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MP News: वकील की आत्महत्या पर जमकर बवाल, शव लेकर हाईकोर्ट पहुंचे साथी, चीफ जस्टिस की कोर्ट में तोड़फोड़

Fri, 30 Sep 2022 05:30 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 30 Sep 2022 05:30 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट जबलपुर में शुक्रवार दोपहर हंगामा हो गया। साथी वकील की आत्महत्या से नाराज वकीलों चीफ जस्टिस की कोर्ट में तोड़फोड़ कर दी। सुरक्षा अधिकारी से हाथापाई भी की। वकील धरने पर बैठ गए। 

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MP News: Lawyers riot in Jabalpur High Court, sabotage in Chief Justice's court, scuffle with security officer
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अधिवक्ता द्वारा आत्महत्या किए जाने से आक्रोशित अधिवक्ता साथियों ने हाईकोर्ट परिसर में शव रखकर प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने स्टेट बार काउंसिल की बिल्डिंग स्थित एक वरिष्ठ अधिवक्ता के ऑफिस में आग लगा दी। आक्रोशित अधिवक्ताओं का आरोप है कि जमानत के प्रकरण में जस्टिस व वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा विपरीत टिप्णपी किए जाने के कारण साथी अधिवक्ता ने आत्महत्या की है। देश का संभवतया यह पहला मामला है कि विपरीत टिप्पणी के किसी अधिवक्ता ने आत्महत्या की है।
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गौरतलब है कि कटनी में पदस्थ टीआई संदीप अयाची के खिलाफ एक महिला आरक्षक की शिकायत पर महिला थाना जबलपुर ने दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज किया था। हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी के अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी थी। गिरफ्तारी के बाद थाना प्रभारी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया था। हाईकोर्ट जस्टिस ने आवेदन पर गुरुवार को सुनवाई की थी। एकलपीठ ने आवेदन पर शुक्रवार को पुन: सुनवाई निर्धारित की थी। आवेदक की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त तथा अधिवक्ता अनुराग साहू उपस्थित हुए थे। लंच के बाद अधिवक्ता अनुराग साहू ने अपने आधारताल स्थित घर पहुंचने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 
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घटना की जानकारी मिलने पर साथी अधिवक्ता उसके घर पहुंचे और शव लेकर हाईकोर्ट परिसर आ गए। आक्रोशित अधिवक्ता शव लेकर चीफ जस्टिस के कोर्ट तक पहुंच गए और मिलने के लिए हंगामा करने लगे। इस दौरान एक अधिवक्ता ने अपनी हाथ की नस काट ली थी। आक्रोशित अधिवक्ताओं का आरोप था कि सुनवाई के दौरान जज तथा वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त द्वारा विपरित टिप्पणी किए जाने के कारण अधिवक्ता अनुराग साहू ने आत्महत्या की है। घटना की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में पुलिस बल हाईकोर्ट परिसर में पहुंच गया था।
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MP News: Lawyers riot in Jabalpur High Court, sabotage in Chief Justice's court, scuffle with security officer
हाईकोर्ट में वकील ने जमकर हंगामा किया। - फोटो : सोशल मीडिया
पुलिस बल ने आक्रोशित अधिवक्ताओं को चीफ जस्टिस कोर्ट से हटाया तो वह परिसर में स्थित हनुमान मंदिर के सामने शव रखकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद उन्होंने राज्य अधिवक्ता परिषद के बिल्डिंग में स्थित वरिष्ठ अधिवकता मनीष दत्त के ऑफिस में आग लगा दी। इस दौरान उनकी पुलिस कर्मियों से झड़प भी हुई। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा।

शनिवार को नहीं होगा काम
अधिवक्ता द्वारा प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या किए जाने के मामले में स्टेट बार काउसिल ने शनिवार को पूरे प्रदेश में प्रतिवाद दिवस मनाते हुए अधिवक्ताओं से न्यायिक कार्य से विरत रहने का आव्हान किया है। राज्य अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष आर के सिंह सैनी ने बताया कि कुछ अधिवक्ताओं व अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर अधिवक्ता अनुराग साहू ने आत्महत्या की है। उन्होंने हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज की घटना का निंदा की है। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज में कई अधिवक्ताओं को चोट आई है। पुलिस बर्बरता पर उनके खिलाफ कार्रवाई के संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा। 

इधर पुलिस अधीक्षक सिध्दार्थ बहुगुणा ने बताया कि आक्रोशित अधिवक्ताओं ने आगजनी तथा पुलिस के साथ झूमाझटकी की। स्थिति को नियंत्रित करने पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित है।




सुप्रीम कोर्ट कई मर्तबा दे चुका है नसीहत
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार नहीं बल्कि कई बार हाईकोर्ट और निचली अदालतों के जजों को अनावश्यक टिप्पणियों से बचने की नसीहत दी है। पिछले साल कोरोना से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एल नागेश्वर राव, एस. रवींद्र भट की बेंच ने कहा था कि उच्च न्यायालयों के जजों को सुनवाई के दौरान अनावश्यक और बिना सोचे-समझे टिप्पणी करने से बचना चाहिए। क्योंकि वे जो कहते हैं, उनके काफी गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जजों को अपनी बात सोच-विचार करके ही कहनी चाहिए। जब हम उच्च न्यायालय के किसी फैसले की आलोचना कर रहे होते हैं, तब भी हम हमारे दिल में क्या है, यह नहीं कहते। संयम बरतते हैं। हम उम्मीद करेंगे कि इन मुद्दों से निपटने के लिए उच्च न्यायालयों को स्वतंत्रता दी गई है। दरअसल, कोरोना मामले में सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग सबसे अधिक जिम्मेदार है। उसके अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। इसी तरह से दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों पर सख्त टिप्पणियां की थीं।
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