने पैर भी मजबूती से जमा रखे हैं। उनकी परिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। जबकि जयदीप पटेल पूर्व विधायक मुकाम सिंह किराडे के भांजे है और भाजपा में प्रदेश मंत्री है। धन-बल की राजनीति में वे हनी बघेल को टक्कर दे रहे हैं। पटेल की उम्र भी कम है। पटेल कुक्षी के स्थानीय रहवासी भी हैं, हालांकि कुक्षी विधानसभा में सरदार सरोवर बांध के कारण आई डूब का बड़ा हिस्सा भी आता है और इस बार के चुनाव में वह फैक्टर भी मायने रखे हुए हैं।

बुआ-भतीजी, पति-पत्नी को मिली हार

कुक्षी की राजनीति पिछले कुछ समय से दो परिवारों के ईद-गिर्द रही। कांग्रेस से यहां एक-एक बार बुआ जमुनादेवी और भतीजी निशा सिंघार को हार का सामना करना पड़ा। वहीं भाजपा की रंजना बघेल और उनके पति मुकामसिंह किराड़े भी चुनाव हार चुके हैं। 1990 में रंजना बघेल ने जमुनादेवी को, और 1993 में जमुना देवी ने रंजना बघेल को हराया था। वहीं 2011 के उपचुनाव में मुकामसिंह किराड़े ने कांग्रेस की निशा सिंघार को हराया था। हालांकि इस सीट पर सबसे ज्यादा बार विधायक जमुनादेवी रहीं। यहां 13 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है, तो भाजपा और जनसंघ ने 3 बार जीत दर्ज की है।

जयस भी इस इलाके में दमदार

आदिवासी बाहुल्य इलाका होने की वजह से यहां पर जयस का भी खासा प्रभाव है। जयस की मौजूदगी ने कांग्रेस के हनी सहित भाजपा की नींद उड़ा दी है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट पर मुद्दे और चेहरे के साथ जातिगत समीकरण साधना भी अहम है।

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