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MP News: आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार, जांच में दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं, हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट

Mon, 09 Jan 2023 04:58 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 09 Jan 2023 04:58 PM IST
सार

याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में पिछले पांच सालों में आजीविका मिशन के तहत हुए भ्रष्टाचार का खुलासा उनके द्वारा किया गया था। नियम विरुद्ध तरीके से साल 2017 में 29 जिलों में सूक्ष्म बीमा योजना के तहत महिलाओं के सेल्फ ग्रुप बनाकर बीमा के नाम पर 1 करोड़ 78 लाख रुपये की राशि एकत्र की गई थी। 

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No action against officers guilty of corruption in Livelihood Mission, High Court asks for report
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्र सरकार की आजीविका मिशन योजना में भ्रष्टाचार को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया था कि जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर करवाने की अनुशंसा की गई थी। एक साल से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंदर सिंह की युगलपीठ ने जांच रिपोर्ट को याचिका के साथ संलग्न करले के आदेश जारी किए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।
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याचिकाकर्ता भूपेन्द्र कुमार प्रजापति की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में पिछले पांच सालों में आजीविका मिशन के तहत हुए भ्रष्टाचार का खुलासा उनके द्वारा किया गया था। नियम विरुद्ध तरीके से साल 2017 में 29 जिलों में सूक्ष्म बीमा योजना के तहत महिलाओं के सेल्फ ग्रुप बनाकर बीमा के नाम पर 1 करोड़ 78 लाख रुपये की राशि एकत्र की गई थी। उक्त राशि बैंक में जमा नहीं की गई और किसी प्रकार का कोई बीमा नहीं करवाया गया। 
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प्रजापति ने बताया कि इसके अलावा योजना के तहत रोजगार के संसाधनों व मशीनों को निर्धारित से तीन गुने दाम में खरीदकर भ्रष्टाचार किया गया है। राज्य परियोजना प्रबंधक सुषमा रानी ने फर्जी नियुक्ति दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति पाई है। योजना के तहत की गई दो सौ से अधिक नियुक्तियां भी फर्जी तरीके से की गई हैं। जिसके बाद सीनियर आईएएस दिव्या मराव्या को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच में शिकायतों को सही पाते हुए उन्होंने लगभग एक साल पहले मिशन के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन वेलवाल, राज्य परियोजना प्रबंधक सुषमा रानी शुक्ला, सीनियर आईएएस प्रियंकादास एनआईआरडी हैदराबाद के संचालक सहित अन्य के खिलाफ अपराधिक धोखाधड़ी व जालसाजी के संबंध में अपराधिक प्रकरण दर्ज करवाने की अनुशंसा की गई थी।
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याचिका में कहा गया था कि इस संबंध में विधानसभा में भी प्रश्न उठाए गए थे। इसके बावजूद भी अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह पैरवी कर रहे हैं।
 
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