मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित मनकी गांव को 'मिसिंग फादर्स' (गायब पिता) भी कहा जाता है। 513 लोगों की जनसंख्या वाले गांव के इस नाम के पीछे का कारण भी बहुत बड़ा है। गांव के हालात ऐसे हैं कि बच्चे अपने पिता से दूर रहने पर मजबूर हैं। चलिए आपको बतातें हैं इस नाम के पीछे की पूरी कहानी-
70 फीसदी पुरुष गांव से बाहर
सूखे से प्रभावित इस गांव के करीब 70 फीसदी पुरुष गांव से बाहर रहते हैं। वह अकसर दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में नौकरियों की तलाश में निकल जाते हैं।
खेती करना असंभव
इस गांव में काफी समय से अच्छी बारिश नहीं हुई है, जिस कारण यह सूखे की चपेट में आ गया। यहां पानी की कमी होने से खेती करना भी असंभव है।
महिलाएं भी छोड़ रहीं गांव
अब तो महिलाएं भी गांव छोड़कर अपने पतियों के साथ काम की तलाश में शहरों की ओर प्रस्थान कर रही हैं। महिलाएं अपने पतियों के साथ ही निर्माण स्थलों पर काम करती हैं। घर का खर्चा चल सके इसके लिए वह गर्भवती अवस्था में भी काम करना नहीं छोड़तीं, वह 7वें और 8वें महीने में भी काम करती हैं। जब उनके प्रसव का समय आता है तभी वह गांव लौटती हैं। वहीं बच्चे जैसे ही थोड़े बड़े होते हैं तो उन्हें गांव में अन्य परिवारजनों के पास छोड़ दिया जाता है।
पूर्ण सुविधा ना होने से खोए 4 बच्चे
गांव की ही एक महिला सोमवती (32) हाल ही में अजमेर से गांव लौटी है। उसका कहना है कि वह भी अपने पति के साथ निर्माणाधीन स्थानों पर काम करती थी लेकिन वह गर्भवती है और उसका सातवां महीना चल रहा है जिस कारण वह गांव आई है। वह अपने 9वें बच्चे को जन्म देने वाली है। पूर्ण सुविधा ना होने के कारण वह आठ में से चार बच्चों को खो चुकी है।