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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Lata Mangeshkar passed away: Ustad Amanat Ali Khan had understood the nuances of classical music, due to Kumar Sahab, there was a lot of attachment with Devas

लता मंगेशकर का निधन: उस्ताद अमानत अली खां साहब से समझीं थी शास्त्रीय संगीत की बारीकियां, कुमार साहब के कारण देवास से रहा खासा लगाव

Sun, 06 Feb 2022 01:43 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Sun, 06 Feb 2022 01:43 PM IST
सार

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का देवास से भी जुड़ाव  रहा। बचपन में वे पिता और भाई-बहनों के साथ देवास आईं थीं। देवास के संगीतज्ञ उस्ताद अमानत अली खां साहब से मुंबई में शास्त्रीय संगीत की बारीकियां समझीं। 

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Lata Mangeshkar passed away: Ustad Amanat Ali Khan had understood the nuances of classical music, due to Kumar Sahab, there was a lot of attachment with Devas
भारत रत्न लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत रत्न, स्वर  कोकिला, स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का मध्यप्रदेश के देवास से भी जुड़ाव रहा। देवास में रहे मूर्धन्य संगीतज्ञ उस्ताद अमानत अली खां साहब से लता जी ने संगीत की तालीम भी ली, हालांकि ये भेंट मुंबई में ही हुई क्योंकि अमानत अली खां मुंबई में बस गए थे। देवास से लता जी के लगाव का दूसरा कारण महान संगीतज्ञ पं. कुमार गंधर्व थे, जिनका वे बहुत सम्मान करती थीं।
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देवास के इतिहासकार जीवनसिंह ठाकुर ने अमर उजाला से हुई बातचीत में बताया कि उस्ताद अमानत अली खां साहब ग्वालियर घराने की गायकी से ताल्लुक रखते थे। देवास में वे शीलनाथ जी महाराज की परंपरा से जुड़े रहे। कुछ समय यहां बिताया और बाद में मुंबई जाकर बस गए। मुंबई में ही लता मंगेशकर उनसे मिलीं थी और शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखीं थीं। देवास में लता जी बचपन में जरुर आईं थी क्योंकि तब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर जी की संगीत मंडली थी जिसके चलते वे मालवा क्षेत्र में जाते थे। बचपन में अपने पिता व भाई-बहनों के साथ लता जी इंदौर के अलावा देवास, उज्जैन, शाजापुर भी गईं थीं। बाद में जब वे मुंबई चली गईं और व्यस्तता बढ़ गईं तो देवास आना कभी नहीं हुआ। उनका मन जरूर करता था मगर वे आ नहीं सकीं। देवास के एक कार्यक्रम में लता जी की बहन मीना से मुलाकात हुई थी। उनसे पारिवारिक बात हुई तो मीना जी ने कहा था कि लता जी इंदौर के साथ देवास को याद करतीं हैं लेकिन व्यस्तता इतनी हो गई कि वे आ नहीं पातीं। 
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बहुत व्यापक था लता जी का व्यक्तित्व
इतिहासकार ठाकुर ने कहा कि लता जी का अवसान देश के लिए कभी न भूलने वाली क्षति है। वे हमारे दिल की धड़कनों में बसीं हैं। मैं तो उन्हें मां सरस्वती का अवतार मानता हूं क्योंकि जितनी ख्याति उन्होंने पाई उतनी किसी को नहीं मिली। उनका व्यक्तित्व इतना व्यापक था जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। लता जी ने भारत की सभी भाषाओं को सम्मान दिया। सबसे बड़ा योगदान तो उनका यह है कि वे देश के जन-मन में बसी थीं। चाहे सुख हो या दुख, संयोग हो या वियोग, विरह हो या मिलन, उनके गीत बरबस ही लोगों की जुबां पर आते थे। गीतों के गुनगुनाते हुए लोग अपने रंज-गम भूल जाते थे। ऐसी शख्सियत का जाना हर मन को खाली कर गया। हर घर सूना हो गया। 
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