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Kangana Ranaut: फिल्म अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत को एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत, जानें क्या था मामला

Thu, 08 May 2025 04:34 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 08 May 2025 04:34 PM IST
सार

‘आजादी नहीं भीख थी’ बयान मामले में अभिनेत्री व सांसद कंगना रनौत को एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत मिली। कोर्ट ने कहा, हर व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से विचार रखने का अधिकार है। बयान व्यक्तिगत विचार है, मानहानि नहीं। अधिवक्ता अमित साहू की याचिका खारिज कर दी गई।

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Relief to film actress and BJP MP Kangana Ranaut
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

फिल्म अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत को 'आजादी नहीं भीख थी' वाले विवादित बयान के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत मिली है। एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय के न्यायाधीश डीपी सूत्रकार ने सुनवाई के बाद दायर परिवाद को खारिज कर दिया है। विशेष न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि हर व्यक्ति को ये अधिकार है कि वह अपने आप को कब आजाद माने। कोई व्यक्ति वर्ष 1947 से अंग्रेजों की आजादी के बाद भी स्वयं को गुलाम महसूस करता है तो वह उसके व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं। उसकी व्यक्तिगत विचार तब तक मानहानि नहीं है जब तक वह किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न करे।

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बता दें कि फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने साल 2021 में दिये गए बयान में कहा था कि 1947 में भारत को मिली आजादी, आजादी नहीं भीख थी। असली आजादी तो 2014 में मिली है। विवादित बयान के खिलाफ अधिवक्ता अमित साहू की तरफ से न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। परिवाद में कहा गया था कि फिल्म अभिनेत्री का बयान देश के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले अमर सेनानियों का अपमान है। उनके इस बयान से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों के साथ हर भारतीय को ठेस भी पहुंची है। देश को आजादी लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद साल 1947 में आजादी मिली थी। परिवाद में फिल्म अभिनेत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की राहत चाही गई थी।
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परिवाद की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कंगना रनौत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के सांसद बनने के कारण प्रकरण को एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश के साथ परिवाद को निरस्त कर दिया।

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