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मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट नाराज हुआ तो ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बोले- 45 दिन के अंदर लागू करेंगे नया मोटर व्हीकल एक्ट
Wed, 08 Dec 2021 07:39 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 08 Dec 2021 07:39 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में 45 दिन के अंदर मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया जाएगा। इस संबंध में बिना परमिट चल रहे ऑटो जब्त किए जाएंगे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मुकेश जैन ने यह जानकारी दी।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट 2019 को 45 दिन में लागू किया जाएगा। बिना परमिट चल रहे ऑटो भी जब्त किए जाएंगे। मध्य प्रदेश के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मुकेश जैन खुद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश हुए और यह जानकारी दी। इसके बाद भी हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को फटकारा। कहा कि अगर सरकारी काम भी हम ही कर लेंगे तो प्रशासनिक अधिकारियों की जरूरत ही क्या है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी को लेकर 2013 में याचिका दाखिल हुई थी। इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच ने कहा कि अधिकारी कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते, इस वजह से याचिका पर कई साल से सुनवाई चल रही है। बेंच ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को चेतावनी भी दी कि भविष्य में ऐसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 जनवरी की तारीख तय की है।
सतना बिल्डिंग निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर याचिकाओं में ऑटो रिक्शा को लेकर नियम बनाने की मांग की थी। उनका कहना था कि ऑटो बेखौफ दौड़ रहे हैं। शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह चौपट कर रखा है। कहीं भी सवारी बिठाते हैं। कहीं भी रुक जाते हैं। सवारियों को भी हमेशा जान का खतरा बना रहता है। सतीश वर्मा के साथ-साथ याचिकाकर्ता की ओर से आदित्य संघी ने भी पैरवी की। सरकार की ओर से उप-महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली पेश हुए।
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कोर्ट ही सब कर लेता तो अफसर क्यों चाहिए
चीफ जस्टिस की बेंच ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को फटकार लगाई और कहा कि आदेश पारित करना और उसे लागू करना हमारी जिम्मेदारी है तो प्रशासनिक अधिकारियों की आवश्यकता ही क्या है? कोर्ट ने पहले जारी किए आदेशों को लागू करने के लिए दो हफ्ते का समय राज्य सरकार को दिया है।
हजारों ऑटो चल रहे हैं बिना परमिट के
सरकार ने कोर्ट को बताया कि इंदौर में 10 हजार तथा भोपाल में 15 हजार ऑटो बिना परमिट संचालित हो रहे हैं। ऑटो संचालन के रेगुलेटरी प्रावधान के तहत अधिकतम गति 40 किमी प्रति घंटा तय की गई है। ऑटो में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य है जो ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सेंट्रल इंटिग्रेशन से लिंक होगा। इसके अलावा परमिट, आरटीओ और चालकों के कर्तव्य व आचरण भी तय किया गया है। दस साल पुराने डीजल ऑटो का परमिट जारी नहीं होगा। उसे सीएनजी में बदला जाएगा।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी को लेकर 2013 में याचिका दाखिल हुई थी। इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच ने कहा कि अधिकारी कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते, इस वजह से याचिका पर कई साल से सुनवाई चल रही है। बेंच ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को चेतावनी भी दी कि भविष्य में ऐसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 जनवरी की तारीख तय की है।
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सतना बिल्डिंग निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर याचिकाओं में ऑटो रिक्शा को लेकर नियम बनाने की मांग की थी। उनका कहना था कि ऑटो बेखौफ दौड़ रहे हैं। शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह चौपट कर रखा है। कहीं भी सवारी बिठाते हैं। कहीं भी रुक जाते हैं। सवारियों को भी हमेशा जान का खतरा बना रहता है। सतीश वर्मा के साथ-साथ याचिकाकर्ता की ओर से आदित्य संघी ने भी पैरवी की। सरकार की ओर से उप-महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली पेश हुए।
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कोर्ट ही सब कर लेता तो अफसर क्यों चाहिए
चीफ जस्टिस की बेंच ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को फटकार लगाई और कहा कि आदेश पारित करना और उसे लागू करना हमारी जिम्मेदारी है तो प्रशासनिक अधिकारियों की आवश्यकता ही क्या है? कोर्ट ने पहले जारी किए आदेशों को लागू करने के लिए दो हफ्ते का समय राज्य सरकार को दिया है।
हजारों ऑटो चल रहे हैं बिना परमिट के
सरकार ने कोर्ट को बताया कि इंदौर में 10 हजार तथा भोपाल में 15 हजार ऑटो बिना परमिट संचालित हो रहे हैं। ऑटो संचालन के रेगुलेटरी प्रावधान के तहत अधिकतम गति 40 किमी प्रति घंटा तय की गई है। ऑटो में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य है जो ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सेंट्रल इंटिग्रेशन से लिंक होगा। इसके अलावा परमिट, आरटीओ और चालकों के कर्तव्य व आचरण भी तय किया गया है। दस साल पुराने डीजल ऑटो का परमिट जारी नहीं होगा। उसे सीएनजी में बदला जाएगा।
