विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व का कोर एरिया बुधवार से अगले तीन महीनों के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। मानसून सीजन को देखते हुए 1 जुलाई से 30 सितंबर तक कोर जोन में पर्यटन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध शिकार पर रोक और जंगल की निगरानी के लिए कान्हा प्रबंधन ने 'ऑपरेशन मानसून' के तहत विशेष गश्ती अभियान शुरू किया है।
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सितंबर तक बंद रहेगी पर्यटकों की एंट्री
- फोटो : अमर उजाला
मानसून के दौरान जंगल के रास्ते और कच्ची सड़कें बंद हो जाने से अवैध गतिविधियों की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। वनरक्षक और सुरक्षा कर्मी घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पैदल गश्त करेंगे। इसके लिए विशेष रोस्टर और रूट चार्ट तैयार किए गए हैं, ताकि जंगल की हर पगडंडी और संभावित घुसपैठ वाले क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
कान्हा टाइगर रिजर्व के 940 वर्ग किलोमीटर के कोर एरिया में 120, 1,134 वर्ग किलोमीटर के बफर क्षेत्र में 50 तथा 110 वर्ग किलोमीटर के फेन अभयारण्य में 12 पेट्रोलिंग कैंप सहित कुल 182 कैंप सक्रिय रहेंगे। इन कैंपों में वनरक्षक और स्थायी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। करीब 1,000 अधिकारी-कर्मचारी पूरे मानसून सीजन के दौरान जंगल की सुरक्षा में जुटे रहेंगे।
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विशेष निगरानी अभियान शुरू
- फोटो : अमर उजाला
रिजर्व के 589 संवेदनशील क्षेत्रों को 38 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जहां फैली 1,204 किलोमीटर लंबी 160 पगडंडियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। दुर्गम इलाकों में अस्थायी कैंप भी बनाए गए हैं। गश्ती अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए 17 विभागीय हाथियों की भी मदद ली जाएगी। कान्हा, किसली, मुक्की और सूपखार हाथी कैंपों से आवश्यकता के अनुसार हाथियों को गश्त के लिए तैनात किया जाएगा।
कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर परिक्षेत्र के सहायक संचालक आशीष पाण्डेय ने बताया कि 'ऑपरेशन मानसून' की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। परिक्षेत्र अधिकारियों को कैंपों में रात्रि विश्राम करने और प्रतिदिन गश्त की रिपोर्ट प्रबंधन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लगातार बारिश और कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।