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जबलपुर: हिजाब और धार्मिक प्रथाओं के आरोपों पर हाईकोर्ट का फैसला, एफआईआर रद्द करने से किया इनकार, याचिका खारिज
Fri, 11 Sep 2026 02:40 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 02:40 PM IST
सार
दमोह के एक स्कूल में हिजाब और धार्मिक प्रथाएं लागू करने के आरोपों पर दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग ठुकराते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों को पहली नजर में निराधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस संबंध में लगाई गई याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
विस्तार
दमोह स्थित गंगा-जमुना स्कूल में छात्राओं को कथित तौर पर अनिवार्य रूप से हिजाब पहनाने और धार्मिक प्रथाएं लागू करने के मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग वाली याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। स्कूल के दो पूर्व पदाधिकारियों, एक शिक्षक और एक चपरासी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने यह आदेश दिया।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर में छात्रों से कथित तौर पर एक खास ड्रेस कोड और धार्मिक प्रथाओं का पालन कराए जाने का स्पष्ट उल्लेख है। यह भी आरोप है कि इन प्रथाओं को छात्रों की इच्छा के विपरीत धमकी या दबाव के जरिए लागू किया गया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप पहली नजर में निराधार नहीं कहे जा सकते। आरोपों की सच्चाई का फैसला साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
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गौरतलब है कि गंगा-जमुना हायर सेकंडरी स्कूल के एक पोस्टर में हिंदू छात्राओं को हिजाब पहने दिखाए जाने के बाद मामला सामने आया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश दिए थे। छात्राओं की शिकायतों के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने जांच के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी की जांच के बाद पुलिस ने 7 जून 2023 को एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि स्कूल में हिजाब पहनना अनिवार्य किया गया है, जबकि तिलक और कलावा पहनने पर रोक थी। इसके अलावा उर्दू पढ़ने और नमाज अदा करने को भी अनिवार्य किए जाने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत में इन धार्मिक प्रथाओं को धमकी और दबाव के जरिए लागू किए जाने की बात कही गई थी।
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पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295-A, 120-B और 506 के साथ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट तथा मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत भी मामला दर्ज किया था। एफआईआर निरस्त करने की मांग को लेकर स्कूल के पूर्व पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार जैन और अब्दुल वसीम बारी, शिक्षक अनास अतहर तथा चपरासी रुस्तम अली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
सरकार की ओर से याचिकाओं का विरोध करते हुए अदालत को बताया गया कि स्कूल में हिजाब पहनना अनिवार्य करने, तिलक और कलावा पहनने पर रोक लगाने तथा उर्दू और नमाज को अनिवार्य करने के आरोप हैं। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मामले में संबंधित न्यायालय के समक्ष चार्जशीट दायर की जा चुकी है। सभी पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने याचिकाओं को खारिज कर दिया और एफआईआर निरस्त करने से इंकार कर दिया।
