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मध्यप्रदेश: हमीदिया हादसे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका- दोषियों के खिलाफ दर्ज की जाए एफआईआर
Thu, 18 Nov 2021 05:58 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Thu, 18 Nov 2021 05:58 PM IST
सार
हमीदिया अस्पताल में आगजनी मामले में लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने संबंधी मांग मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका में की गई है।
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कमला नेहरू अस्पताल का वह हिस्सा जहां आग लगी थी।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पिछले हफ्ते हुए अग्निकांड को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। याचिका में लापरवाही बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका पर अब अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉक्टर पीजी नाजपांडे ने याचिका में कहा है कि 24 जून 2014 को सतना के सरकार अस्पताल में आग लगने से 10 बच्चे घायल हुए थे। एक की मौत हो गई। जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में 23 अगस्त 2016 को हुए हादसे में एक बच्चे की मौत हुई थी और 7 घायल हुए थे। वहीं, भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 8 नवंबर 2021 को हुए हादसे में करीब 10 बच्चों की मौत हो गई। इतने ही जख्मी हुए थे।
नाजपांडे की याचिका कहती है कि सतना के सरकारी अस्पताल में हुए अग्निकांड के बाद एक याचिका दाखिल हुई थी। उसमें सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि अस्पताल में आग रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। सरकार ने आश्वस्त किया था कि अस्पतालों में आगजनी रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सात साल गुजरने के बाद भी सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की? इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही आगजनी के मामले में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता प्रभात यादव ने याचिका पेश की है।
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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉक्टर पीजी नाजपांडे ने याचिका में कहा है कि 24 जून 2014 को सतना के सरकार अस्पताल में आग लगने से 10 बच्चे घायल हुए थे। एक की मौत हो गई। जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में 23 अगस्त 2016 को हुए हादसे में एक बच्चे की मौत हुई थी और 7 घायल हुए थे। वहीं, भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 8 नवंबर 2021 को हुए हादसे में करीब 10 बच्चों की मौत हो गई। इतने ही जख्मी हुए थे।
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नाजपांडे की याचिका कहती है कि सतना के सरकारी अस्पताल में हुए अग्निकांड के बाद एक याचिका दाखिल हुई थी। उसमें सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि अस्पताल में आग रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। सरकार ने आश्वस्त किया था कि अस्पतालों में आगजनी रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सात साल गुजरने के बाद भी सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की? इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही आगजनी के मामले में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता प्रभात यादव ने याचिका पेश की है।
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