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Khandwa: ओंकारेश्वर सौर परियोजना के मछुआरों की याचिका पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार को नोटिस जारी
Wed, 14 Feb 2024 06:19 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, खंडवा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, खंडवा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 14 Feb 2024 06:19 PM IST
सार
खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध के जलाशय पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 600 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड कंपनी को दी गई है।
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जलाशय पर सोलर प्लेट बिछाने का कार्य जारी है।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद राज्य सरकार और परियोजनाकर्ता कंपनी को बड़ा धक्का लगा है, तो वहीं इससे मछुआरा समाज बड़ा ही उत्साहित नजर आ रहा है। दरअसल प्रदेश के खंडवा जिले में फ्लोटिंग सोलर पैनल के रूप में आकर ले रही ओंकारेश्वर सौर ऊर्जा परियोजना से प्रभावित हो रहे मछुआरों ने अपनी आजीविका और पुनर्वास संबंधी मामलों को लेकर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसको लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार सहित परियोजनकर्ता रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। बता दें कि न्यायाधीश मनिंदर सिंह भाटी के दिए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि इस परियोजना के तहत सोलर प्लेट लगाने का कार्य याचिका के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
बता दें कि खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध के जलाशय पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 600 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड कंपनी को दी गई है। इसी परियोजना के तहत ओंकारेश्वर जलाशय पर सोलर प्लेट्स बिछाई जा रही हैं। लेकिन इसके चलते जलाशय में मत्स्याखेट कर जीवन यापन कर रहे मछुआरों की जीविका समाप्त हो रही है। बावजूद इसके राज्य सरकार द्वारा अब तक इन मछुआरों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण मछुआरा समितियों ने उच्च न्यायालय जबलपुर में अपने अधिकारों के लिए याचिका दायर की है।
यह याचिका लगाई है मछुआरा समितियों ने
ओंकारेश्वर सौर ऊर्जा परियोजना से प्रभावित मछुआरों की मां सातमाता सैलानी मत्स्योद्योग सहकारी समिति एवं मां काजलरानी विस्थापित आदिवासी मछुआरा सहकारी समिति द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि ओंकारेश्वर जलाशय पर सोलर प्लेट्स बिछाने के कारण उनके सदस्य मछुआरे परिवारों की एकमात्र आजीविका ख़त्म हो रही है। परियोजनाकर्ता द्वारा ओंकारेश्वर सोर ऊर्जा परियोजना के लिए तैयार की गई पर्यावरणीय एवं सामाजिक समाघात आकलन रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि परियोजना बनने से सैकड़ों मछुआरों की आजीविका समाप्त हो जाएगी। इन सभी परिवारों की आजीविका फिर से स्थापित करने के लिए परियोजना में स्थाई नौकरी और आर्थिक सहायता दी जाएगी। परंतु इस विषय में मछुआरों से आज तक कोई बात नहीं की गई है, जबकि जलाशय पर सोलर प्लेट बिछाने का कार्य जारी है। इससे मछुआरों का मछली मारना लगभग असंभव सा हो गया है। याचिका में मांग की गई है कि प्रभावित मछुआरों को परियोजना में स्थाई नौकरी दी जाए और भू-अर्जन क़ानून 2013 के अनुसार पुनर्वास के लाभ दिये जाएं। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक सभी मछुआरों को ये लाभ नहीं मिल जाते तब तक उनके क्षेत्र में सोलर प्लेट लगाने का कार्य स्थगित किया जाए।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह दिए आदेश
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने बताया कि ओंकारेश्वर सौर ऊर्जा परियोजना मामले में हाईकोर्ट के आदेश अनुसार इस परियोजना में जो सोलर प्लेट बिछाई जा रही हैं उसके कारण सैकड़ों मछुआरों की जीविका प्रभावित हो रही है। वह मछली नहीं पकड़ पा रहे हैं और उनकी एकमात्र जीविका जो कि मछली मारने की है वह पूरी तरह से खत्म हो रही है। परियोजना कर्ता और राज्य सरकार ने जो अध्ययन कराया है उसमें साफ है कि मछुआरों को परमानेंट नौकरी दी जाना है और इनका पुनर्वास भी कराया जाना है।
आदेश करेगा मछुआरों की जीविका निर्धारित
आलोक अग्रवाल के अनुसार अब तक उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने पर मछुआरा समितियों द्वारा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी, और इसी याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परियोजनाकर्ता कंपनी रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड को तत्काल जवाब देने का आदेश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोलर परियोजना में जो भी सोलर प्लेट्स लगाई जा रही हैं उनकी कार्रवाई भी इस याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगी। इसलिए मछुआरों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आदेश है जो की उनके जीविका को निर्धारित करेगा।
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बता दें कि खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध के जलाशय पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 600 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड कंपनी को दी गई है। इसी परियोजना के तहत ओंकारेश्वर जलाशय पर सोलर प्लेट्स बिछाई जा रही हैं। लेकिन इसके चलते जलाशय में मत्स्याखेट कर जीवन यापन कर रहे मछुआरों की जीविका समाप्त हो रही है। बावजूद इसके राज्य सरकार द्वारा अब तक इन मछुआरों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण मछुआरा समितियों ने उच्च न्यायालय जबलपुर में अपने अधिकारों के लिए याचिका दायर की है।
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यह याचिका लगाई है मछुआरा समितियों ने
ओंकारेश्वर सौर ऊर्जा परियोजना से प्रभावित मछुआरों की मां सातमाता सैलानी मत्स्योद्योग सहकारी समिति एवं मां काजलरानी विस्थापित आदिवासी मछुआरा सहकारी समिति द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि ओंकारेश्वर जलाशय पर सोलर प्लेट्स बिछाने के कारण उनके सदस्य मछुआरे परिवारों की एकमात्र आजीविका ख़त्म हो रही है। परियोजनाकर्ता द्वारा ओंकारेश्वर सोर ऊर्जा परियोजना के लिए तैयार की गई पर्यावरणीय एवं सामाजिक समाघात आकलन रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि परियोजना बनने से सैकड़ों मछुआरों की आजीविका समाप्त हो जाएगी। इन सभी परिवारों की आजीविका फिर से स्थापित करने के लिए परियोजना में स्थाई नौकरी और आर्थिक सहायता दी जाएगी। परंतु इस विषय में मछुआरों से आज तक कोई बात नहीं की गई है, जबकि जलाशय पर सोलर प्लेट बिछाने का कार्य जारी है। इससे मछुआरों का मछली मारना लगभग असंभव सा हो गया है। याचिका में मांग की गई है कि प्रभावित मछुआरों को परियोजना में स्थाई नौकरी दी जाए और भू-अर्जन क़ानून 2013 के अनुसार पुनर्वास के लाभ दिये जाएं। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक सभी मछुआरों को ये लाभ नहीं मिल जाते तब तक उनके क्षेत्र में सोलर प्लेट लगाने का कार्य स्थगित किया जाए।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह दिए आदेश
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने बताया कि ओंकारेश्वर सौर ऊर्जा परियोजना मामले में हाईकोर्ट के आदेश अनुसार इस परियोजना में जो सोलर प्लेट बिछाई जा रही हैं उसके कारण सैकड़ों मछुआरों की जीविका प्रभावित हो रही है। वह मछली नहीं पकड़ पा रहे हैं और उनकी एकमात्र जीविका जो कि मछली मारने की है वह पूरी तरह से खत्म हो रही है। परियोजना कर्ता और राज्य सरकार ने जो अध्ययन कराया है उसमें साफ है कि मछुआरों को परमानेंट नौकरी दी जाना है और इनका पुनर्वास भी कराया जाना है।
आदेश करेगा मछुआरों की जीविका निर्धारित
आलोक अग्रवाल के अनुसार अब तक उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने पर मछुआरा समितियों द्वारा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी, और इसी याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परियोजनाकर्ता कंपनी रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड को तत्काल जवाब देने का आदेश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोलर परियोजना में जो भी सोलर प्लेट्स लगाई जा रही हैं उनकी कार्रवाई भी इस याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगी। इसलिए मछुआरों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आदेश है जो की उनके जीविका को निर्धारित करेगा।
