फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Khandwa News ›   Khandwa lok sabha election result 2024 Gyaneshwar patil vs Narendra Patel mp chunav result news in hindi

MP Khandwa LS Election 2024: मतगणना की तैयारी पूरी, अब 4 जून को सामने आएगा किसके हाथ लगेगी सत्ता की चाबी

Fri, 31 May 2024 05:53 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, खंडवा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, खंडवा Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 31 May 2024 05:53 PM IST
सार

कांग्रेस ने महिलाओं को एक लाख रुपये सालाना और आरक्षण के मुद्दे को भी लोगों के बीच बखूबी पहुंचाया है, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी ने और राम मंदिर, और मुस्लिम आरक्षण खत्म किए जाने की बात पर बल दिया है। हालांकि अब देखना होगा कि यह सभी मुद्दे चुनाव के परिणाम पर क्या असर डालते हैं।
 

विज्ञापन
Khandwa lok sabha election result 2024 Gyaneshwar patil vs Narendra Patel mp chunav result news in hindi
खंडवा लोकसभा चुनाव में दोनोें दलों को अपनी जीत की उम्मीद है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव का अंतिम चरण भी गुजरने वाला है। इसी के साथ सभी को अगली चार तारीख को आने वाले नतीजों का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन इस बीच लोगों के मन में कई सवाल भी हैं, और उन्हीं सवालों को सुलझाने की कोशिश हम कर रहे हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि देशभर में लोकसभा चुनाव को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला है। हालांकि इस बार मतदान का प्रतिशत कुछ कम जरूर रहा है, लेकिन अब मंगलवार को आने वाले नतीजे ही बताएंगे कि अगले पांच सालों के लिए देश की सत्ता की चाबी किसके हाथों में रहने वाली है।
विज्ञापन


खंडवा में कांग्रेस और भाजपा के बीच था मुकाबला
बात करें मध्य प्रदेश की तो यहां की 29 लोकसभा सीटों पर पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक चुनाव हो गया था। निमाड़ क्षेत्र की खंडवा लोकसभा सीट की बात करें तो खंडवा लोकसभा सीट लंबे समय से भाजपा के कब्जे में ही रही है। इस बार यानी, 2024 में खंडवा लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा। यहां भारतीय जनता पार्टी की ओर से वर्तमान सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को ही टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा गया था, तो वहीं कांग्रेस की ओर से एक नया नाम सामने आया था। कांग्रेस ने बड़वाह विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बावजूद एक बार फिर से नरेंद्र पटेल को ही लोकसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया था। 
विज्ञापन


क्या कम मतदान बनेगा कांग्रेस के लिए सत्ता परिवर्तन का सहारा
2024 के लोकसभा चुनाव में इस बार पूरे देश में एक बात सामान्य रूप से देखने को मिली है, हालांकि यह बात इतनी भी सामान्य न होकर बड़ी गंभीर है कि लगभग पूरे देश में अधिकतर स्थानों पर लोकसभा चुनाव के मतदान का प्रतिशत कुछ कम रहा है। खंडवा लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 70.93 था, तो वहीं 2019 में वोटिंग का प्रतिशत बढ़कर 76.90 हो गया था, लेकिन इस बार यानी 2024 में लोकसभा इलेक्शन में मतदान का प्रतिशत एक बार फिर घटकर 70.72% पर आ गया। इस बार यह देखने वाली बात होगी कि कम मतदान होने के बावजूद भी क्या कांग्रेस भाजपा से सत्ता छीनने में कामयाब हो पाती है, या भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से निमाड़ की इस सबसे चर्चित सीट पर अपना परचम लहराएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन मुद्दों पर लड़ा गया लोकसभा का चुनाव
लोकसभा चुनाव में मुद्दों को लेकर देखा जाए तो पूरे देश में राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे ही ज्यादा छाए रहे, वहीं इन मुद्दों में राम मंदिर, धारा 370, तीन तलाक जैसे कई मुद्दे देखने को मिले। इधर कांग्रेस और भाजपा के बीच की आपसी बयानबाजी भी चुनावी मुद्दों के रूप में सामने आई है। हालांकि लोकल स्तर पर भी लोगों ने मुद्दों को उठाया है तो वहीं आमजन ने रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य, अच्छी शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी के मुद्दों को भी सामने रखकर वोट दिया है। हालांकि इन सब पर राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहे हैं, फिर भी लोकसभा क्षेत्र के लोगों ने अपने मुद्दों को मुक्त रूप से सामने रखा है। दोनों ही प्रमुख दलों ने जिस तरह से चुनाव को लड़ा है उन्होंने अपने-अपने मेनिफेस्टो पर काफी बल दिया है। कांग्रेस ने महिलाओं को एक लाख रुपये सालाना और आरक्षण के मुद्दे को भी लोगों के बीच बखूबी पहुंचाया है, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी ने और राम मंदिर, और मुस्लिम आरक्षण खत्म किए जाने की बात पर बल दिया है। हालांकि अब देखना होगा कि यह सभी मुद्दे चुनाव के परिणाम पर क्या असर डालते हैं।

इस तरह रहेगी खंडवा में मतगणना की व्यवस्था
खंडवा में लोकसभा चुनाव की मतगणना को लेकर खंडवा कलेक्टर ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में शुक्रवार दोपहर हुई प्रेस वार्ता के माध्यम से 4 जून को होने वाली मतगणना की तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। जिला कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने बताया कि खंडवा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आठ विधानसभा हैं, जिसमें खंडवा के अलावा बुरहानपुर, देवास और खरगोन जिले की विधानसभा भी शामिल हैं। इन सभी जिलों के विधानसभाओं द्वारा मतगणना अपडेट को खंडवा आरओ को बताया जाएगा। इसके बाद खंडवा आरओ हर राउंड की विजयी प्रत्याशियों की घोषणा करेंगे। यहां पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे से इसकी निगरानी की जा रही है, और स्ट्रांग रूम से मतगणना केंद्र तक सीसीटीवी लगे हुए हैं। मतगणना की शुरुआत 4 जून को सुबह 7 बजे से शुरू होगी। सुबह 7 बजे सबसे पहले ऑब्जर्वर और उम्मीदवार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्ट्रांग रूम से ईवीएम मशीन निकालकर लाएंगे और अलग-अलग काउंटिंग टेबल पर रखेंगे। काउंटिंग हॉल के अंदर हर टेबल पर काउंटिंग असिस्टेंट, काउंटिंग सुपरवाइजर होंगे। इसके अलावा माइक्रो ऑब्जर्वर भी मौजूद होंगे। काउंटिंग हॉल में लगाई गई बैरिकेडिंग के बाहर उम्मीदवारों के एजेंट होंगे। ईवीएम की सील खोले जाने के पहले एजेंटों को उसका नंबर बताया जाएगा। इससे पता चलेगा कि कौन-सी मशीन किस बूथ की है। इसके बाद ईवीएम को ऑन किया जाएगा, जिससे पता चलेगा कि कुल मत कितने थे और किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले। इसे एजेंटों को नोट कराया जाएगा।

यह है खंडवा लोकसभा सीट का इतिहास
खंडवा लोकसभा सीट पर लोकसभा चुनाव की शुरुआत यानी सन 1952 से लेकर सन 1971 तक कांग्रेस ने एक तरफा राज किया है, लेकिन इसके बाद साल 1977 से लेकर 1979 तक जनता पार्टी ने यहां पर अपना कब्जा जमाया है। बता दें कि साल 1979 में भारतीय जनता पार्टी के फाउंडर मेंबर कुशाभाऊ ठाकरे भी खंडवा लोकसभा सीट से अपना चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि 1980 में कांग्रेस ने एक बार फिर अपना खोया हुआ मुकाम हासिल किया था। साल 1980 में ठाकुर शिवकुमार सिंह खंडवा के सांसद बने, तो वहीं साल 1984 में कालीचरण शकरगए ने दोबारा कांग्रेस को यहां जीत दिलाई। 1990 में भारतीय जनता पार्टी ने खंडवा में फिर से अपना खाता खोल दिया और अमृतलाल तारवाला खंडवा के सांसद बने। हालांकि वे भी अगले ही लोकसभा चुनाव यानी 1991 में ठाकुर महेंद्र कुमार सिंह से चुनाव हार गए। 


इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के सीनियर लीडर और मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे नंदकुमार सिंह चौहान ने 1996 में एक बार फिर भाजपा का झंडा गाड़ा। इसके बाद उनकी यह पारी साल 2004 तक सतत जारी रही। हालांकि 2009 में कांग्रेस के सीनियर लीडर और मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहे सुभाष यादव के पुत्र अरुण यादव ने नंदकुमार सिंह चौहान को शिकस्त दे दी, लेकिन यह शिकस्त ज्यादा लंबी नहीं रही, और साल 2014 में एक बार फिर नंद कुमार सिंह चौहान ने खंडवा संसदीय सीट पर अपना कब्जा जमाया। साल 2019 में कोरोना महामारी के चलते नंदकुमार सिंह चौहान का निधन हो गया। इसके बाद हुए उपचुनाव 2021 में ज्ञानेश्वर पाटिल को भारतीय जनता पार्टी ने टिकट दिया। ज्ञानेश्वर पाटिल ने कांग्रेस के पूर्व विधायक राज नारायण सिंह पुरनी को करीब 80 हजार से अधिक वोटों से हराकर भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम रखा। इसी दबदबे को कायम रखने के लिए एक बार फिर से यानी 2024 के चुनाव में ज्ञानेश्वर पाटिल पर भारतीय जनता पार्टी ने भरोसा जताया और उन्हें पुनः टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार दिया। अब देखना यह है कि आने वाली चार तारीख को जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आएंगे, तो यह बात पता चलेगी कि भाजपा अपना दबदबा कायम रख पाती है या कांग्रेस अपनी खोई प्रतिष्ठा को वापस हासिल करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed