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मध्य प्रदेश: पीजी मेडिकल में इन-सर्विस उम्मीदवारों के आरक्षण में कटौती, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Mon, 08 Nov 2021 08:45 PM IST
सुभाष कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: सुभाष कुमार
Updated Mon, 08 Nov 2021 08:45 PM IST
सार
याचिकाकर्ता डॉ नवनीत कुमार शर्मा की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि एमबीबीएस कोर्स करने के बाद एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने वाले डॉक्टरों को प्रीजी कोर्स दाखिले में इन-सर्विस उम्मीदवार का लाभ दिया जाता था।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
एमबीबीएस करने के बाद प्रीजी कोर्स में इन-सर्विस उम्मीदवारों की आरक्षण सीमा में कटौती किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस पुरूषेन्द्र कौरव की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
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याचिकाकर्ता डॉ नवनीत कुमार शर्मा की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि एमबीबीएस कोर्स करने के बाद एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने वाले डॉक्टरों को प्रीजी कोर्स दाखिले में इन-सर्विस उम्मीदवार का लाभ दिया जाता था। पीजी कोर्स दाखिलें में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम अनुसार इन-सर्विस उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता था। याचिका में कहा गया था कि सरकार द्वारा 19 अगस्त को एक सर्कुलर जारी कर आरक्षण 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया है।
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याचिका में कहा गया था कि ग्रामीण क्षेत्र में एक साल तक सेवा देने वालों को उक्त आरक्षण का लाभ मिलता था। सरकार द्वारा जारी आदेश को उक्त याचिका में चुनौती दी गयी थी। याचिका के साथ इन सर्विस उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने के समर्थन में पारित विभिन्न हाईकोर्ट आदेश भी प्रस्तुत किये गये थे। प्रमुख सचिव स्वास्थ एव परिवार कल्याण विभाग तथा संचालक मेडिकल एजुकेशन को अनावेदक बनाया गया था। याकिचाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।
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