{"_id":"6a3c106fcbad80be8c0c4fbc","slug":"mamata-banerjee-nephew-abhishek-banerjee-mp-high-court-relief-arrest-warrant-2026-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Abhishek Banerjee: ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक को हाईकोर्ट से राहत, गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर रोक बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Abhishek Banerjee: ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक को हाईकोर्ट से राहत, गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर रोक बरकरार
Wed, 24 Jun 2026 10:44 PM IST
Dinesh Sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:44 PM IST
सार
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को मानहानि मामले में एमपी हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनकी खारिज याचिका को बहाल करते हुए भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर लगी रोक बरकरार रखी। मामला भाजपा नेता आकाश विजयवर्गीय की ओर से दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है।
विज्ञापन
अभिषेक बनर्जी, सांसद, टीएमसी
- फोटो : ANI
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को मानहानि मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी पूर्व में खारिज की गई याचिका को पुनः बहाल (रिस्टोर) करते हुए भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर लगी रोक को बरकरार रखने के आदेश दिए हैं।
क्या था मामला?
मामला भाजपा नेता आकाश विजयवर्गीय द्वारा वर्ष 2021 में भोपाल स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है। परिवाद में आरोप लगाया गया था कि नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने उन्हें “गुंडा” कहा था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस टिप्पणी से उनकी और उनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
ये भी पढ़ें- ओबीसी आरक्षण मामले में 15 जुलाई से रोज होगी सुनवाई, हाईकोर्ट ने जारी किए निर्देश
विज्ञापन
क्या थी पहली याचिका?
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायालय ने 12 नवंबर 2025 को अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वारंट और परिवाद की वैधता को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि वे एक निर्वाचित सांसद हैं और उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
कब हुई थी याचिका खारिज?
हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पैरवी को लेकर अदालत की नाराजगी सामने आई थी। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद पर्याप्त पैरवी नहीं होने पर हाईकोर्ट ने 17 जून को याचिका खारिज कर दी थी और गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक भी समाप्त कर दी थी।
ये भी पढ़ें- हत्या मामले में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, शक सबूत की जगह नहीं ले सकता, दो आरोपियों को किया बरी
अब क्या आया फैसला?
इसके बाद अभिषेक बनर्जी की ओर से याचिका को पुनः बहाल करने तथा अंतरिम राहत जारी रखने की मांग करते हुए नया आवेदन प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने आवेदन के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और परिस्थितियों का अवलोकन किया। इसके बाद अदालत ने याचिका को रिस्टोर करने की अनुमति देते हुए गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर लगी रोक को भी यथावत बनाए रखने का आदेश जारी कर दिया।
विज्ञापन
क्या था मामला?
मामला भाजपा नेता आकाश विजयवर्गीय द्वारा वर्ष 2021 में भोपाल स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है। परिवाद में आरोप लगाया गया था कि नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने उन्हें “गुंडा” कहा था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस टिप्पणी से उनकी और उनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- ओबीसी आरक्षण मामले में 15 जुलाई से रोज होगी सुनवाई, हाईकोर्ट ने जारी किए निर्देश
विज्ञापन
क्या थी पहली याचिका?
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायालय ने 12 नवंबर 2025 को अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वारंट और परिवाद की वैधता को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि वे एक निर्वाचित सांसद हैं और उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
कब हुई थी याचिका खारिज?
हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पैरवी को लेकर अदालत की नाराजगी सामने आई थी। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद पर्याप्त पैरवी नहीं होने पर हाईकोर्ट ने 17 जून को याचिका खारिज कर दी थी और गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक भी समाप्त कर दी थी।
ये भी पढ़ें- हत्या मामले में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, शक सबूत की जगह नहीं ले सकता, दो आरोपियों को किया बरी
अब क्या आया फैसला?
इसके बाद अभिषेक बनर्जी की ओर से याचिका को पुनः बहाल करने तथा अंतरिम राहत जारी रखने की मांग करते हुए नया आवेदन प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने आवेदन के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और परिस्थितियों का अवलोकन किया। इसके बाद अदालत ने याचिका को रिस्टोर करने की अनुमति देते हुए गिरफ्तारी वारंट के निष्पादन पर लगी रोक को भी यथावत बनाए रखने का आदेश जारी कर दिया।
