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MP News: पूर्व मंत्री बब्बू को मिली सजा हाईकोर्ट ने की निरस्त, एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय ने किया था दंडित

Thu, 13 Apr 2023 08:54 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 13 Apr 2023 08:54 PM IST
सार

एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय भोपाल ने विधायक तथा पूर्व मंत्री हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू को धारा 353 के तहत उक्त सजा से दंडित किया था। जिसके खिलाफ उक्त अपील दायर की गई थी। 

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MP News: High Court cancels the sentence of former minister Babbu, who was punished by MP-MLA special court
पूर्व मंत्री हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू को हाईकोर्ट से राहत मिली है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पूर्व मंत्री हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू को हाईकोर्ट से राहत मिली है। शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में एमपी-एमएलए की विशेष न्यायालय ने उन्हें सजा से दंडित किया था। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने दायर अपील की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया है।
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अभियोजन के अनुसार पूर्व मंत्री व भाजपा नेता हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू ने विधायक रहते हुए दिनांक 28 जून 2000 को गोहलपुर थाने में सब इंस्पेक्टर रामस्वरूप पंद्रे के साथ गाली-गलौज करते हुए स्टूल से हमला करने का प्रयास किया था। दरअसल पुलिस ने कृषि उपज मंडी के सामने कार में सवार 6 व्यक्तियों को हथियार के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 25 आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। जिस कार में युवक सवार थे, वह विधायक के भाई के नाम पर रजिस्टर्ड थी।
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विधायक बब्बू सब इंस्पेक्टर से इस बात पर आक्रोशित थे कि 24 जून 2000 को इंदू तिवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण उसे न्यायालय से जमानत का लाभ मिल गया। इंदू तिवारी के नाम पर रजिस्टर्ड ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मारी थी। कार में विधायक हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू तथा उनके भाई परमजीत सिंह सवार थे। पुलिस ने धारा 307 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। जिसकी विवेचना सब इस्पेक्टर पंद्रे द्वारा की गई थी। इंदू तिवारी को घटना के दो दिन बाद न्यायालय से जमानत का लाभ मिल गया था।
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पुलिस ने विधायक हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय भोपाल ने विधायक तथा पूर्व मंत्री हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू को धारा 353 के तहत उक्त सजा से दंडित किया था। जिसके खिलाफ उक्त अपील दायर की गई थी। अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि घटना 28 जून 2000 की है और एफआईआर दो साल बाद मार्च 2002 में दर्ज की गई। देर से एफआईआर दर्ज करवाए जाने के संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।


इसके अलावा शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा है कि घटना के समय वह शासकीय कार्य नहीं कर रहे थे। प्रकरण में गवाह बनाए गए दो पुलिस कर्मियों ने घटना से इंकार कर दिया था। इसके कारण उन्हें पक्षविरोधी घोषित किया गया था। प्रकरण में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं बनाए गए थे। सुनवाई के बाद एकलपीठ ने अपील को स्वीकार करते हुए एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय द्वारा धारा 353 के तहत एक साल के कारावास तथा 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किए जाने के आदेश को खारिज कर दिया। अपीलकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की।
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