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MP News: जुआ खेलने के अपराध में दोषमुक्त हुए पुलिस आरक्षक पर विभागीय दंडात्मक आदेश को हाईकोर्ट ने ठहराया सही

Tue, 27 Jun 2023 09:54 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 27 Jun 2023 09:54 PM IST
सार

याचिका में कहा गया था कि विभागीय जांच के दौरान सिर्फ विभागीय गवाह ने उसके खिलाफ बयान दिए थे। स्वतंत्र गवाह ने अपने बयान में मामले की जानकारी नहीं होना बताया था। इसके बावजूद भी उसे विभागीय जांच के बाद सजा से दंडित किया गया।

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MP High Court upheld departmental punitive order on the police constable acquitted in the crime of gambling
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जुआ खेलने के अपराध में दोषमुक्त होने के बावजूद भी विभागीय जांच में दोषी करार दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि विभागीय जांच में तभी हस्ताक्षेप किया जा सकता है, जब बिना किसी साक्ष्य के आधार पर की गई हो। एकलपीठ ने साक्ष्य के आधार पर की गई विभागीय जांच को सही मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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छिंदवाड़ा में पदस्थ एसएएफ आरक्षक उत्कृष्ट उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि भोपाल पुलिस ने उस पर जुआ खेलने का प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए थे। जुआ खेलने के अपराध में न्यायालय ने उसे दोषमुक्त करार दिया था। विभागीय जांच में उसे दोषी पाते हुए एक वेतन वृद्धि की सजा से दंडित किया गया। इसके खिलाफ उसने अपील दायर की थी, जो खारिज कर दी गई।
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याचिका में कहा गया था कि विभागीय जांच के दौरान सिर्फ विभागीय गवाह ने उसके खिलाफ बयान दिए थे। स्वतंत्र गवाह ने अपने बयान में मामले की जानकारी नहीं होना बताया था। इसके बावजूद भी उसे विभागीय जांच के बाद सजा से दंडित किया गया। याचिका में विभागीय दंडात्मक सजा को निरस्त करने की राहत चाही गई थी। एकलपीठ ने अपने आदेश में पाया कि गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मचारी का याचिकाकर्ता से कोई द्वेष नहीं था और जांच में वह विभागीय गवाह था। विभागीय जांच में हाईकोर्ट तभी हस्तक्षेप करता है जब बिना किसी साक्ष्य के आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला जाता है। इस मामले में साक्ष्य होने पर विभागीय जांच की गई थी। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका को खारिज कर दिया।
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