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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Madhya Pradesh by-elections: Voting in Khandwa Lok Sabha and 3 other assembly seats on Saturday; Know who is fighting with whom

मध्यप्रदेश उपचुनावः खंडवा लोकसभा और 3 विधानसभा सीटों पर वोटिंग शनिवार को; जानिए कौन हैं किसके सामने

Fri, 29 Oct 2021 02:33 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: रवींद्र भजनी Updated Fri, 29 Oct 2021 02:33 PM IST
सार

26 लाख से अधिक वोटर शनिवार को मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन चुनावों को शिवराज का लिटमस टेस्ट कहा जा रहा है। नतीजे 2 नवंबर को आएंगे। 
 

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Madhya Pradesh by-elections: Voting in Khandwa Lok Sabha and 3 other assembly seats on Saturday; Know who is fighting with whom
रात्रिभोज के बाद छोटी कौल को गले लगाते हुए शिवराज सिंह चौहान। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश में 30 अक्टूबर यानी शनिवार को खंडवा लोकसभा के साथ-साथ तीन विधानसभा सीटों- रैगांव, पृथ्वीपुर और जोबट में उपचुनाव होने हैं। 26 लाख से अधिक वोटर 48 प्रत्याशियों में से अपना नेता चुनेंगे। चारों ही सीटों पर कोरोनावायरस की वजह से निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौत होने से उपचुनाव की नौबत बनी है। इन चुनावों को शिवराज सिंह चौहान का लिटमस टेस्ट कहा जा रहा है। नतीजे 2 नवंबर को घोषित होंगे। 
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इन उपचुनावों की जरूरत क्यों पड़ी?
कोरोना की दूसरी लहर में निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौत के बाद सीटें रिक्त हुई हैं। खंडवा लोकसभा सीट पर भाजपा के नंदकुमार सिंह चौहान सांसद थे। कोरोना की वजह से उनका निधन हुआ और इस सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। इसी तरह जोबट विधानसभा से कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया, पृथ्वीपुर से ब्रजेंद्र सिंह राठौर और रैगांव से जुगल किशोर बागरी का भी कोरोना से निधन हुआ था। चुनाव कानून के मुताबिक लोकसभा और विधानसभा की सीटें खाली होने के छह महीने के भीतर नया प्रतिनिधि चुना जाना आवश्यक है। इसी के लिए यह उपचुनाव हो रहे हैं।
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किसके बीच है मुख्य मुकाबला? 
48 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 32 उम्मीदवार तीन विधानसभा क्षेत्रों में किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, 16 उम्मीदवार खंडवा लोकसभा सीट पर लड़ रहे हैं। चारों ही सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में है। जोबट और पृथ्वीपुर में भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल होने वालों को उम्मीदवार बनाया है। इन दोनों ही सीटों पर 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। दो बार की विधायक सुलोचना रावत को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली। उनका मुकाबला जोबट में कांग्रेस के जिला प्रमुख महेश पटेल से है। 
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पृथ्वीपुर में कुछ ही दिन पहले समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर भाजपा में आए शिशुपाल यादव को टिकट दिया गया है। उनका मुकाबला ब्रजेंद्र सिंह राठौर के बेटे नितेंद्र सिंह राठौर से है, जो कांग्रेस के टिकट पर भावनात्मक आधार पर जीत दर्ज करने का सपना देख रहे हैं।  

रैगांव में भाजपा के पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी की रिश्तेदार प्रतिमा बागरी को टिकट दिया है। कांग्रेस ने कल्पना वर्मा को चुना है, जो 2018 में जुगल किशोर बागरी से 18 हजार वोट से हारी थी। कल्पना एक मजबूत उम्मीदवार हैं और हारने के बाद भी इलाके में सक्रिय रही है। 

इस उपचुनावों का हाइलाइट रहने वाली है खंडवा लोकसभा सीट। यहां दोनों पार्टियां गुटबाजी का सामना कर रही है। भाजपा ने वरिष्ठ नेता नंदकुमार सिंह चौहान के निधन से रिक्त हुई सीट पर ज्ञानेश्वर पाटिल को टिकट दिया है। पार्टी में पाटिल कोई मजबूत नाम नहीं है। चौहान के बड़े बेटे हर्षवर्धन चौहान और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस भी टिकट के दावेदार थे।  

इसी तरह कांग्रेस के अरुण यादव को टिकट मिलने की उम्मीद थी। यादव पहले भी नंदकुमार सिंह चौहान को हरा चुके हैं। उनका इस विधानसभा क्षेत्र में प्रभाव है। यादव केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। हालांकि, आखिरी क्षणों में यादव ने उम्मीदवारी से इनकार किया क्योंकि कांग्रेस के प्रादेशिक नेताओं ने उन्हें अलग-थलग कर दिया था। पार्टी ने आखिर राजनारायण पुरनी को टिकट दिया, जो खंडवा से तीन बार के विधायक हैं। ठाकुर को दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है। 

मुद्दे क्या हैं चुनाव में 
कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में भाजपा पर महंगाई, बिजली-खाद संकट के साथ ही अन्य मुद्दों को हाइलाइट किया है। कमलनाथ ने तो शिवराज के 17 साल के शासन की कमियां गिनाई। फिर बेरोजगारी, कुपोषण जैसे मुद्दे भी उठाए। 

वहीं, इन चुनावों में भाजपा की सक्रियता भी देखते ही बनी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हर क्षेत्र में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। भाजपा ने 12 मंत्रियों और 40 विधायकों को फुलटाइम चुनावी ड्यूटी में लगाए रखा। ऐसा लगा जैसे पार्टी उपचुनाव नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव लड़ रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 40 सभाओं को संबोधित किया। पांच रातें तो उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रों में ही बिताईं। कभी किसी आदिवासी के घर भोजन किया तो किसी गरीब के घर जाकर ठहरे। सुबह शेव करने वाला वीडियो भी खूब वायरल हुआ। समय कम बचा था तो पुनासा डैम पर खड़े-खड़े ही एक सभा को संबोधित किया। 


शिवराज ने आखिर इतनी ताकत क्यों लगाई
साफ है कि इन उपचुनावों को शिवराज सिंह चौहान का लिटमस टेस्ट समझा जा रहा है। भाजपा ने हाल ही में उत्तराखंड, गुजरात और कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को बदलने की अटकलें भी लंबे अरसे से लग रही थी। ऐसे में शिवराज के नेतृत्व में अगर पार्टी अपनी सीटें बढ़ा पाती हैं तो यह उनकी कुर्सी पर उनकी पकड़ को मजबूत करेगी। 
 
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