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गुना: किसान के जहर खाने के मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश, 6 पुलिसकर्मी निलंबित

Thu, 16 Jul 2020 11:02 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अमित कुमार Updated Thu, 16 Jul 2020 11:02 PM IST
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Madhya Pradesh Guna Land: Case against farmers who took poison
किसान दंपती की पिटाई करते पुलिसकर्मी - फोटो : Twitter

मध्य प्रदेश के गुना में जमीन अतिक्रमण को लेकर जहर खाने वाले परिवार के मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। रिपोर्ट 30 दिन के भीतर सौंपनी होगी। इसके साथ ही इस मामले में 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। उधर, इस संबंध में कांग्रेस ने भी एक जांच समिति बनाई है। 

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गुना के निवर्तमान पुलिस अधीक्षक तरुण नायक ने बृहस्पतिवार को आदेश जारी कर इस मामले में शामिल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों की पहचान उप निरीक्षक अशोक सिंह कुशवाह, राजेन्द्र शर्मा, पवन यादव, नरेन्द्र रावत, (सभी आरक्षक, गुना पुलिस लाइन) और दो महिला आरक्षक नीतू यादव व रानी रघुवंशी के रूप में की गई है।
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इसके पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में बुधवार रात को चम्बल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राजाबाबू सिंह, गुना के कलेक्टर एस विश्वनाथन और जिला पुलिस अधीक्षक तरुण नायक को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के भी आदेश दिए।

परिवार के खिलाफ एफआईआर
जहर खाने वाले परिवार के खिलाफ पुलिस ने आज एफआईआर दर्ज कर ली है। जगनपुर चक स्थित करोड़ों रुपए कीमती जमीन से दूसरी बार कब्जा हटाने के दौरान बटियादार दंपती ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की थी। 

इस बीच ऐसी भी खबर आई है कि परिवार के बच्चों को अनाथाश्रम में रखा जाएगा। तबादले से पहले कलेक्टर एस. विश्वनाथन ने बताया था कि बच्चों की देखभाल के लिए कोई नहीं है, इसलिए उन्हें अनाथाश्रम में रखा जाएगा। इस परिवार के पुनर्वास के लिए भी हम इंतजाम कर रहे हैं। यह जमीन भू-माफिया गब्बू पारदी के कब्जे में है। इस मामले में बुधवार रात को कलेक्टर और एसपी को हटा दिया गया है। 

मंगलवार दोपहर इस जमीन से फिर से कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान ही बटियादार राजकुमार अहिरवार एवं उसकी पत्नी ने जहर खा लिया था। दोनों की स्थिति नाजुक है। पुलिस का दावा है कि गप्पू पारदी ने ही परिवार को जहर खाने के लिए उकसाया था। इस मामले में बटियादार राजकुमार अहिरवार और उसके परिवार के सदस्य शिशुपाल अहिरवार, सावित्री बाई सहित 8 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। जिला अस्पताल में भर्ती राजकुमार और उसकी पत्नी की स्थिति खराब है। वह ठीक से नहीं बोल पा रहे हैं। राजकुमार की बहन ने बताया कि एक साल तक भूमि खाली पड़ी रही, किसी ने काम शुरू नहीं किया। हमें गप्पू पारदी ने जमीन बटिया पर दी थी।


पिछले साल हटाया था कब्जा
इस भूमि से राजस्व विभाग ने वर्ष 2019 में ही कब्जा हटा दिया था। गप्पू पारदी को बेदखल कर दिया गया था। फिर उसने यह भूमि बटिया से कैसे दी? राजस्व विभाग का दावा है कि एक साल पहले ही उच्च शिक्षा विभाग को जमीन दी जा चुकी है तो अब तक काम क्यों शुरू नहीं किया गया। वहीं ठेकेदार राधेश्याम अग्रवाल का कहना है कि हमें अब तक काम करने के लिए जमीन ही नहीं मिली तो कैसे निर्माण होता? इसलिए फिर से जमीन खाली कराने के लिए पत्र लिखा था।

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