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MP: 'सबूत नहीं, सिर्फ कहानी थी',हाईकोर्ट ने पलटा हत्या केस का फैसला, दिया आरोपी के पुनर्वास का ऐतिहासिक आदेश

Mon, 20 Jul 2026 02:46 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Mon, 20 Jul 2026 02:46 PM IST
सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कटनी निवासी डब्बू उर्फ देव सोनखरे की आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी। कोर्ट ने पाया कि आरोपी को दुर्भावनापूर्ण और बेहद खराब पुलिस जांच के आधार पर फंसाया गया था।

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Order to the state government for rehabilitation, while setting aside the sentence of life imprisonment
हाईकोर्ट ने उम्रकैद रद्द कर राज्य सरकार को दिए पुनर्वास के आदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जबलपुर हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि आरोपी को दुर्भावनापूर्ण और बेहद खराब जांच के आधार पर फंसाया गया था। युगलपीठ ने न सिर्फ आरोपी को दोषमुक्त किया, बल्कि राज्य सरकार को उसके पुनर्वास की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि गलत जांच और सबूतों के गलत मूल्यांकन के कारण आरोपी को सजा हुई, इसलिए अब उसे सम्मानपूर्वक सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।

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छह महीने का प्रशिक्षण और मानदेय देने के निर्देश

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जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अपीलकर्ता के लिए अपने खर्च पर कम से कम छह महीने का व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाए। प्रशिक्षण उसकी रुचि के अनुसार दिया जाए और इस अवधि में उसे मानदेय भी दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य का दायित्व है कि बरी होने के बाद अपीलकर्ता के पुनर्वास के लिए उचित अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

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कलेक्टर और एसपी को भी दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अपीलकर्ता तक पहुंचाया जाए। साथ ही अगले दो वर्षों तक प्रत्येक तीन महीने में उसके पुनर्वास की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट के निर्देशानुसार प्रस्तुत की जाए।

कटनी निवासी ने उम्रकैद के खिलाफ दायर की थी अपील

कटनी निवासी डब्बू उर्फ देव सोनखरे ने हत्या के मामले में मिली आजीवन कारावास की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपील में कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित हुए बिना ही उन्हें दोषी ठहरा दिया। अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि अभियोजन ने केवल मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर हत्या का मकसद साबित करने की कोशिश की। आरोप था कि अपीलकर्ता की बहन और मृतक अर्जुन कोरी के बीच 10 से 16 अप्रैल के बीच 353 बार फोन कॉल और एसएमएस का आदान-प्रदान हुआ था। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने दोनों के बीच अवैध संबंध मानते हुए हत्या का मकसद निकाल लिया।

तार की बरामदगी को भी बनाया गया आधार

अभियोजन का दावा था कि मृतक के कंकाल से मिला एक तार, अपीलकर्ता के घर से बरामद तार से मेल खाता था। इसी को आरोपी की संलिप्तता का महत्वपूर्ण सबूत बताया गया। हालांकि अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि अर्जुन कोरी 16 नवंबर 2020 से लापता था और उसका कंकाल 5 अप्रैल 2021 को मिला। जबकि घर से सामान की कथित बरामदगी 19 अप्रैल 2021 को दिखाई गई। ऐसे में उन्हें मनमाने और गैरकानूनी तरीके से दोषी ठहराया गया।

कोर्ट ने जांच में पाई कई गंभीर खामियां

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि मामले का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। जिन दो गवाहों ने मृतक को आखिरी बार देखा था, उन्होंने केवल इतना बताया कि खदान के पानी में किसी के कूदने की आवाज आई थी। बाद में एक व्यक्ति तैरकर बाहर आया और बाउंड्री पर बैठ गया, जिसे उन्होंने अर्जुन कोरी के रूप में पहचाना। इसके बाद अर्जुन लापता हो गया और चार-पांच महीने बाद उसी खदान से एक मानव कंकाल मिला। कोर्ट ने कहा कि दोनों गवाहों ने कहीं भी यह नहीं कहा कि उन्होंने अपीलकर्ता को मृतक के साथ देखा था।

मोबाइल जब्त नहीं किए, प्रेम संबंध के भी सबूत नहीं मिले

युगलपीठ ने कहा कि पुलिस ने अपीलकर्ता की बहन और मृतक के मोबाइल फोन व सिम कार्ड तक जब्त नहीं किए। दोनों के बीच कथित प्रेम संबंध का कोई स्वतंत्र साक्ष्य भी पेश नहीं किया गया। केवल कॉल रिकॉर्ड के आधार पर हत्या का मकसद साबित नहीं किया जा सकता।

बिना सील के पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया तार

कोर्ट ने यह भी पाया कि कंकाल में बंधे तार की बरामदगी की प्रक्रिया भी सही नहीं थी। तार को अलग से जब्त करने का कोई पंचनामा नहीं बनाया गया। इतना ही नहीं, कांस्टेबल राहुल कोरी उसे बिना सील किए पोस्टमार्टम के लिए लेकर गए। युगलपीठ ने कहा कि यह पूरी जांच दुर्भावनापूर्ण और बेहद खराब तरीके से की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि अभियोजन ने किसी कारणवश आरोपी को फंसाने की कोशिश की।

हाईकोर्ट ने आरोपी को किया दोषमुक्त

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने डब्बू उर्फ देव सोनखरे को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को उसके पुनर्वास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, मानदेय और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के विस्तृत निर्देश भी जारी किए।

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