{"_id":"61ff8056d050013865732aa0","slug":"madhya-pradesh-non-state-administrative-service-officers-did-not-become-ias-ps-bid-for-6-years-government-will-decide","type":"story","status":"publish","title_hn":"मध्य प्रदेश: गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी 6 साल से नहीं बने आईएएस, पीएस बोली– सरकार तय करेगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मध्य प्रदेश: गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी 6 साल से नहीं बने आईएएस, पीएस बोली– सरकार तय करेगी
Sun, 06 Feb 2022 01:31 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 06 Feb 2022 01:31 PM IST
सार
पिछले 6 साल से मध्य प्रदेश में गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदों पर पदोन्नत नहीं हो सके हैं। नियम होने के बावजूद सरकार की तरफ से उनके आवेदन नहीं मंगाए जाने की वजह से ऐसा हो रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने कहा कि नियम है, लेकिन सरकार तय करेगी कि किस कैडर से कितने पद भरने हैं।
विज्ञापन
आईएएस : भारतीय प्रशासनिक सेवा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश में गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पिछले 6 साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। इसका कारण नियम होने के बावजूद सरकार की तरफ से उनके आवेदन नहीं मंगाए जाना बताया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने कहा कि नियम है, लेकिन सरकार तय करेगी कि किस कैडर से कितने पद भरने हैं।
बता दें कि दरअसल राज्य प्रशासनिक सेवा का 439 अधिकारियों का कैडर है। इसमें से 33 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाने का नियम है। इनमें से 15 प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से भरने का भी नियम बनाया गया है। लेकिन 2015 के बाद से गैर राज्य प्रशासनिक सेवा का कोई अधिकारी आईएएस के पदों पर पदोन्नति नहीं हो सका है। सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से संबंधित विभागों से योग्य अधिकारियों के आवेदन ही नहीं मंगाए नहीं जा रहे हैं। इस उपेक्षा के कारण अधिकारी नाराज हैं, लेकिन कोई खुल कर सामने आकर बोलने को तैयार नहीं है। दरअसल कोई सरकार के खिलाफ कुछ बोलना नहीं चाहता। सभी का सिर्फ यहीं कहना है कि जैसे 2015 और उसके पहले के अधिकारियों को मौके दिए गए हैं। उनके कैडर को मिलने चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से 15 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाने चाहिए। लेकिन यह भी लिखा गया है कि यह सरकार पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि इससे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति के पद कम हो जाते हैं। सरकार बहुत ही अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकारी को प्रमोशन देने के लिए इस नियम का उपयोग करती है। गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस के पदों पर पदोन्नत करने के लिए आयु सीमा 56 साल निर्धारित है। ऐसे में लंबे समय से आवेदन नहीं मंगाने से कई योग्य अधिकारी आयु सीमा पूरी करने से अयोग्य हो गए हैं।
विज्ञापन
पूर्व चीफ सेक्रेटरी केएस शर्मा ने कहा कि सरकार ने जब आईएएस अवॉर्ड का नियम बनाया है तो दूसरी सेवा के प्रतिभावान अधिकारियों को भी मौके देने चाहिए। इससे सरकार को ही अच्छे अधिकारियों की सेवा मिलेगी। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का नुकसान न होने की तर्कों के साथ मौका नहीं देना उचित नहीं है। इससे गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ न्याय नहीं होना है।
सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने बताया कि 15 प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से भरने का नियम है, लेकिन नियम में यह भी है कि यह सरकार तय करेगी कि कि राज्य प्रशासन सेवा और गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से कितने पद भरने हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति के पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के देने से उनके पद कम हो जाएंगे।
विज्ञापन
बता दें कि दरअसल राज्य प्रशासनिक सेवा का 439 अधिकारियों का कैडर है। इसमें से 33 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाने का नियम है। इनमें से 15 प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से भरने का भी नियम बनाया गया है। लेकिन 2015 के बाद से गैर राज्य प्रशासनिक सेवा का कोई अधिकारी आईएएस के पदों पर पदोन्नति नहीं हो सका है। सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से संबंधित विभागों से योग्य अधिकारियों के आवेदन ही नहीं मंगाए नहीं जा रहे हैं। इस उपेक्षा के कारण अधिकारी नाराज हैं, लेकिन कोई खुल कर सामने आकर बोलने को तैयार नहीं है। दरअसल कोई सरकार के खिलाफ कुछ बोलना नहीं चाहता। सभी का सिर्फ यहीं कहना है कि जैसे 2015 और उसके पहले के अधिकारियों को मौके दिए गए हैं। उनके कैडर को मिलने चाहिए।
विज्ञापन
अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से 15 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाने चाहिए। लेकिन यह भी लिखा गया है कि यह सरकार पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि इससे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति के पद कम हो जाते हैं। सरकार बहुत ही अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकारी को प्रमोशन देने के लिए इस नियम का उपयोग करती है। गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस के पदों पर पदोन्नत करने के लिए आयु सीमा 56 साल निर्धारित है। ऐसे में लंबे समय से आवेदन नहीं मंगाने से कई योग्य अधिकारी आयु सीमा पूरी करने से अयोग्य हो गए हैं।
विज्ञापन
पूर्व चीफ सेक्रेटरी केएस शर्मा ने कहा कि सरकार ने जब आईएएस अवॉर्ड का नियम बनाया है तो दूसरी सेवा के प्रतिभावान अधिकारियों को भी मौके देने चाहिए। इससे सरकार को ही अच्छे अधिकारियों की सेवा मिलेगी। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का नुकसान न होने की तर्कों के साथ मौका नहीं देना उचित नहीं है। इससे गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ न्याय नहीं होना है।
सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने बताया कि 15 प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से भरने का नियम है, लेकिन नियम में यह भी है कि यह सरकार तय करेगी कि कि राज्य प्रशासन सेवा और गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से कितने पद भरने हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति के पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के देने से उनके पद कम हो जाएंगे।
