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मध्यप्रदेश: पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की मूर्ति को किया क्षतिग्रस्त, लेकिन बड़ा बवाल मचने से पहले ही पुलिस ने लिया एक्शन

Thu, 26 May 2022 05:21 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 26 May 2022 05:21 PM IST
सार

यूथ कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष राजदीप सिंह ने कहा कि जैसे ही जानकारी मिली कांग्रेस के युवा साथियों ने जाकर धरना दिया। हमने शासन से मांग की है कि तुरंत एफआईआर की जाए और प्रशासन से कहा है कि आरोपियों को गिरफ्तार कीजिए क्योंकि ये देश के पूर्व पीएम का मसला है...

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Madhya Pradesh: statue of former PM Nehru was vandalised, police took immediate action
मध्य प्रदेश के सतना में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को तोड़ा - फोटो : Agency

विस्तार

मध्यप्रदेश के सतना जिले में पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू की एक मूर्ति को कुछ शरारती तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। घटना के बाद से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए इसे पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करार दिया। पूर्व सीएम कमलनाथ ने पुलिस से इस पूरे मामले की जांच करा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इधर, पुलिस प्रशासन ने इस मामले में छह लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

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दरअसल, सतना में पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा को तोड़ने की कोशिश, प्रतिमा पर डंडे बरसाने का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ। घटना मंगलवार की है, इसमें कुछ युवक प्रतिमा को तोड़ने की कोशिश करने के साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ भी नारा लगाते दिखे। बुधवार को इस मामले को लेकर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध जुलूस भी निकाला। यूथ कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष राजदीप सिंह ने कहा कि जैसे ही जानकारी मिली कांग्रेस के युवा साथियों ने जाकर धरना दिया। हमने शासन से मांग की है कि तुरंत एफआईआर की जाए और प्रशासन से कहा है कि आरोपियों को गिरफ्तार कीजिए क्योंकि ये देश के पूर्व पीएम का मसला है। जिस तरह भगवा झंडा लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से यह काम किया गया है। संघ के कार्यकर्ताओं की ओर से यह कुत्सित प्रयास किया गया है, उनको भी कहना चाहता हूं कि नेहरू-गांधी वो एक विचार है, वो कभी नहीं मिटेंगे। इस तरह की हरकतों से कुछ नहीं होगा।

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यह असभ्य, बर्बर और अंधे युग का दृश्य है

नेहरू: 'मिथक और सत्य' किताब के लेखक पीयूष बबेले अमर उजाला से चर्चा में कहते है कि सतना शहर में नेहरू जी की विशाल मूर्ति उनकी चिर परिचित शांत मुद्रा में खड़ी हुई थी। पीछे की ओर हाथ बांधे हुए और आगे की ओर देखते हुए। फिर कुछ शरारती तत्वों का गिरोह उनकी मूर्ति के ऊपर चढ़ गया। उनके हाथ में लंबे लंबे डंडे थे। वे मूर्ति पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाने लगे। उनके हाथों में भगवा झंडे थे और दिल में न जाने किस बात की घृणा थी। ऊपर खड़े लोग नेहरू जी के चेहरे पर निशाना बांधकर लाठियां भांज रहे थे। यह एकदम असभ्य, बर्बर और अंधे युग का दृश्य। शरारती तत्वों को अपनी लाठियों पर बड़ा गर्व है और उन्हें लगता है कि राष्ट्र निर्माता की मूर्ति पर लठ्ठ चलाकर वे अपनी जवानी सार्थक कर रहे हैं।

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ये लोग हाथ में भगवा झंडा लिए केवल पत्थर की मूर्ति पर लाठियां चला रहे है। लेकिन नेहरू का लाठियों से रिश्ता पुराना है। साइमन कमीशन के समय जब नेहरू हाथ में तिरंगा लिए सड़क के बीचों बीच चले जा रहे थे, तो घुड़सवार सिपाहियों ने आकर उनके ऊपर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाई थीं। नेहरू लाठी का वार सहते रहे लेकिन तिरंगे को नहीं झुकने दिया। अंततः वह बेहोश होकर गिर पड़े लेकिन मुट्ठी से तिरंगा नहीं छूटा। जब नेहरू जेल में थे तब सविनय अवज्ञा आंदोलन में उनकी माता स्वरूप रानी देवी व्हीलचेयर पर बैठकर एक जुलूस का नेतृत्व कर रही थीं। वहां भी पुलिस आई लाठियां भांजी गईं, स्वरूप रानी का सिर लहूलुहान हो गया। वे बेहोश होकर धरती पर गिर गईं।

पीयूष बबेले कहते है कि नेहरू के पिता, नेहरू की बेटी, नेहरू के दामाद, नेहरू की बहन, नेहरू के बहनोई, नेहरू के चचेरे भाई, नेहरू की पत्नी तिरंगे की शान में न जाने कितनी बार जेल गए। नेहरू तो करीब 10 साल तक जेल में रहे। जिस नेहरू को दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य के घुड़सवार सिपाही लाठियों से नहीं डरा सके, आज कुछ शरारती तत्व उनके पत्थर के बुत पर डंडे चलाकर उसे गिराना चाहते है। उन्हें झुकाना चाहते है। उन्हें मिटाना चाहते है तो भूल जाओ, यह सपना। ये लोग जिस झंडे को लेकर यह गुंडई कर रहे हैं उनके पुरखे भी अंग्रेजों के राज में वह झंडा लेकर निकलते थे। लेकिन उनकी हिम्मत नहीं पड़ी अंग्रेजों को कभी एक कंकड़ मार दें। ऐसे लोगों ने आजादी के आंदोलन से गद्दारी की, अंग्रेजों से वफादारी की, अंग्रेजों की तारीफ में कसीदे पढ़े, अंग्रेजों से पेंशन ली, वजीफे लिए और भूल-चूक कभी कोई काम हो गया तो उसके लिए लिख लिखकर माफी मांगी। शरारती तत्वों की हुल्लड़बाजी पूरी दुनिया की निगाह में भारत माता की निगाहें झुका देती है।

कांग्रेस ने किया प्रतिमा का दूध से शुद्धिकरण

स्थानीय लोगों ने अमर उजाला को बताया कि शहर में नशे के विरुद्ध रैली निकाली जा रही थी। इसका नेतृत्व मुख्य आरोपी कृष्ण कांत गौतम कर रहा था। ये रैली कलेक्ट्रेट के पास धवारी चौराहे पर समाप्त हुई। जहां पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की प्रतिमा स्थापित है। आरोपी इस प्रतिमा पर चढ़ गए और डंडे बरसाने लगे। उनकी इस हरकत का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। अपलोड होते ही वीडियो वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही बवाल मच गया। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए करीब छह लोगों को हिरासत में ले लिया। आरोपियों के खिलाफ संपत्ति नुकसान अधिनियम 1984 की धारा-3 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है। इधर, युवक कांग्रेस ने गुरुवार को 18 लीटर दूध से प्रतिमा को धोकर शुद्धिकरण भी किया।

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