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एसपी ने पुलिसकर्मियों को दी निंदा की सजा, कोर्ट ने पूछा- ये किस प्रावधान के तहत दी गई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Updated Fri, 31 Aug 2018 09:20 AM IST
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मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पुलिसकर्मी को लापरवाही बरतने के कारण निंदा की सजा दी गई है। ये बात जब कोर्ट के सामने आई तो कोर्ट ने एसपी से ही पूछ लिया कि ये निंदा की सजा कानून के कौन से प्रावधान के तहत दी जाती है। जिसके बाद एसपी ने इस पर पूरी जानकारी दी। दरअसल ग्वालियर खंडपीठ के सामने एक शराब तस्करी से जुड़ा मामला आया था। जिसके आरोप में एक सीमा मराठा नाम की महिला को गिरफ्तार किया गया। उसकी जनहित याचिका पर कोर्ट में सुनवाई चल रही थई। तब उसके वकील मोहित शिवहरे ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने जानबूझकर शराब की जांच के लिए सैंपल दो महीने बाद भेजे।
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सीमा के खिलाफ मामला 13 जून को दर्ज हुआ और उसी दिन उसे गिरफ्तार भी किया गया। उसकी जमानत में देरी की वजह भी पुलिस की लापरवाही थी क्योंकि उन्होंने सैंपल देरी से भेजे। जिस कारण जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाई। जिसपर कोर्ट ने एसपी से सैंपल देरी से भेजने का कारण पूछा। और इसके पीछे कौन दोषी है इस बारे में भी कोर्ट ने एसपी से पूछा। इसके बाद एसपी ने जवाब देते हुए कहा कि देरी करने के दोषी दोनों पुलिसकर्मियों एसआई प्रवीण शर्मा और एसआई राजेंद्र सिंह को निंदा की सजा दी गई। जिसके बाद जस्टिस विवेक अग्रवाल ने पूछा कि इन्हें ये सजा किस प्रावधान के तहत दी गई और इसका इनपर क्या असर पड़ेगा?
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कोर्ट ने मामले पर 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि देखने से तो यही लग रहा है कि यह महज औपचारिकता के तहत किया गया है। जिसका किसी नियमावली में उल्लेख नहीं है। बता दें लापरवाही बरतने वाले सरकारी कर्मचारी को निंदा की सजा दी जाती है। कोर्ट का इस मामले में काफी समय बर्बाद हुआ है। पुलिस वालों की लापरवाही के कारण मामले की 3 बार सुनवाई हुई। पहली सुनवाई में आरोपी और उसके वकील को एसपी के जवाब की कॉपी नहीं मिली। दूसरी बार भी रीडर तक कॉपी नहीं पहुंची। और तीसरी बार कोर्ट ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ 7 दिन में कार्रवाई का निर्देश देते हुए महिला को सशर्त जमानत दे दी।
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कोर्ट ने सजा पर यह भी कहा कि यह केवल औपचारिकता के लिए किया जाता है। इसका प्रमोशन पर कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन इस बारे में सेवानिवृत एडीजी एसएस शुक्ला का कहना है कि निंदा की सजा का प्रावधान पुलिस मैनुअल में है। जिसकी सर्विस बुक में एंट्री भी की जाती है। हालांकि इसका प्रभाव पुलिसकर्मी के प्रमोशन पर नहीं पड़ता है। लेकिन जब प्रमोशन की प्रक्रिया चलती है को पुलिसकर्मी की सर्विस बुक देखी जाती है। जिससे पता चलता है कि उसे कितनी बार सजा मिली है और कितनी बार इनाम मिला है। साथ ही अगर उसकी सर्विस बुक में सजा की संख्या इनामों से ज्यादा हो तो उसके प्रमोशन पर प्रभाव जरूर पड़ता है। जिस कारण पुलिसकर्मियों के लिए निंदा की सजा चिंताजनक होती है।
