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Mandsaur: वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड के आरोपी आजम लाला ने किया कोर्ट में सरेंडर, भेजा जेल
Fri, 19 Jan 2024 09:37 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 19 Jan 2024 09:37 PM IST
सार
मंदसौर पुलिस ने आजम लाला पर दस हजार का इनाम भी रखा था। इसके बाद आजम लाला ने एक फिरौती के मामले में प्रतापगढ़ कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद उसे मंदसौर ठन्ना मर्डर कांड में कोर्ट में हाजिर किया गया। मंदसौर से उसे उज्जैन भैरोगढ़ जेल भेजा गया।
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वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड के आरोपी आजम लाला ने किया कोर्ट में सरेंडर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
करीब सात साल पहले इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी वीरेंद्र ठन्ना की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सुपारी देने वाले आरोपी आजम लाला की पुलिस को लंबे समय से तलाश थी। हत्याकांड के बाद एक मामले में प्रतापगढ़ कोर्ट में सरेंडर के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। आजम लाला ने न्यायाधीश विशाल शर्मा की कोर्ट में सरेंडर किया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
31 दिसंबर 2016 को वीरेंद्र ठन्ना की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले सरफराज और अरमान के बाद रफीक को गिरफ्तार किया था। उन्होंने आजम लाला निवासी अखेपुर द्वारा सुपारी देने की बात स्वीकार की थी। मंदसौर पुलिस ने आजम लाला पर दस हजार का इनाम भी रखा था। इसके बाद आजम लाला ने एक फिरौती के मामले में प्रतापगढ़ कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद उसे मंदसौर ठन्ना मर्डर कांड में कोर्ट में हाजिर किया गया। मंदसौर से उसे उज्जैन भैरोगढ़ जेल भेजा गया। जमानत मिलने के बाद से ही आजम लाला फरार चल रहा था। इसके बाद उसने न्यायालय में सरेंडर किया। आपको बता दें कि पांच साल पहले व्यापारी वीरेंद्र ठन्ना की हत्या के मामले में अखेपुर निवासी आजम लाला सहित चार आरोपियों को 12 मार्च को ही आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
पुलिस ने दी थी दबिश लेकिन नही मिला आरोपी
वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड के आरोपी आजम लाला की गिरफ्तारी के लिए मंदसौर पुलिस टीम ने प्रतापगढ़ पुलिस के साथ दो तीन बार दबिश दी, लेकिन हर बार आजम लाला पुलिस के हाथ से बचता रहा। एक बार दबिश के दौरान आरोपियों द्वारा फायरिंग कर फरार होने की खबरें भी सामने आई थी।
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सालों से जमे अधिकारी नहीं दे पा रहे रिजल्ट
आजलाला के सीधे कोर्ट में सरेंडर करने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस विभाग में कुछ अधिकारी सिर्फ मंदसौर-नीमच जिले में ही नौकरी करते आ रहे हैं। इन्हें इन दो जिलों के आलावा अन्य जिलों में नौकरी करना मानो रास ही नहीं आता है। इसलिए अब इनकी कार्यशैली में वो चुस्ती-फुर्ती दिखाई नहीं देती है। नतीजा बड़े-बड़े अपराधियों को पकड़ने के लिए खुद एसपी को कमान संभालना पड़ती है। अधिकांश पुलिस अधिकारी आला अधिकारी से ज्यादा सत्ताधारी नेताओं की जी हुजूरी कर मनचाही पोस्टिंग पर नौकरी करते आ रहे हैं। इसलिए जिले में आने वाले अधिकांश आला अधिकारी भी इन् ही पर निर्भर हो जाते हैं, क्योंकि कुछ एक मामलों में ये उत्कृष्ट रिजल्ट देकर अपनी खास जगह बना लेते हैं।
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31 दिसंबर 2016 को वीरेंद्र ठन्ना की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले सरफराज और अरमान के बाद रफीक को गिरफ्तार किया था। उन्होंने आजम लाला निवासी अखेपुर द्वारा सुपारी देने की बात स्वीकार की थी। मंदसौर पुलिस ने आजम लाला पर दस हजार का इनाम भी रखा था। इसके बाद आजम लाला ने एक फिरौती के मामले में प्रतापगढ़ कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद उसे मंदसौर ठन्ना मर्डर कांड में कोर्ट में हाजिर किया गया। मंदसौर से उसे उज्जैन भैरोगढ़ जेल भेजा गया। जमानत मिलने के बाद से ही आजम लाला फरार चल रहा था। इसके बाद उसने न्यायालय में सरेंडर किया। आपको बता दें कि पांच साल पहले व्यापारी वीरेंद्र ठन्ना की हत्या के मामले में अखेपुर निवासी आजम लाला सहित चार आरोपियों को 12 मार्च को ही आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
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पुलिस ने दी थी दबिश लेकिन नही मिला आरोपी
वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड के आरोपी आजम लाला की गिरफ्तारी के लिए मंदसौर पुलिस टीम ने प्रतापगढ़ पुलिस के साथ दो तीन बार दबिश दी, लेकिन हर बार आजम लाला पुलिस के हाथ से बचता रहा। एक बार दबिश के दौरान आरोपियों द्वारा फायरिंग कर फरार होने की खबरें भी सामने आई थी।
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सालों से जमे अधिकारी नहीं दे पा रहे रिजल्ट
आजलाला के सीधे कोर्ट में सरेंडर करने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस विभाग में कुछ अधिकारी सिर्फ मंदसौर-नीमच जिले में ही नौकरी करते आ रहे हैं। इन्हें इन दो जिलों के आलावा अन्य जिलों में नौकरी करना मानो रास ही नहीं आता है। इसलिए अब इनकी कार्यशैली में वो चुस्ती-फुर्ती दिखाई नहीं देती है। नतीजा बड़े-बड़े अपराधियों को पकड़ने के लिए खुद एसपी को कमान संभालना पड़ती है। अधिकांश पुलिस अधिकारी आला अधिकारी से ज्यादा सत्ताधारी नेताओं की जी हुजूरी कर मनचाही पोस्टिंग पर नौकरी करते आ रहे हैं। इसलिए जिले में आने वाले अधिकांश आला अधिकारी भी इन् ही पर निर्भर हो जाते हैं, क्योंकि कुछ एक मामलों में ये उत्कृष्ट रिजल्ट देकर अपनी खास जगह बना लेते हैं।
