बंगलूरू में 'बंधक' बने विधायकों को वापस लाने को कमलनाथ ने अमित शाह को लिखा पत्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्य प्रदेश में जारी सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने गृह मंत्री से गुजारिश की है कि बंगलूरू गए उनके 22 बागी विधायकों को सुरक्षित वापस आने दिया जाए ताकि वे 16 मार्च से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में हिस्सा सकें।
कमलनाथ ने अपने पत्र में लिखा, 'मैं आपका ध्यान 3 मार्च, 2020 के बाद के मध्य प्रदेश में हो रहे घटनाक्रम की ओर आकर्षित करना चाहूंगा, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार को अस्थिर करना है। कांग्रेस पार्टी के तीन विधायक, बसपा की विधायक श्रीमती रामबाई और कांग्रेस को समर्थन देने वाले एक निर्दलीय विधायक को गुरुग्राम स्थित मानेसर होटल ले जाया गया। हालांकि सही समय पर मध्य प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों ने होटल पहुंच कर श्रीमती रामबाई और उसके परिवार के सदस्यों को भाजपा नेताओं के चंगुल से छुड़ाया।'
उन्होंने आगे लिखा, 'तीन कांग्रेस विधायकों और एक निर्दलीय विधायक को भाजपा द्वारा चार्टर्ड विमान की व्यवस्था कर बंगलूरू ले जाया गया। उस विमान की यात्री सूची से स्पष्ट है कि भाजपा विधायक अरविन्द भदौरिया पदाधिकारी अशीष तिवारी उनके साथ गए।' कमलनाथ ने कहा कि बाद में विधायकों की संख्या बढ़कर 22 हो गई। ये सभी विधायक कर्नाटक पुलिस के संरक्षण में हैं।
सीएम कमलनाथ ने लिखा, 'मुझे सूचित किया गया है कि इन विधायकों को सभी प्रकार की व्यक्तिगत संचार सुविधाओं से वंचित कर बंदी बनाकर रखा गया है। यहां तक कि एक विधायक के पिता को अपने बेटे से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। मध्यप्रदेश के दो मंत्रियों जो उस विधायक के पिता के साथ थे, उन्हें भी कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया तथा उनके साथ धक्का-मुक्की भी की गई।'
उन्होंने पत्र के जरिए यह भी आरोप लगाया कि विधायकों से बातचीत की सभी कोशिशें भी रद्द हो गई हैं। इससे उन्हें बंदी बनाए जाने की आशंका बढ़ रही है। यहां तक कि विधायकों के नाम से जो पत्र व वीडियो संदेश जारी हो रहे हैं, वे सभी एक जैसे हैं।
फ्लोर टेस्ट की मांग का कोई मतलब नहीं :
सीएम कमलनाथ ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को भी इन गतिविधियों और आशंकाओं के बारे में पत्र लिखा है। इस समय कांग्रेस के विधायकों की सुरक्षा की चिंता है। उन्होंने कहा, 'मैंने माननीय राज्यपाल से अनुरोध किया था कि वे इन कैद विधायकों की तुरंत रिहाई हेतु केन्द्र शासन से अनुरोध करें किन्तु कोई सकारात्मक परिणाम अभी तक सामने नहीं आया है। आप इस बात से सहमत होंगे कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की किसी मांग का कोई मतलब नहीं है जब तक मेरे पार्टी के 22 विधायकों को बाहर बंदी बनाकर रखा गया हो।'
उच्चतम सुरक्षा सुनिश्चित करूंगा
सीएम ने कहा, 'मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते प्रदेश के सभी नागरिकों जिसमें विधायक गण भी शामिल हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व मुझ पर है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यदि कर्नाटक पुलिस द्वारा इन 22 विधायकों को रिहा कर दिया जाता है तो मैं राज्य सरकार की ओर से उच्चतम सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करूंगा ताकि वे न केवल बिना किसी डर के अपनी बात माननीय विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत कर सकें बल्कि
विधानसभा की आगामी दिनों में होने वाली विविध कार्यवाहियों में भी शामिल हो सकें।'
गृह मंत्री के नाते अपनी शक्ति का प्रयोग करें
मुख्यमंत्री ने कहा, 'इन सब स्थितियों को देखते हुए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप कृपया केंद्रीय गृह मंत्री होने के नाते अपनी शक्तियों का प्रयोग करें, जिससे कांग्रेस के 22 विधायक जो बंदी बनाए गए हैं वे वापस मध्यप्रदेश सुरक्षित पहुंच सकें।'
