फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Submit full details regarding the diet of prisoners brought for court appearances

MP News: कैदियों के भोजन पर जेल डीजी का हलफनामा भ्रामक, हाईकोर्ट ने मांगी ऑडिट रिपोर्ट

Sun, 19 Jul 2026 07:53 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sun, 19 Jul 2026 07:53 PM IST
सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने जेल महानिदेशक के हलफनामे को भ्रामक बताते हुए नाराजगी जताई। कोर्ट ने कैदियों के भोजन, डाइट व्यवस्था और पेशी के दौरान भोजन खर्च की स्पष्ट जानकारी मांगी। साथ ही जेल व पुलिस विभाग से ऑडिट रिपोर्ट और अतिरिक्त हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए, अन्यथा व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश की चेतावनी दी।

विज्ञापन
Submit full details regarding the diet of prisoners brought for court appearances
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य के पुलिस महानिदेशक (जेल) द्वारा दाखिल हलफनामे को हाईकोर्ट ने गुमराह करने वाला करार दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें उम्मीद थी कि जेल महानिदेशक कैदियों के लिए नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के खाने के लिए तय डाइट के बारे में बताएंगे। हिरासत में मौजूद कैदी से कुछ भी कहलवाया जा सकता है।

विज्ञापन


रीवा जेल में निरुद्ध अब्दुल माजिद व अन्य ने हाईकोर्ट में दहेज हत्या के आरोप में सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा आरोपी को जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने आरोपी को लाने वाले पुलिस कर्मियों से पूछा कि उन्हें पेश किए जाने वाले कैदियों के खाने-पीने के खर्च के लिए पैसे दिए जाते हैं, तो उनकी तरफ से बताया गया कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिसकर्मी के तौर पर मिलने वाले दैनिक भत्ता से संबंधित कैदी को खाना खिलाते हैं। युगलपीठ ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जेल महानिदेशक में इस संबंध में गौर करने का अनुरोध किया था कि पेशी में जेल से लाए जाने वाले कैदी का डाइट अलाउंस उन्हें लाने वाले पुलिसकर्मियों को दिया जा सकता है। युगलपीठ ने जेल महानिदेशक को इस संबंध में हलफनामा पेश करने के निर्देश जारी किए थे। युगलपीठ ने आदेश की प्रति जेल महानिदेशक को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन


हलफनामे से संतुष्ट नहीं कोर्ट
जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर की तरफ से पेश किए गए हलफनामा में बताया गया कि रीवा जेल से रवाना करते समय अब्दुल मजीद को नाश्ते में चाय और चार रोटियां दी थीं। इस संबंध में उनके बयान भी दर्ज हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि वे पेश किए गए हलफनामा से संतुष्ट नहीं हैं। जेल प्रशासन की कस्टडी में किसी कैदी से कुछ भी कहलवाया जा सकता है। हमें उम्मीद थी कि जेल महानिदेशक जेल में कैदियों के लिए नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के खाने के लिए तय डाइट के बारे में बताएंगे। जेल के निजी दौरों के दौरान हमने देखा है कि आम तौर पर सुबह 11 बजे तक खाना तैयार नहीं होता है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि कैदियों का पूरा शेड्यूल और प्रत्येक कैदी के लिए तय भोजन की मात्रा की जानकारी संबंधित हलफनामा पेश किया जाए। नाश्ता, दोपहर का भोजन, रात का खाना और शाम की चाय परोसने का समय भी रिकॉर्ड पर लाया जाए। जेल महानिदेशक की बात मान लें तो उन्हें रीवा जेल से निकलने के समय और जबलपुर जेल में दाखिल होने के समय की कॉपी साथ लगानी चाहिए। रीवा जेल से निकलने से पहले सुबह चार रोटियां खाई हैं तो क्या वह दोपहर और रात का खाना पाने का हकदार था या नहीं। जबलपुर और रीवा के बीच की दूरी लगभग 230 किमी है और उसे देर रात जेल में वापस भेजा गया होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- दतिया में कांग्रेस मंच से भाजपा प्रत्याशी ने मांग डाले वोट, जानिए क्या है पूरा मामला


कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश
जेल महानिदेशक ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है, जिसे हम स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। ऐसा कोई डेटा नहीं है जिससे पता चले कि नाश्ते, दोपहर के खाने, शाम की चाय (यदि कोई हो) और रात के खाने के लिए क्या मेन्यू अपनाया जाता है। जेल महानिदेशक ने यह भी नहीं बताया कि नाश्ते का प्रावधान है, तो क्या कैदी को दोपहर का खाना नहीं दिया जाना चाहिए या दोपहर के खाने का भी प्रावधान है। दोपहर के खाने का प्रावधान है, तो खाने के लिए आवंटित पैसा कहां जाता है, खाना उपलब्ध कराने के लिए इसे संबंधित पुलिस अधिकारियों तक कैसे पहुंचाया जाता है। हलफनामे में इस बात का उल्लेख किया गया है कि मध्य प्रदेश कैदी (अदालतों में उपस्थिति) नियम, 1958 के नियम 6 के अनुसार कैदियों का खर्च पुलिस विभाग द्वारा वहन किया जाना है। इस बात पर विश्वास किया जाए, तो जेल महानिदेशक को उन सभी जेलों का ऑडिट करना चाहिए कि जिस खास दिन किसी कैदी को कोर्ट लाया जाता है तो संबंधित जेल के अधीक्षक द्वारा उसके डाइट की राशि राज्य सरकार को वापस (सरेंडर) की गई है।

अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें
जेल महानिदेशक द्वारा उन सभी कैदियों के संबंध में पूरा ऑडिट रिपोर्ट दाखिल की जाए, जिन्हें कोर्ट ले जाया जाता है। संबंधित जेल अधीक्षकों द्वारा आनुपातिक भोजन राशि वापस (सरेंडर) की गई थी। पुलिस महानिदेशक से भी अनुरोध है कि जेल महानिदेशक के हलफनामे को ध्यान में रखते हुए एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि यदि पुलिस को किसी कैदी के खाने और अन्य मदों का खर्च उठाना पड़ता है, कैदी को अदालत लाने वाले गार्डों को वह राशि देने का क्या प्रावधान है। राज्य सरकार से अनुरोध है कि वह एक ऐसी पॉलिसी बनाए जिसके उस संबंधित हेड गार्ड को राशि का ई-ट्रांसफर किया जा सके। हेड गार्ड उस राशि का उपयोग कैदी के खाने के लिए कर सके। यह व्यवस्था पहले से ही की जानी चाहिए ताकि किसी अधिकारी या कर्मचारी के ईमानदार होने की धारणा बनी रहे और उन्हें अनावश्यक रूप से अपनी जेब से भुगतान न करना पड़े। जेल महानिदेशक और पुलिस महानिदेशक, द्वारा विभिन्न मदों के तहत ऊपर बताई गई सभी जानकारियों के साथ उचित हलफनामे दाखिल करे। ऐसा न करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश जारी किए जाएंगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed