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मध्य प्रदेश: किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष का बजट पर बयान, कहा- आंदोलनकारी किसानों को परेशान करने सरकार ने बनाया लूट वाला बजट

Wed, 02 Feb 2022 09:33 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Wed, 02 Feb 2022 09:33 AM IST
सार

किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आंदोलनकारी किसानों को परेशान करने के लिए ये बजट बनाया है। किसान विधानसभा चुनावों में सरकार से बदला लेंगे।

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Madhya Pradesh: Statement on the budget of the President of Kisan Sangharsh Samiti, said the government made a loot budget to harass the agitating farmers
बजट 2022 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्र सरकार के बजट पर अब पक्ष विपक्ष के साथ ही समीतियों के नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ सुनीलम बजट से असंतुष्ट नजर आए और बजट को किसानों को परेशान करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बजट को देखते हुए ऐसा लगता है कि मोदी सरकार ने आंदोलन करने वाले किसानों को सबक सिखाने के लिए बजट तैयार कराया है। यह बजट कॉर्पोरेट को छूट और किसानों की लूट करने वाला बजट है।
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किसानों की आय दोगुनी करने का वादा भूली मोदी सरकार
 मोदी जी ने 6 वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा सैकड़ों बार दोहराया है, लेकिन इस बार वित्त मंत्री ने आय दुगनी करने को लेकर एक शब्द भी नहीं बोला। 2015-16 में यह 8059 रुपये प्रति माह थी जो 6 साल के बाद महंगाई को जोड़कर 21,146 होनी थी लेकिन वह 2018-19 में केवल 10, 218 रुपये तक पहुंची है। 2022 में यह 12,955 रुपये होगी।
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ग्रामीण विकास का बजट कम किया
कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्रों का कुल बजट पिछले साल के 4.26% से घटाकर इस वर्ष 3.84% कर दिया गया है। जबकि किसान संघर्ष समिति किसानों की आबादी के अनुपात में बजट आवंटन की मांग करती रही है।
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किसान अध्यक्ष ने कहा कि बजट में ग्रामीण विकास का बजट पिछले साल 5.59% से घटाकर इस वर्ष 5.23% कर दिया गया है। 2014 के बाद से ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर सरकार ढिंढोरा पीट रही है। लेकिन बजट पिछले साल के 16000 करोड़ रुपए से घटाकर इस साल 15500 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसी तरह किसानों को फसल का दाम मिल सके उसके लिए सरकार की पी एस एस और एमआईएस स्कीम में पिछले साल खर्च किया गया 3595 करोड़ रुपये को घटाकर 1500 करोड़ कर दिया गया है।

एमएसपी स्कीम का आवंटन घटाया
प्रधानमंत्री कहते रहे हैं एमएसपी थी ,है और रहेगी लेकिन किसानों को एमएसपी दिलवाने के लिए बनाई गई स्कीम आशा का आवंटन घटाकर पिछले साल 400 करोड़ रुपये किया गया था जो इस बार नाम मात्र के लिए सिर्फ 1 करोड़ रूपये कर दिया गया है।

किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनीलम ने कहा कि बजट में पिछले वर्ष की तुलना में गेहूं और चावल की खरीद के लिए 2.37 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है जो कि पिछले वर्ष 2.48 लाख करोड़ था एमएसपी के संबंध में भी गलत जानकारी दी गई है। इस साल 2.37 लाख करोड़ रुपये की एमएसपी पर खरीद पिछले साल 2.84 लाख करोड़ रुपये की खरीद से भी कम है। पिछले साल 1286 लाख टन खरीदी हुई थी जबकि इस साल 1208 लाख टन। पिछले साल 1.97 करोड़ किसानों को फायदा हुआ था इस साल सिर्फ 1.63 करोड़  किसानों को फायदा होगा। जबकि महंगाई 40% बढ़ी है। इसके अनुपात में आवंटन बढ़ाया जाना चाहिए था। सरकार ने केवल 4 प्रतिशत वृद्धि की थी। सरकार ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 7% कम गेहूं और चावल की खरीद की है और 17% कम किसानों से खरीद की गई है।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में सरकार का योगदान पिछले साल 900 करोड़ से घटाकर इस साल 500 करोड़ कर दिया गया है। फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के लिए बजट पिछले साल 700 करोड़ से घटाकर इस साल 500 करोड़ कर दिया गया है। पराली जलाने को रोकने के लिए किसान को सहायता देने के लिए पिछले साल 700 करोड़ का बजट था, जो इस साल घटाकर शून्य कर दिया गया है। नेचुरल फार्मिंग के बारे में सरकार ने बोला ज्यादा है उसमें खर्चा ना के बराबर किया है। पिछले 2 साल से एग्रीकल्चर इन्वेस्टमेंट फंड की धूमधाम से घोषणा हुई थी। उसके 1,00,000 करोड़ रुपये में से अब तक सिर्फ 2,400 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं उसके बारे में भी कुछ नहीं बोला गया। 

खाद्य सब्सिडी घटाई गई
सरकार द्वारा खाद्य सब्सिडी 25% कम कर दी गई है। प्रधानमंत्री किसान योजना के आवंटन में 9% की कमी की गई है। प्रधानमंत्री किसान योजना जब शुरू की गई थी तब कहा गया था कि उसे 12 करोड़ परिवारों से 15 करोड़ परिवारों तक बढ़ाया जाएगा, लेकिन इस दावे के अनुपात में आवंटन नहीं किया गया है। महंगाई बढ़ने के कारण किसान सम्मान निधि का पैसा 15% घट गया है, उसे बढ़ाने के बारे में बजट कुछ नहीं कहा गया है। मनरेगा में पिछले साल 97,034 करोड़ रुपये खर्च हुए थे लेकिन इस साल मात्र 72,034 करोड़ रुपये का बजट है। मनरेगा में राज्यों के पास फंड खत्म हो गया है उसे पूरा करने के बारे में कुछ नहीं बोला। किसान संघर्ष समिति मानती है कि किसान ड्रोन योजना का वही हाल होगा जो कि किसान रेलवे और फसल बीमा का हुआ है। किसान संघर्ष समिति ने कहा कि देश के किसानों के लिए सम्पूर्ण कर्जा मुक्ति सबसे बड़ा सवाल है परंतु सरकार किसानों को अधिक कर्जदार बनाने की नीति पर काम कर रही है।


किसान चुनावों में बदला लेंगे
डॉ सुनीलम ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में उत्तरप्रदेश और 4 राज्यों के किसान भारतीय जनता पार्टी से बजट के माध्यम से किये गए अपमान का बदला लेंगे और इस वर्ष फिर से एक राष्ट्र व्यापी आंदोलन किसान आंदोलन  की शुरुआत करेंगे।
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