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Madhya Pradesh: बैंक में गबन के मामले में क्रिकेटर नमन ओझा के पिता विनय ओझा गिरफ्तार, एक दिन की पुलिस रिमांड पर
Tue, 07 Jun 2022 07:13 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Tue, 07 Jun 2022 07:13 AM IST
सार
क्रिकेटर नमन ओझा के पिता विनय ओझा को मुलताई पुलिस ने बैंक में गबन के मामले में गिरफ्तार किया है। वह बैंक ऑफ महाराष्ट्र की जौलखेड़ा शाखा में 2013 में सवा करोड़ रुपये के गबन मामले में फरार थे। कोर्ट ने पूछताछ के लिए विनय ओझा की एक दिन की रिमांड दी है।
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विनय ओझा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
क्रिकेटर नमन ओझा के पिता विनय ओझा को मुलताई पुलिस ने बैंक में गबन के मामले में गिरफ्तार किया है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र की जौलखेड़ा शाखा में 2013 में सवा करोड़ रुपए का गबन किया गया था। इस मामले में विनय ओझा फरार चल रहे थे। पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर कोर्ट के सामने पेश किया। कोर्ट ने ओझा की पुलिस को एक दिन की रिमांड दी है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा जौलखेड़ा में पदस्थ बैंक मैनेजर अभिषेक रत्नम ने गबन की साजिश रची थी। रत्नम के ट्रांसफर होने के बाद इसी वर्ष विनय ओझा ने एक अन्य के साथ मिलकर 34 फर्जी खाते खाेले। फिर इन पर केसीसी का लोन ट्रांसफर कर करीब सवा करोड़ रुपये निकाल लिया। इस दौरान विनय ओझा बैक में शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ थे। सवा करोड़ रुपये की राशि को विनय ओझा, पूर्व प्रबंधक अभिषेक रत्नम, विनोद पवार, लेखापाल निलेश छलोत्रे और दीनानाथ राठौर ने आपस में बांट लिया। करीब एक साल बाद बैंक के नए शाखा प्रबंधक रितेश चतुर्वेदी ने गड़बड़ी पकड़ी और गबन की शिकायत थाने में की। शिकायत में बताया फर्जी नाम और फोटो के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर बैंक से राशि निकाली गई। आरोपियों ने मृतक के नाम पर खाता खोला और राशि निकाली। साथ ही दूसरे किसानों के नाम पर केसीसी बनाकर पैसा निकाला गया।
पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर तत्कालीन प्रबंधक अभिषेक रत्नम, निलेश छलोत्रे और अन्य को गिरफ्तार कर लिया। विनय ओझा केस दर्ज होने के बाद से फरार चल रहे थे। जिसे पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद उनको कोर्ट के सामने पेश किया गया। जहां से कोर्ट ने विनय ओझा को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा जौलखेड़ा में पदस्थ बैंक मैनेजर अभिषेक रत्नम ने गबन की साजिश रची थी। रत्नम के ट्रांसफर होने के बाद इसी वर्ष विनय ओझा ने एक अन्य के साथ मिलकर 34 फर्जी खाते खाेले। फिर इन पर केसीसी का लोन ट्रांसफर कर करीब सवा करोड़ रुपये निकाल लिया। इस दौरान विनय ओझा बैक में शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ थे। सवा करोड़ रुपये की राशि को विनय ओझा, पूर्व प्रबंधक अभिषेक रत्नम, विनोद पवार, लेखापाल निलेश छलोत्रे और दीनानाथ राठौर ने आपस में बांट लिया। करीब एक साल बाद बैंक के नए शाखा प्रबंधक रितेश चतुर्वेदी ने गड़बड़ी पकड़ी और गबन की शिकायत थाने में की। शिकायत में बताया फर्जी नाम और फोटो के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर बैंक से राशि निकाली गई। आरोपियों ने मृतक के नाम पर खाता खोला और राशि निकाली। साथ ही दूसरे किसानों के नाम पर केसीसी बनाकर पैसा निकाला गया।
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पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर तत्कालीन प्रबंधक अभिषेक रत्नम, निलेश छलोत्रे और अन्य को गिरफ्तार कर लिया। विनय ओझा केस दर्ज होने के बाद से फरार चल रहे थे। जिसे पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद उनको कोर्ट के सामने पेश किया गया। जहां से कोर्ट ने विनय ओझा को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
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