चंद्रग्रहण 2025: ओंकारेश्वर मंदिर की व्यवस्था बदली, आज दोपहर से शुरू होगा सूतक काल; इन बातों का रखें ध्यान
ग्रहण काल के दौरान मंदिर के पट बंद रहेंगे और गर्भगृह में पूजन सामग्री ले जाना प्रतिबंधित होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक दोपहर 12:56 बजे से शुरू होगा, जबकि ग्रहण रात 9:56 बजे से 1:26 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं से सूतक और ग्रहण काल के धार्मिक नियमों का पालन करने और मंदिर की व्यवस्थाओं में सहयोग देने की अपील की गई है।
विस्तार
वर्ष 2025 का 7 सितंबर रविवार का दिन कई मायनों में खास होने वाला है। रविवार को पितरपक्ष की शुरुआत के साथ ही पूर्ण चंद्रग्रहण भी रहेगा। इसको लेकर ओंकारेश्वर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि ग्रहण काल के दौरान मंदिर के पट बंद रहेंगे और श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री गर्भगृह में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण का सूतक रविवार दोपहर से ही प्रारंभ हो जाएगा, ऐसे में श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ और धार्मिक नियमों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है। श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ट्रस्ट की ओर से सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि उपरोक्त व्यवस्था में सहयोग प्रदान करें।
मंदिर की व्यवस्थाओं में ये रहेगा बदलाव
- मंदिर के पट प्रातः 05:00 बजे पूर्ववत खुलेंगे तथा भक्तजन भगवान श्री ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन कर सकेंगे।
- गर्भगृह में जल, फूल, बेलपत्र एवं अन्य पूजन सामग्री ले जाना प्रतिबंधित रहेगा।
- ग्रहण काल प्रारम्भ होने से पूर्व भगवान श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की शयन आरती रात्रि 09:30 बजे संपन्न की जाएगी।
- चन्द्रग्रहण प्रारम्भ होते ही रात्रि 09:58 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।
- ग्रहण समाप्ति उपरान्त प्रातःकाल मंदिर खुलने पर संपूर्ण परिसर का विधिवत शुद्धिकरण एवं पूजा-अर्चना की जाएगी, तत्पश्चात दर्शन पुनः आरम्भ होंगे।
9 घंटे पहले शुरू होता है सूतक काल
ओंकारेश्वर के ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक दुबे ने संपूर्ण चंद्र ग्रहण को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि ग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। चंद्र ग्रहण का सूतक रविवार दोपहर 12.56 बजे से शुरू होगा और ग्रहण खत्म होने के साथ ही खत्म होगा। उन्होंने बताया कि सूतक काल के पहले ही भगवान का पूजन इत्यादि कर लेना चाहिए सूतक काल में बच्चे बूढ़े और बीमार को छोड़कर सभी ने उसके नियम का पालन करना चाहिए।
क्या करें, क्या न करें
जैसे चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ करना या फिर देवी-देवताओं की मूर्ति को स्पर्श करने से बचना चाहिए। इस अवधि में भोजन करने या फिर सोने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे जीवन में नकारात्मकता बढ़ सकती है। इसी के साथ चंद्र ग्रहण के दौरान कहीं बाहर नहीं जाना चाहिए। सूतक काल में हमें कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। घर में बने भोजन में तुलसी का पत्ता या फिर कुशा डाल देना चाहिए, जिससे कि खाने पीने की वस्तु अशुद्ध नहीं हो। सूतक लगने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर देना चाहिए। भगवान का भजन करना चाहिए। ग्रहण कल के दौरान किसी नदी तट पर जाकर अपने गुरु मंत्र या ईष्ट देवता का यथाशक्ति भजन करना चाहिए।
चंद्र ग्रहण का समय
ग्रहण की शुरुआत: 7 सितंबर की रात 9.56 बजे से होगी।
ग्रहण का मध्य: रात 11.41 बजे रहेगा।
ग्रहण समाप्ति: रात 1.26 बजे ग्रहण खत्म हो जाएगा।
