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मध्य प्रदेश: गांवों में न इंटरनेट है, न ही स्मार्टफोन, फिर भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को थमा दिया अंग्रेजी ऐप; हाईकोर्ट में मिली चुनौती
Thu, 30 Dec 2021 05:18 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Thu, 30 Dec 2021 05:18 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने याचिका दाखिल की है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए अनिवार्य किए गए पोषण ट्रैकर ऐप की अनिवार्यता को चुनौती दी गई है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए पोषण ट्रैकर ऐप अनिवार्य कर दिया है। इसके विरोध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। उनका कहना है कि पोषण ट्रैकर ऐप में जानकारी अंग्रेजी में अपडेट करनी होगी। कई कार्यकर्ताओं के पास न तो स्मार्टफोन है और न ही गांवों में मोबाइल नेटवर्क। और तो और, कई कार्यकर्ताओं को अंग्रेजी नहीं आती, उन पर जानकारी अपलोड करने का दबाव रहेगा।
जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिक एकता संगठन ने दाखिल की थी। इसें कहा गया था कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग ने पोषण अभियान के तहत पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन को अनिवार्य किया है। इस पर जानकारी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। अगर जानकारी अपलोड नहीं हुए तो अनुपस्थित मान लिया जाएगा। साथ ही जुर्माने का प्रावधान भी नियमों में किया गया है।
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जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिक एकता संगठन ने दाखिल की थी। इसें कहा गया था कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग ने पोषण अभियान के तहत पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन को अनिवार्य किया है। इस पर जानकारी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। अगर जानकारी अपलोड नहीं हुए तो अनुपस्थित मान लिया जाएगा। साथ ही जुर्माने का प्रावधान भी नियमों में किया गया है।
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