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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP Election 2023: BJP's Janeu politics in Vindhya, know how effective the party's stake in Brahmin vote

MP Election 2023: विंध्य में BJP की जनेऊ पॉलिटिक्स, जानें पार्टी का ब्राह्मण वोट साधने का दांव कितना है असरदार

Wed, 18 Oct 2023 05:00 PM IST
Anand Pawar आनंद पवार
Updated Wed, 18 Oct 2023 05:00 PM IST
सार

विंध्य में सरकार को प्रतिनिधित्व नहीं देने और सीधी पेशाब कांड के बाद शिवराज सरकार की प्रवेश शुक्ला पर सख्त कार्रवाई से ब्राह्मण वोटर भाजपा से नाराज हैं। अब इसको साधने के लिए भाजपा विंध्य में जनेऊ पॉलिटिक्स का सहारा ले रही है। 

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MP Election 2023: BJP's Janeu politics in Vindhya, know how effective the party's stake in Brahmin vote
विंध्य में भाजपा की ब्राह्मण पॉलिटिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में भाजपा ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने में जुटी हुई है। विंध्य में भाजपा का दबदबा रहा है। यहां पर पिछली बार 2018 में भाजपा को 30 में से 24 सीट मिली थी। इसके बावजूद विंध्य को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से ब्राह्मण नाराज हो गए। पेशाब कांड के बाद आरोपी प्रवेश शुक्ला पर सख्त कार्रवाई ने ब्राह्मणों में नाराजगी को और बढ़ा दिया। मेयर चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक-एक सीट जीत गई। अब भाजपा ने विंध्य में जनेऊ पॉलिटिक्स को साधने के लिए नया दांव चला है। 
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भाजपा ने चुनाव की तारीखों के एलान के कुछ दिन पहले ही रीवा से विधायक राजेंद्र शुक्ला को मंत्री बना दिया। शुक्ला विंध्य में ब्राह्मण नेता के रूप में बड़ा चेहरा माने जाते हैं। इसके बाद बड़े चेहरों में सांसद रीति पाठक को सीधी से विधानसभा चुनाव मैदान में उतार दिया। अब विंध्य में कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी को पार्टी में शामिल करा लिया। सिद्धार्थ पूर्व सांसद सुंदरलाल तिवारी के बेटे हैं। इस पर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार प्रभु पटेरिया का कहना है कि इससे भाजपा सीधे-सीधे ब्राह्मणों और निचले तबके के लोगों को अपनी तरफ करना चाहती है। ये दोनों ठाकुरवाद के खिलाफ हैं। यह दांव भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 
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कांग्रेस और आप भी विंध्य में लगा रही जोर 
विंध्य क्षेत्र को साधने के लिए भाजपा और कांग्रेस के साथ ही आम आदमी पार्टी भी पूरा जोर लगा रही है। कांग्रेस यहां ओबीसी वोटरों और आदिवासी वोटरों को साधने के लिए फोकस कर रही है। यहां पर ओबीसी से आने वाले कमलेश्वर पटेल को कांग्रेस ने सीडब्ल्यूसी में शामिल कर लिया है। हाल ही में राहुल गांधी ने शहडोल में बड़ी रैली की। कांग्रेस यहां पर रीवा मेयर सीट जीत चुकी है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी सिंगरौली मेयर की सीट पर कब्जा जमा लिया है। आप के बड़े नेता क्षेत्र में लगातार बड़ी जनसभा और रैली कर रहे हैं। 
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भाजपा भी पूरी ताकत से जुटी 
भाजपा भी विंध्य क्षेत्र में ब्राह्मण और आदिवासियों को साधने के लिए जोर लगाए हुए है। अपनी जनेऊ पॉलिटिक्स से ब्राह्मणों को साधने के अलावा भाजपा आदिवासियों को साधने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहडोल के एक कार्यक्रम में आदिवासी परिवार के मुखिया से मिले। उनके साथ बैठकर खाना खाया। भाजपा यहां पर कोल महाकुंभ का भी आयोजन कर चुकी है।


विंध्य में जातिवार वोटरों का गणित
पूरे विंध्य इलाके में रीवा में सबसे ज्यादा सवर्ण (34%) तो सिंगरौली में सबसे कम वोटर सामान्य वर्ग (9%) से हैं। पिछड़ा वर्ग की बात करें तो सबसे ज्यादा पिछड़े वोटर (27%) सीधी में हैं तो सबसे कम शहडोल (21%) में। आदिवासी वोटर (45%) उमरिया में सबसे अधिक हैं तो सतना (12%) में सबसे कम। दलित मतदाता (17%) सतना में सर्वाधिक हैं तो अनूपपुर (8%) और उमरिया (8%) में सबसे कम।  

 

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