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मध्य प्रदेश: सिमी के मास्टर माइंड अबू फैजल ने सात साल बाद दायर की अपील, एटीएस आरक्षक की हत्या में उम्रकैद काट रहा
Wed, 06 Apr 2022 07:02 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 06 Apr 2022 07:02 PM IST
सार
सजा दिए जाने के सात साल बाद सिमी आतंकी अबू फैजल ने अपील की है। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ ने सिमी आतंकी की अपील पर सरकार से जवाब मांगा है।
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सिमी के मास्टर माइंड अबू फैजल ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है।
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
एटीएस आरक्षक की हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा के खिलाफ प्रतिबंधित संगठन सिमी के मास्टर माइंड अबू फैजल ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है। सजा दिए जाने के सात साल बाद सिमी आतंकी ने अपील की है। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ ने सिमी आतंकी की अपील पर सरकार से जवाब मांगा है। सरकार द्वारा उसे फांसी दिए जाने की मांग करते हुए पूर्व में अपील दायर की गई थी।
गौरतलब है कि एटीएस आरक्षक सीताराम यादव की 28 नवंबर, 2009 को मध्य प्रदेश के खंडवा में बकरा ईद पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एटीएस कांस्टेबल को मारने की साजिश फैसल और चार अन्य सिमी कार्यकर्ताओं ने रची थी। यादव कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों तक पहुंचने के लिए अपने मुखबिरों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे। अबू फैसल को 27 जून, 2011 को भोपाल में गिरफ्तार किया गया था और 29 दिसंबर, 2011 को खंडवा अदालत में मुकदमा शुरू हुआ था। वह 2013 में सिमी के पांच अन्य कार्यकर्ताओं के साथ खंडवा जेल से भाग गया था, लेकिन दो महीने बाद पकड़ा गया था।
इसके बाद प्रदेश की जेल में निरुध्द सभी सिमी आतंकियों को भोपाल की केंद्रीय जेल में स्थानांतरित कर प्रकरण की सुनवाई भी 28 जनवरी, 2014 को भोपाल की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बीएस भदौरिया ने 31 अक्टूबर, 2015 को अबू फैसल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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प्रदेश सरकार ने सिमी आतंकी को मौत की सजा दिए जाने की मांग करते हुए 2016 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सरकार की तरफ से अपील में कहा गया था कि वह पुलिसकर्मियों के बीच डर पैदा करना चाहता था और सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने के लिए ईद के दिन वारदात को अंजाम दिया। मृतक एक शासकीय कर्मचारी था और आतंक व आतंकियों के रोकथाम करने गठित एटीएस में पदस्थ था।
चार सप्ताह बाद होगी सुनवाई
सजा के सात साल बाद अबू फैजल हाईकोर्ट गया है। सरकार की तरफ से दायर अपील का यह कहते हुए विरोध किया गया कि नियमानुसार 60 दिनों के अंदर अपील दायर करने का प्रावधान है। आरोपी की तरफ से बताया गया कि सरकार की तरफ से विधिक सहायता नहीं मिलने के कारण वह आदेश के खिलाफ अपील दायर नहीं कर सका था। युगलपीठ ने इस संबंध में शासकीय अधिवक्ता एसके कश्यप को सरकार से दिशा-निर्देश प्राप्त कर जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए हैं। दो अपीलों पर संयुक्त रूप से अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
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गौरतलब है कि एटीएस आरक्षक सीताराम यादव की 28 नवंबर, 2009 को मध्य प्रदेश के खंडवा में बकरा ईद पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एटीएस कांस्टेबल को मारने की साजिश फैसल और चार अन्य सिमी कार्यकर्ताओं ने रची थी। यादव कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों तक पहुंचने के लिए अपने मुखबिरों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे। अबू फैसल को 27 जून, 2011 को भोपाल में गिरफ्तार किया गया था और 29 दिसंबर, 2011 को खंडवा अदालत में मुकदमा शुरू हुआ था। वह 2013 में सिमी के पांच अन्य कार्यकर्ताओं के साथ खंडवा जेल से भाग गया था, लेकिन दो महीने बाद पकड़ा गया था।
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इसके बाद प्रदेश की जेल में निरुध्द सभी सिमी आतंकियों को भोपाल की केंद्रीय जेल में स्थानांतरित कर प्रकरण की सुनवाई भी 28 जनवरी, 2014 को भोपाल की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बीएस भदौरिया ने 31 अक्टूबर, 2015 को अबू फैसल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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प्रदेश सरकार ने सिमी आतंकी को मौत की सजा दिए जाने की मांग करते हुए 2016 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सरकार की तरफ से अपील में कहा गया था कि वह पुलिसकर्मियों के बीच डर पैदा करना चाहता था और सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने के लिए ईद के दिन वारदात को अंजाम दिया। मृतक एक शासकीय कर्मचारी था और आतंक व आतंकियों के रोकथाम करने गठित एटीएस में पदस्थ था।
चार सप्ताह बाद होगी सुनवाई
सजा के सात साल बाद अबू फैजल हाईकोर्ट गया है। सरकार की तरफ से दायर अपील का यह कहते हुए विरोध किया गया कि नियमानुसार 60 दिनों के अंदर अपील दायर करने का प्रावधान है। आरोपी की तरफ से बताया गया कि सरकार की तरफ से विधिक सहायता नहीं मिलने के कारण वह आदेश के खिलाफ अपील दायर नहीं कर सका था। युगलपीठ ने इस संबंध में शासकीय अधिवक्ता एसके कश्यप को सरकार से दिशा-निर्देश प्राप्त कर जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए हैं। दो अपीलों पर संयुक्त रूप से अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
