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Jabalpur News: पति की हत्या के मामले में पत्नी दोषमुक्त, कोर्ट ने कहा- शक के आधार पर नहीं कर सकते सजा से दंडित

Sun, 19 Jul 2026 10:10 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sun, 19 Jul 2026 10:10 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल की महिला को पति की हत्या के मामले में दोषमुक्त करते हुए आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर दोषसिद्धि नहीं हो सकती। अभियोजन हत्या साबित नहीं कर सका और महत्वपूर्ण साक्ष्यों व गवाहों की जांच भी अधूरी रही। 

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Punishment cannot be imposed based on suspicion
हाईकोर्ट ने बदला निचली अदालत का फैसला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल निवासी एक महिला को पति की हत्या के मामले में बड़ी राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा निरस्त कर दी। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने स्पष्ट कहा कि केवल मजबूत संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराकर सजा नहीं दी जा सकती। अभियोजन को संदेह से परे अपराध साबित करना आवश्यक है। यह आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने भोपाल निवासी सुशीला उर्फ सुधा गवाहड़ की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान दिया।
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प्रकरण के अनुसार, दिसंबर 2018 में महिला के पति दिनेश की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या की आशंका जताए जाने के बाद पुलिस ने पत्नी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर महिला को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष महिला के खिलाफ हत्या के आरोप को ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्यों से सिद्ध नहीं कर पाया। मामले के प्रमुख गवाह भी ट्रायल के दौरान अपने बयानों से मुकर गए थे। इसके बावजूद निचली अदालत ने केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि कर दी। रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि हत्या महिला ने ही की थी। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि मृतक शराब पीने का आदी था और अक्सर पत्नी के साथ विवाद एवं मारपीट करता था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच विवाद होने की बात गवाहों ने बताई थी।

युगलपीठ ने यह भी कहा कि घटना के समय घर में मौजूद दंपती के 14 वर्षीय बेटे से महत्वपूर्ण पूछताछ नहीं की गई, जबकि वह इस मामले का अहम गवाह हो सकता था। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के स्पष्ट निशान भी नहीं पाए गए। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने माना कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने में विफल रहा है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए महिला को हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
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