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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Lok Sabha Chunav 2019: 16 years after Uma Bharti, again a Sadhvi to contest Digvijay

16 साल पहले इस साध्वी ने दिग्विजय को सियासी वनवास पर भेजा...सामने फिर एक साध्वी

Thu, 18 Apr 2019 12:47 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Priyesh Mishra Updated Thu, 18 Apr 2019 12:47 PM IST
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Lok Sabha Chunav 2019: 16 years after Uma Bharti, again a Sadhvi to contest Digvijay
साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की अगुवाई में जब 16 साल पहले कांग्रेस बुरी तरह हारी तब उनका नाम ‘मिस्टर बंटाधार’ मशहूर हो चुका था। 10 साल मप्र के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय को यह नाम साध्वी उमा भारती ने दिया था, जिनकी अगुवाई में भाजपा ने 2003 में विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज की और बाद में वह सीएम भी बनीं। तब नारे लगे, ‘साध्वी को राज, राजा को वनवास’।
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इस हार से दिग्विजय इतने आहत हुए कि राजनीति से संन्यास ले लिया और 10 साल सक्रिय सियासत से दूर रहे। 16 साल बाद राघोगढ़ के दिग्गी राजा चुनावी मैदान में उतरे तो भाजपा ने उनके सामने फिर साध्वी की वहीं पुरानी चुनौती पेश कर दी। इस बार उनका सामना है मालेगांव ब्लास्ट का अरोप झेल चुकीं प्रज्ञा ठाकुर से। 
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प्रज्ञा का भोपाल से भाजपा उम्मीदवारी तक का सफर काफी उथल-पुथल भरा रहा। प्रज्ञा को 2008 में मालेगांव विस्फोट केस में महाराष्ट्र एटीएस ने गिरफ्तार किया था। अभी वह जमानत पर हैं। उन पर हिंदू आतंकवादी होने का आरोप लगा। बाद में एनआईए ने उन्हें सुबूतों के अभाव में क्लीनचिट दी। 2007 में संघ प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन देवास कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।
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ठुकरा दिया था शादी का प्रस्ताव, जेल में हुआ कैंसर

Lok Sabha Chunav 2019: 16 years after Uma Bharti, again a Sadhvi to contest Digvijay
साध्वी प्रज्ञा-दिग्विजय सिंह - फोटो : PTI
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पैदा हुई 48 वर्षीय प्रज्ञा की पहचान भगवा वस्त्र, छोटे बाल और रुद्राक्ष की माला है। इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट प्रज्ञा का आरएसएस से लंबा जुड़ाव रहा है। युवा अवस्था में संन्यास लेने वाली प्रज्ञा ने एबीवीपी व दुर्गा वाहिनी के साथ भी काम किया।

उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर एमपी के एक भाजपा विधायक ने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे प्रज्ञा ने ठुकरा दिया था। मालेगांव विस्फोट में जेल में रहने के दौरान उन पर मकोका भी लगा। जेल में ही उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हो गया, जिसका लखनऊ में ऑपरेशन हुआ। प्रयागराज महाकुंभ में साध्वी प्रज्ञा को भारत भक्ति अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर बनाया गया था। 

संघ के धुर विरोधी दिग्विजय अब राम की शरण में

दिग्विजय सिंह अपने बयानों की वजह से अक्सर भाजपा के निशाने पर रहते हैं। हालांकि इन दिनों वह बदले-बदले नजर आ रहे हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल संघ कार्यालय के सामने से सुरक्षा हटाई तो संघ के धुर विरोधी रहे दिग्विजय ने इसका ट्विटर पर विरोध किया। इसके बाद सुरक्षा दोबारा लगा दी गई। बीते दिनों दिग्विजय ने भोपाल में कांग्रेस दफ्तर की जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को देने की भी घोषणा की।
 

साध्वी के प्रत्याशी घोषित होते ही ऐसी रही प्रतिक्रिया

Lok Sabha Chunav 2019: 16 years after Uma Bharti, again a Sadhvi to contest Digvijay
javed akhtar, sadhvi pragya - फोटो : social media
''भोपाल के लिए भाजपा का चयन एकदम निष्कलंक है। साध्वी प्रज्ञा संघ परिवार के विचारों और कामों का बिल्कुल सही मूर्त रूप हैं। वाह! वाह!! वाह!!!'' - जावेद अख्तर, लेखक, फिल्मकार
 


''भाजपा से और क्या उम्मीद की जा सकती है। इससे ज्यादा मैं और क्या कहूं।''  - गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस

''भगवा आतंक’ शब्द दिग्विजय सिंह ने ही गढ़ा था। इसीलिए पार्टी ने इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाना तय किया और साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से उतारा है। समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में स्वामी असीमानंद सहित ऐसे कई आरोपी बरी हो चुके हैं, जनता कांग्रेस और राहुल गांधी को सजा देगी।'' -अमित शाह, अध्यक्ष भाजपा
 

भोपाल: ऐसा है लोकसभा क्षेत्र का गणित

Lok Sabha Chunav 2019: 16 years after Uma Bharti, again a Sadhvi to contest Digvijay
वल्लभ भवन, भोपाल
  • 21% ग्रामीण, बाकी शहरी
  • 14.83% अनुसूचित जाति
  • 2.56% अनुसूचित जनजाति
  • 75 से 80% हिंदू
  • 20 से 25%मुस्लिम

1984 के बाद नहीं जीती कांग्रेस

भोपाल में कांग्रेस आखिरी बार 1984 में जीती थी। 1989, 1991, 1996 और 1998 में  पूर्व मुख्यसचिव सुशील चंद्र वर्मा भाजपा सांसद बने। 1999 में उमा भारती, 2004 व 2009 में कैलाश जोशी और 2014 में आलोक संजर जीते।

वर्ष        विजयी    अंतर

2014    भाजपा    3.70 लाख
2009    भाजपा    65 हजार
2004    भाजपा    3.06 लाख
1999    भाजपा    1.68 लाख

आठ विस सीटों में पांच भाजपा के पास 2018 के विधानसभा चुनाव में भोपाल लोकसभा क्षेत्र में आने वाली आठ विस सीटों में से पांच भाजपा और तीन कांग्रेस ने जीती थीं। भाजपा को यहां कांग्रेस से करीब 11 फीसदी ज्यादा वोट भी मिले। 


 
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