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MP News: मेधा पाटकर ने बजट पर साधा निशाना, बोलीं- किसानों के साथ छलावा, अडानी को भी आड़े हाथों लिया
Sun, 05 Feb 2023 01:41 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानी
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 05 Feb 2023 01:41 PM IST
सार
मेधा पाटकर ने कहा कि 2023 -24 के बजट से अपेक्षा थी की इस बजट में किसानों को कुछ अच्छा दिया जायेगा, क्योंकि इतना बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। लेकिन जिस तरह का बजट पेश किया गया है, उससे निराशा ही हाथ लगी है।
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मेधा पाटकर ने बजट पर साधा निशाना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने बजट पर सवाल खड़े करते हुए उसे किसान विरोधी बजट करार दिया। मेधा पाटकर ने कहा कि बजट में किसान, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के बजट को कम किया गया है, जिससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के बाद माना जा रहा था कि सरकार किसानों को बजट में बड़ी सौगात देगी, लेकिन पीएम कल्याण योजना जैसे बजट की निधि को कम करके सरकार ने किसानों के साथ छलावा किया है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बड़वानी में एक प्रेस कांफ्रेंस कर केंद्र सरकार के बजट पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाए कि जिस तरह से बजट पेश हुआ है वह किसानों के साथ ही स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए सही नहीं है। मेधा पाटकर ने कहा कि बजट में किसानों के साथ धोखा हुआ है। उन्होंने कहा कि 2023 -24 के बजट से अपेक्षा थी की इस बजट में किसानों को कुछ अच्छा दिया जायेगा, क्योंकि इतना बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। लेकिन जिस तरह का बजट पेश किया गया है, उससे निराशा ही हाथ लगी है। मेधा पाटकर ने कहा कि बजट में 2022 में जितनी राशि किसानों के लिए आवंटित की गयी थी, उससे भी कम राशि इस बजट में दी गयी है। वहीं, किसानों के लिए अलग-अलग निधि जैसे पीएम कल्याण निधि में भी बजट का आवंटन कम किया गया है, जिससे किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिलेगा जबकि मंडियों की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, जिससे मंडियों में किसानों का माल अधिक बिकता। लेकिन सरकार तीन कानूनों पर अमल करते हुए आज भी निजी हाथों में ही किसानों की उपज का माल सौंपना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया की अडानी जैसे लोगों को इससे फायदा होगा, उनके गोदामों में माल अधिक भर जायेगा जबकि ऑडीटर जनरल की रिपोर्ट है कि उनको अधिक भाड़ा दे दिया गया है। लेकिन सरकार यही चाहती है कि वे ही लोग किसानों का माल खरीदें।
मेधा पाटकर ने शिक्षा पर पेश हुए बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुल पेश हुए 45 लाख करोड़ के बजट का जीडीपी का कितना प्रतिशत शिक्षा पर लगाया है? जब नयी शिक्षा नीति घोषित हुई तो मोदी सरकार का दावा था की हम बजट का 6 प्रतिशत शिक्षा निति पर लगाएंगे लेकिन एक प्रतिशत से भी कम बजट शिक्षा पर लगाया है। यही हाल स्वास्थ्य का भी है। लॉक डाउन में लोगों ने कोरोना के चलते निजी अस्पतालों की लूट को भुगता है। उसके बावजूद भी निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रतिशत से भी कम का बजट स्वास्थ्य के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी स्कीम के तहत बजट जहां बढ़ना था उसको भी कम किया गया है। यानी कि जो मुद्दे जनता से जुड़े हैं, उनका बजट कम कर दिया है और ये सब निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए, लूट की छूट देने के लिए किया गया है। मेधा पाटकर ने अडानी को अड़े हाथों लेते हुए कहा कि ऐसे जो अपराधी हैं जिनकी हकीकत भी जाहिर हो चुकी है ऐसे हरेक पूंजीपति की जांच होना जरूरी है।
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नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बड़वानी में एक प्रेस कांफ्रेंस कर केंद्र सरकार के बजट पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाए कि जिस तरह से बजट पेश हुआ है वह किसानों के साथ ही स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए सही नहीं है। मेधा पाटकर ने कहा कि बजट में किसानों के साथ धोखा हुआ है। उन्होंने कहा कि 2023 -24 के बजट से अपेक्षा थी की इस बजट में किसानों को कुछ अच्छा दिया जायेगा, क्योंकि इतना बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। लेकिन जिस तरह का बजट पेश किया गया है, उससे निराशा ही हाथ लगी है। मेधा पाटकर ने कहा कि बजट में 2022 में जितनी राशि किसानों के लिए आवंटित की गयी थी, उससे भी कम राशि इस बजट में दी गयी है। वहीं, किसानों के लिए अलग-अलग निधि जैसे पीएम कल्याण निधि में भी बजट का आवंटन कम किया गया है, जिससे किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिलेगा जबकि मंडियों की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, जिससे मंडियों में किसानों का माल अधिक बिकता। लेकिन सरकार तीन कानूनों पर अमल करते हुए आज भी निजी हाथों में ही किसानों की उपज का माल सौंपना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया की अडानी जैसे लोगों को इससे फायदा होगा, उनके गोदामों में माल अधिक भर जायेगा जबकि ऑडीटर जनरल की रिपोर्ट है कि उनको अधिक भाड़ा दे दिया गया है। लेकिन सरकार यही चाहती है कि वे ही लोग किसानों का माल खरीदें।
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मेधा पाटकर ने शिक्षा पर पेश हुए बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुल पेश हुए 45 लाख करोड़ के बजट का जीडीपी का कितना प्रतिशत शिक्षा पर लगाया है? जब नयी शिक्षा नीति घोषित हुई तो मोदी सरकार का दावा था की हम बजट का 6 प्रतिशत शिक्षा निति पर लगाएंगे लेकिन एक प्रतिशत से भी कम बजट शिक्षा पर लगाया है। यही हाल स्वास्थ्य का भी है। लॉक डाउन में लोगों ने कोरोना के चलते निजी अस्पतालों की लूट को भुगता है। उसके बावजूद भी निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रतिशत से भी कम का बजट स्वास्थ्य के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी स्कीम के तहत बजट जहां बढ़ना था उसको भी कम किया गया है। यानी कि जो मुद्दे जनता से जुड़े हैं, उनका बजट कम कर दिया है और ये सब निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए, लूट की छूट देने के लिए किया गया है। मेधा पाटकर ने अडानी को अड़े हाथों लेते हुए कहा कि ऐसे जो अपराधी हैं जिनकी हकीकत भी जाहिर हो चुकी है ऐसे हरेक पूंजीपति की जांच होना जरूरी है।
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