{"_id":"651ff5b280319aea7a056f97","slug":"mp-news-high-court-caught-rigging-in-bpl-card-imposed-cost-of-ten-thousand-rupees-2023-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: हाईकोर्ट ने पकड़ी बीपीएल कार्ड में हेराफेरी, लगाई दस हजार रुपये की कॉस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: हाईकोर्ट ने पकड़ी बीपीएल कार्ड में हेराफेरी, लगाई दस हजार रुपये की कॉस्ट
Fri, 06 Oct 2023 05:25 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 06 Oct 2023 05:25 PM IST
सार
हाईकोर्ट में महिला द्वारा पेश किए गए बीपीएल कार्ड हेराफेरी कर बनाया गया था। तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने उसे नकली पाया। महिला पर दस हजार की कॉस्ट लगाई गई है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बीपीएल कार्ड में हेराफेरी का मामला पकड़ा है। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अलहुवालिया की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनावेदक महिला द्वारा पेश किए गए बीपीएल कार्ड मनगढ़ंत व हेराफेरी कर बनाया गया है। एकलपीठ ने अनावेदक महिला के अधिवक्ता के आग्रह पर एफआईआर दर्ज नहीं करते हुए दस हजार की कॉस्ट लगाकर अतिरिक्त आयुक्त के आदेश को खारिज कर दिया।
बता दें कि याचिकाकर्ता संध्या मरावी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसने डिंडौरी में समनापुर आंगनवाड़ी केन्द्र में सहायिका पद के लिए आवेदन किया था। उसे मैरिट में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था और अनावेदक रोशनी टेकाम को नियुक्ति प्रदान कर दी गई थी। अनावेदक महिला को बीपीएल कार्ड के दस अंक प्रदान किए गए थे। बीपीएल कार्ड में अनावेदक महिला का नाम उसकी सास के साथ जुड़ा हुआ था। इसके खिलाफ उसने कलेक्टर डिंडौरी के समक्ष अपील दायर की थी। कलेक्टर ने अनावेदक महिला की नियुक्ति निरस्त करते हुए उसके पक्ष में आदेश जारी किया था।
अनावेदक महिला ने उक्त आदेश को अतिरिक्त आयुक्त जबलपुर के समक्ष चुनौती दी थी। अतिरिक्त आयुक्त ने कलेक्टर के आदेश को निरस्त करते हुए अनावेदक महिला की नियुक्ति को सही ठहराया था। इसे चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने नियुक्ति संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए थे। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनावेदक महिला का विवाह साल 2016 में हुआ था और सास के बीपीएल कार्ड में उसका नाम शादी से पहले जुड़ गया था। इसके अलावा अनावेदक महिला के ससुस सहायक प्रध्यापक के पद पर पदस्थ थे। उनकी मौत के बाद जेठ को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।
विज्ञापन
एकलपीठ ने अनावेदक महिला के खिलाफ क्यों एफआईआर दर्ज नहीं करवाने के संबंध में उसके अधिवक्ता से स्पष्टीकरण मांगा था। महिला के कारण एफआईआर दर्ज नहीं करवाते हुए कॉस्ट लगाकर याचिका खारिज करने का आग्रह किया गया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए दस हजार की कॉस्ट लगाकर अतिरिक्त आयुक्त के आदेश को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सुदीप सिंह सैनी ने पैरवी की।
विज्ञापन
बता दें कि याचिकाकर्ता संध्या मरावी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसने डिंडौरी में समनापुर आंगनवाड़ी केन्द्र में सहायिका पद के लिए आवेदन किया था। उसे मैरिट में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था और अनावेदक रोशनी टेकाम को नियुक्ति प्रदान कर दी गई थी। अनावेदक महिला को बीपीएल कार्ड के दस अंक प्रदान किए गए थे। बीपीएल कार्ड में अनावेदक महिला का नाम उसकी सास के साथ जुड़ा हुआ था। इसके खिलाफ उसने कलेक्टर डिंडौरी के समक्ष अपील दायर की थी। कलेक्टर ने अनावेदक महिला की नियुक्ति निरस्त करते हुए उसके पक्ष में आदेश जारी किया था।
विज्ञापन
अनावेदक महिला ने उक्त आदेश को अतिरिक्त आयुक्त जबलपुर के समक्ष चुनौती दी थी। अतिरिक्त आयुक्त ने कलेक्टर के आदेश को निरस्त करते हुए अनावेदक महिला की नियुक्ति को सही ठहराया था। इसे चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने नियुक्ति संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए थे। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनावेदक महिला का विवाह साल 2016 में हुआ था और सास के बीपीएल कार्ड में उसका नाम शादी से पहले जुड़ गया था। इसके अलावा अनावेदक महिला के ससुस सहायक प्रध्यापक के पद पर पदस्थ थे। उनकी मौत के बाद जेठ को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।
विज्ञापन
एकलपीठ ने अनावेदक महिला के खिलाफ क्यों एफआईआर दर्ज नहीं करवाने के संबंध में उसके अधिवक्ता से स्पष्टीकरण मांगा था। महिला के कारण एफआईआर दर्ज नहीं करवाते हुए कॉस्ट लगाकर याचिका खारिज करने का आग्रह किया गया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए दस हजार की कॉस्ट लगाकर अतिरिक्त आयुक्त के आदेश को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सुदीप सिंह सैनी ने पैरवी की।
