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Jabalpur News: एफएसएल रिपोर्ट बनी राहत का आधार, हिरण शिकार आरोपी को एमपी हाईकोर्ट से मिली बेल

Thu, 11 Jun 2026 10:06 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 11 Jun 2026 10:06 PM IST
सार

चित्तीदार हिरण के शिकार और मांस पकाने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई। अदालत ने एफएसएल रिपोर्ट में मांस की पहचान स्पष्ट नहीं होने और प्रत्यक्ष साक्ष्य के अभाव को ध्यान में रखते हुए राहत प्रदान की।

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The FSL is unable to determine which animal the cooked meat belongs to
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फाइल फोटो।

विस्तार

चित्तीदार हिरण का शिकार कर उसका मांस पकाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया था। आवेदन की ओर से तर्क दिया गया कि एफएसएल यह बताने में असमर्थ है कि उक्त पका हुआ मांस किस जानवर का है। हाईकोर्ट के जस्टिस आर.सी. वाणी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदक को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान किया है।

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आवेदक प्रतिम भूमिका की ओर से दायर आवेदन में कहा गया था कि उसके खिलाफ पुलिस स्टेशन फॉरेस्ट सर्कल विजय राघवगढ़, जिला कटनी में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं 2, 9, 39, 51 और 52 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने चित्तीदार हिरण (चीतल) का शिकार किया और उसका मांस पका रहा था। पुलिस ने पका हुआ मांस जब्त कर जांच के लिए एफएसएल को भेजा था। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, वह यह बताने में असमर्थ है कि पका हुआ मांस किस जानवर का है।

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जमानत आवेदन में कहा गया था कि आवेदक 1 मार्च 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में है। पुलिस ने प्रकरण में चार्जशीट भी न्यायालय में पेश कर दी है। इसके अलावा घटना का कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं है। प्रकरण में आवेदक के खिलाफ उसे दोषी ठहराने के लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।


वह न्यायालय द्वारा लगाई जाने वाली सभी जमानत शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है। सरकार की ओर से जमानत आवेदन का विरोध करते हुए उसे खारिज करने की प्रार्थना की गई। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदक को जमानत का लाभ प्रदान कर दिया।

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