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Jabalpur News: CBI की जांच में अयोग्य पाए गए नर्सिंग कॉलेज को किन अफसरों ने दी थी मान्यता, कोर्ट ने मांगी सूची

Thu, 27 Feb 2025 09:41 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 27 Feb 2025 09:41 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को अनुमति देने वाले अधिकारियों की सूची पेश करने का आदेश दिया है, ताकि उन पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय हो सके। सीसीटीवी फुटेज रिकवरी में देरी पर नाराजगी जताते हुए प्रयोगशाला निदेशक को अगली सुनवाई में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।

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Which officers had given recognition to the nursing college found ineligible in the CBI investigation?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस ए.के. पालीवाल की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को अनुमति देने वाले तत्कालीन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत की जाए, ताकि उन पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सके। अदालत ने यह आदेश लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के संचालन को चुनौती दी गई थी।

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याचिका में आरोप लगाया गया था कि एमपीएनआरसी कार्यालय से 13 से 19 दिसंबर के बीच की सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो गई थी। इसके मद्देनजर, अदालत ने पुलिस आयुक्त भोपाल और साइबर सेल प्रभारी को डिलीटेड सीसीटीवी फुटेज की रिकवरी के प्रयास करने और तत्कालीन रजिस्ट्रार की फोन लोकेशन की जांच करने का आदेश दिया था, ताकि उनकी भौतिक उपस्थिति की पुष्टि हो सके। साथ ही, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच के निर्देश दिए गए थे।

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सोमवार को हुई सुनवाई में साइबर क्राइम भोपाल ने अदालत को सूचित किया कि डिलीटेड फुटेज को पुनः प्राप्त करने के लिए सामग्री केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, बरखेड़ा बोदर, भोपाल को दी गई है। हालांकि, प्रयोगशाला के निदेशक ने लिखित में सूचित किया कि जांच की समाप्ति की कोई निश्चित तिथि नहीं है। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि निदेशक का रवैया अत्यंत लापरवाहीपूर्ण है और उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

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इसके अलावा, सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा अयोग्य घोषित किए गए कॉलेजों को 2018 से मान्यता देने वाले अधिकारियों की सूची भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की। 

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