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OBC Reservation: ओबीसी आरक्षण मामले में सॉलिसिटर जनरल रखेंगे पक्ष, हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 13 फरवरी को
Mon, 23 Jan 2023 08:31 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 23 Jan 2023 08:31 PM IST
सार
ईडब्ल्यूएस आरक्षण तथा प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ व पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
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- फोटो : Social Media
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विस्तार
मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के संबंध में दायर 63 याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। सोमवार को भी जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंद्र सिंह युगलपीठ द्वारा सुनवाई की गई। युगलपीठ को बताया गया कि प्रकरण में सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल पक्ष रखेगे। युगलपीठ ने याचिकाओं पर अगली सुनवाई 13 फरवरी को निर्धारित की है।
गौरतलब है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण तथा प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ व पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान ओबीसी आरक्षण के समर्थन में युगलपीठ को बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई है। विपक्ष में दायर याचिकाओं में कहा गया है ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने से आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण को उचित करार दिया है। इसके कारण आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। हाईकोर्ट ने कई भर्तियों में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत लागू करने पर स्थगन आदेश पारित किया है। इसके कारण पीएससी, शिक्षकों सहित अन्य भर्तियां रुकी हुई हैं।
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याचिकाओं पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पक्ष रखना है। उनकी अनुपस्थिति के कारण सरकार ने याचिका पर सुनवाई बढ़ाने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किए गाए। याचिकाकर्ताओं की तरफ से आदित्य संघी तथा शासन की तरफ से विशेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह उपस्थित हुए।
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गौरतलब है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण तथा प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ व पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान ओबीसी आरक्षण के समर्थन में युगलपीठ को बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई है। विपक्ष में दायर याचिकाओं में कहा गया है ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने से आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण को उचित करार दिया है। इसके कारण आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। हाईकोर्ट ने कई भर्तियों में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत लागू करने पर स्थगन आदेश पारित किया है। इसके कारण पीएससी, शिक्षकों सहित अन्य भर्तियां रुकी हुई हैं।
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याचिकाओं पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पक्ष रखना है। उनकी अनुपस्थिति के कारण सरकार ने याचिका पर सुनवाई बढ़ाने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किए गाए। याचिकाकर्ताओं की तरफ से आदित्य संघी तथा शासन की तरफ से विशेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह उपस्थित हुए।
